CG NEWS:शिक्षा विभाग युक्तियुक्तकरण: लगाए एक तीर से कई निशाने… सियासत के साथ शिक्षकों का विरोध भी एकदम हाई है ..! नई शिक्षक भर्ती PSC पार्ट टू तो नही है .?

CG NEWS:बिलासपुर (मनीष जायसवाल)।  स्कूल शिक्षा विभाग के युक्तियुक्तकरण के जुड़े एक आदेश ने करीब पिछले आठ महीने पुरानी विष्णु देव साय सरकार के सामने विरोध का नया मोर्चा खोल दिया है। बस्तर टाइगर केदार जैन की अगुवाई में 16 और मोर्चा का 22 अगस्त को प्रदेश भर में शिक्षक मोर्चे ने अपनी एकता का परिचय देते हुए सिर्फ ट्रेलर जारी किया है। युक्ति युतिकरण अपने साथ बहुत बड़ा विवाद साथ लाया है। तो इस नीति ने एक तीर से एक साथ कई निशाने साध लिए है ..।

विभाग के इस तौर तरीके को देख कर माना जा रहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने पिछली सरकार के एक रिटायर अफसर की विचारधारा से गढ़े हुए सियासी गणित के फार्मूले को सियासी दंगल में बदलने के लिए इस विभाग के उच्च पदों पर बरसो से जमे हुए दूसरे पंक्ति के अफसरों ने पिछली नई शिक्षक भर्ती , शिक्षक पदोन्नति, शिक्षको की मूल समस्याओं और कार्य योजनाओं में चल रही अफसरशाही के साथ साथ पिछली कई नाकामियो पर पर्दा डालने के लिए अपने पिटारे से युक्ति युक्तकरण के जिन्न को विवादित नियमो के साथ पेश किया है..।इसके आने के बाद शिक्षको के प्रमुख मुद्दे चर्चा से बाहर हो गए है।
अब नई भर्ती नही होने और कई स्कूल को बंद करने के लिए उनके युक्ति युक्तकरण की वजह से राज्य में  सियासी पारा चढ़ चुका है। जिसकी गूंज आने वाले समय में सुनाई देगी।वही अब जिले से लेकर ब्लाक तक के शिक्षकों का भी विरोध भी एकदम हाई है..। अब सवालों के घेरे में सिस्टम है।

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लेकिन इसका एक पक्ष यह भी है कि देश में शिक्षा का अधिकार कानून लागू है।
तात्कालिक नई भर्ती राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए फिलहाल संभव नहीं दिखाई दे रही है।
ऐसे में जब स्कूल के भवन है, छात्र है, शिक्षक है तो एकल शिक्षक और शिक्षक विहीन स्कूलों में शिक्षको को मर्ज करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग की युक्ति युक्तिकरण की प्रक्रिया कोई गैर वाजिब नीति नही है..!
देखा जाए तो स्कूल शिक्षा विभाग अगर सिर्फ सुधार चाहता तो सिर्फ स्कूलों के डाटा के आधार पर एक सूत्रीय प्रशासनिक सर्जरी के रूप में शिक्षकों का प्रशासनिक ट्रांसफर कर सकता है..। पर विभाग ने आम सहमति का युक्ति युक्तकरण का रास्ता चुना है।

लेकिन बड़ी चूक यह है कि इस नीति को व्यावहारिक बनाने के लिए जिन पर यह नीति लागू होने वाली है उन्हे भरोसे में नहीं लिया गया है। अभी जो नीति नियम समाने आए है उससे बसेरा बना चुके शिक्षकों को अपना बसेरा उजाड़ने का डर सता रहा है।
वही दस स्कूली छात्रों से कम दर्ज संख्या वाले स्कूलों के छात्रों के लिए भी कोई नीति अन्य स्कूलों में मर्ज करने के अलावा अभी तक सामने नहीं आई है।

कहते है कि युक्ति युतिकरण के कोई नीति नियम पहले से तय नहीं थे। परिस्थिति और विभाग की सुविधा के हिसाब से 2014 के युक्ति युतिकरण के कई नीति नियमों को इसमें जोड़ा घटाया गया है।कहा जा रहा है कि हाल ही में जारी हुए युक्ति युतिकरण के नियम शिक्षक भर्ती पदोन्नति, स्कूल सेटअप से पूरी तरह मेल नही खाते है..।वही छात्रों की दर्ज संख्या के आधार पर शिक्षक अनुपात में प्रधान पाठक को शिक्षक के रूप में गिना जाना जैसे नियम विभाग के लिए जारी राजपत्र से पूरी तरह मेल नहीं खाते है।यह भी कहा जा रहा है कि प्रधान पाठक का पद प्रशासनिक होता है इसे युक्ति युतिकरण शिक्षक के रूप में गिना जा रहा है।

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इसमें शिक्षक नेताओ का मत है कि युक्ति युक्तिकरण की प्रक्रिया में दर्ज संख्या का आधार स्कूल के सेटअप का नया निर्धारण कर प्रधान पाठक को शिक्षक मान कर
अतिशेष की व्यावहारिक दृष्टि से सही नहीं है।
सोशल मिडिया में इस बात की विशेष चर्चा है कि किसी भी शासकीय सेवा में नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि होती है इस अवधि में कार्य संतोषजनक न पाए जाने पर सेवा समाप्त हो जाती है। ऐसे में परिवीक्षा अवधि के दौरान नए शिक्षको का तबादला हो सकता है। ये सिर्फ एक साल की सेवा में प्रतिनियुक्ति में कही भी कूद फांद कर सकते है…। तो इन्हे अतिशेष मान कर हटाया क्यों नही जा सकता ..! इनके नियोक्ता में बदलाव तो नही हो रहा है।
जब 2014 मे हुए युक्ति युक्तिकरण में एक साल की सेवा वाले परिवीक्षा धीन नई भर्ती के शिक्षक को अतिशेष में शामिल किया गया था जबकि 2024 में यह नियम नई भर्ती पर लागू नहीं। आखिर इस बैच से कुछ खास लोगो से प्रेम क्यों है …। कही यहां पर भी तो PSC पार्ट टू तो नही है ..?

शिक्षको को बड़ी खामी इस प्रकिया में यह भी नजर आती है कि अतिथि शिक्षक की जगह अनुभवी नियमित शिक्षको को अतिशेष बनाया जा रहा है।2014 में युक्ति युतिकरण की इस प्रक्रिया में प्रधान पाठक को इस प्रक्रिया से दूर रखा गया अब 2024 ये यह वर्ग भी शामिल है।अब एक ही परिसर में संचालित प्राथमिक स्कूलों मिडिल स्कूलों एकीकरण होने पर दोनो विद्यालय के हेड मास्टर का पद युक्ति युक्ति करण के दायरे में आएगा या फिर ऐसी स्थिति में हेड मास्टर सिर्फ शिक्षक की भूमिका में रह जाएगा ..? ठीक ऐसा ही कम दर्ज संख्या वाले स्कूलों को बंद करने पर यही स्थिति बनने वाली है ऐसे में यहां के शिक्षक और प्रधान पाठक भी अतिशेष हो रहे है। जिससे भविष्य में
इन पदों पर पदोन्नतियां के रास्ते में रुकावट दिखाई दे रही है। इससे उनका भविष्य क्या होगा इसका भी कोई विशेष उल्लेख नहीं है।

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एलबी वर्ग के गुरुजी ठहरे संघर्ष की आग में तपे हुए कैडर .. ये इतना जानते है कि तुम डाल डाल तो हम पात पात..!
प्रदेश का इतिहास गवाह रहा है कि इस वर्ग के ऊपर सरकार ने नियम कायदे और नीतियां सिर्फ थोपी है।
जिसका समाधान इन्होंने ने कभी आंदोलन तो कभी न्यायालय के रास्ते लड़ कर पाया है। क्योंकि ये वर्ग मानता है कि उनके माथे पर संघर्ष लिखा हुआ है। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग इस बार कही बड़ी गलती कर चुका है।

माना जा रहा है कि स्कूल शिक्षा विभाग अगर अपनी नीतियों की समीक्षा करें तो इस प्रक्रिया के नीति नियमों में सुधार की गुंजाइश अभी बाकी है..!अब सारा खेल डाटा का है। यू डाइस के आंकड़े तो कुछ और ही कहते हैं।
जब विकासखण्ड स्तरीय समिति से प्राप्त अतिशेष शिक्षकों की सूची के आंकड़े आएंगे तो बहुत कुछ नवीन सुधार हो सकता है। वह भी तब जब अगर स्कूल शिक्षा के अधिकारी शिक्षको और सरकार के मध्य चल रहे गतिरोध को कम करने में रूचि दिखाए। अभी शिक्षकों के पास विकल्प अधिक है विभाग के पास सिर्फ अपनी कलम है ..

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