दखल: BJP/कांग्रेस के बीच “तेरा..मेरा” के खेल में क्या छिपा और क्या उजागर..?

( गिरिजेय )अपने समय में बहुत लोकप्रिय हुई फ़िल्म हम आपके हैं कौन…? में एक दिलचस्प सीन है। जिसमें सिनेमा के किरदार एक गोल घेरे में बैठे हैं….। पीछे ग्रामोफोन पर गाना चल रहा है – हंसता हुआ नूरानी चेहरा….।

सीन पर नज़र आ रहे किरदार एक तकिया को एक दूसरे की तरफ़ उछाल रहे हैं….। यह खेल ऐसा है कि पीछे चल रहा गाना बंद होते ही तकिया जिसके हाथ में रह जाता है, उसे एक गाना गाकर सुनाना पड़ता है…। मस्ती के दौर में यह खेल चलता है। यह खेल बच्चों के साथ ही बड़ों के बीच भी काफ़ी लोकप्रिय है….। और लगता है कि हमारे राजनीतिक नेताओं को जब भी मौका मिलता है, इस खेल का मजा लेने से नहीं चूकते…।

छत्तीसगढ़ में बस्तर इलाके के बीजापुर में होनहार – समर्पित पत्रकार मुकेश चंद्राकर की निर्मम हत्या के बाद इस मामले में कथित आरोपी ठेकेदार को “मेरा नहीं तेरा….” बताने का खेल जिस तरह चला, उसे देखकर सिनेमा हम आपके हैं कौन…. ? का सीन याद आ गया ।

दिल को दहला देने वाली इस शर्मनाक वारदात के बाद भी इस खेल का मज़ा ले रहे सियासत के खिलाड़ियों का चाहे जो भी मकसद रहा हो । लेकिन कोई उनसे पूछ सकता है कि क्या इस तरह के खेल में उलझाकर किसी इलाक़े में चल रहे भ्रष्टाचार , मनमानी और नापाक गठजोड़ पर से लोगों की नज़र हटाई जा सकती है..?

और पूछा तो यह भी जा सकता है कि चाहे पार्टी कोई भी हो – गठजोड़ में शामिल लोग इतने करीब़ क्यों आ जाते हैं… कि बाज़ू खड़े होकर मधुर मुस्कान के साथ तस्वीर मिल जाती है… ?

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छत्तीसगढ़ में बस्तर इलाके के बीजापुर में प्रतिभावान युवा पत्रकार मुकेश चंद्राकर की निर्मम हत्या कर दी गई। इस मामले में बीजापुर के ठेकेदार सुरेश चंद्राकर का नाम कथित तौर पर सामने आ रहा है। इसके बाद छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान भी मचा हुआ है। प्रदेश में सरकार चला रही बीजेपी और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस में इस बात को लेकर होड़ मची हुई है कि आरोपी मेरा नहीं तेरा है….।

इस सिलसिले में नेताओं के साथ तस्वीरें जारी की जा रही हैं। “हम आपके हैं कौन…?” की तर्ज़ पर “सुरेश चंद्राकर आपके हैं कौन…. ?” का सवाल एक – दूसरे पर उछालने का खेल चल रहा है। इस दिलचस्प खेल में आरोपी की पार्टी दिन भर में कई बार बदलती रही।

छत्तीसगढ़ में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की निर्मम हत्या के बाद देशभर के मीडिया मैं खबरें आ रही है। इसे लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चैनलों में डिबेट हो रहे हैं। इधर वारदात के बाद छत्तीसगढ़ में सियासी हलचल तेज हो गई है।

हलचल इस बात को लेकर है कि इस वारदात में जिस ठेकेदार सुरेश चंद्राकर का नाम सामने आ रहा है वह किस पार्टी का है। हत्याकांड के दूसरे दिन एक तस्वीर तेजी से वायरल हुई जिसमें ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के साथ दिखाया गया है।

इसके साथ ही यह बात भी सामने आई कि सुरेश चंद्राकर बीजापुर के एमएलए विक्रम मंडावी का भी करीबी रहा है। विक्रम मंडावी के साथ भी उसकी तस्वीर सोशल मीडिया में चलती रही।

प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा इस हत्याकांड के बारे में मीडिया से बात करते हुए भी जिक्र किया कि सुरेश चंद्राकर प्रदेश छत्तीसगढ़ कांग्रेस अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश सचिव के पद पर कार्यरत है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में पहले हुई कई घटनाओं में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं नेताओं की संलिप्तता की बात कहीं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस पार्टी में अपराध और अराजकता का बोलबाला है ।पार्टी के नेता न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं बल्कि वह ऐसे कार्यों को बढ़ावा भी दे रहे हैं।

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दूसरी तरफ कांग्रेस की ओर से भी एक तस्वीर जारी की गई।

इंडियन नेशनल कांग्रेस छत्तीसगढ़ के एक्स अकाउंट पर सुरेश चंद्राकर की एक तस्वीर साझा की गई है। इसके साथ लिखा गया है कि सुरेश चंद्राकर कांग्रेस के नहीं बीजेपी के नेता हैं। बीजापुर भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष और बस्तर प्रभारी जी वेंकट ने मुकेश चंद्राकर के हत्यारे सुरेश चंद्राकर को हार पहना कर भाजपा प्रवेश कराया।

ठेकेदार और भाजपा नेता सुरेश चंद्राकर ने 15 दिन पहले मुख्यमंत्री निवास में जाकर उनसे मुलाकात की थी। कांग्रेस का यह भी कहना है कि भाजपा में हिम्मत है तो मुख्यमंत्री निवास की सीसीटीवी फुटेज और आगंतुक लिस्ट जारी करें।

इधर जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर के अध्यक्ष लालू राठौड़ की ओर से पिछले अप्रैल में प्रेस क्लब बीजापुर अध्यक्ष लिखा गया एक पत्र भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ है।

जिसमें पत्रकार मुकेश चंद्राकर सहित दो अन्य पत्रकारों के बहिष्कार की बात कही गई है।

रात होते -होते बीजेपा नेता जी वेकट का बयान भी सामने आ गया । जिसमें उन्होने बताया कि सुरेश चंद्राकर के साथ उनकी तस्वीर 2021 की है। उस समय सुरेश चंद्राकर को ठेकेदार संघका जिलाध्यक्ष चुना गया था ।

तब सभी लोगों ने उनका स्वागत किया था और सभी के साथ उन्होने ( जी वेंकट ) ने भी माला पहनाया था ।

छत्तीसगढ़ में हुई एक शर्मनाक – हृदय विधायक घटना के बाद राजनीतिक दलों के बीच सुरेश चंद्राकर मेरा नहीं तेरा है… बताने की होड़ लगी रही । जिससे दिन में कई बार आरोपी की पार्टी की बदलती रही। ज़ाहिर सी बात है कि सुरेश चंद्राकर मेरा नहीं तेरा है…. बताने का यह खेल आम लोगों को यह बताने के लिए ही चल रहा है कि ऐसे तत्व किसके अधिक नज़दीक हैं…. ?

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लेकिन शायद हक़ीकत की दुनिया सिनेमाई दुनिया से अलग है। यहाँ कोई भी यह सवाल कर सकता है कि क्या इस तरह के खेल के पीछे उन बातों को छिपाया जा सकता है, जिस पर बहस ज़रूरी है …..?

मसलन बस्तर इलाके में आख़िर भ्रष्टाचार और इसमें लिप्त लोगों के बीच ऐसा गठजोड़ क्यों है कि एक उजागर करने वाले एक पत्रकार को अपनी जान देकर इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है…? ऐसे किसी त्तत्व को अपने नज़दीक कभी नहीं आने देंगे – इसे लेकर सियासी खिलाड़ियों के बीच होड़ कब नज़र आएगी..? अपराधी तो अपराधी होता है…।

वह किस पार्टी के नज़दीक है, इस बात से उसका अपराध कम या ज्यादा नहीं हो जाता। लेकिन यह जानने की दिलचस्पी शायद सभी को होगी कि आख़िर ऐसे लोग किसी पार्टी के इतने नज़दीक क्यों आते हैं…. ? तभी इस सवाल का भी जवाब मिल जाएगा कि इस खेल में क्या छिप रहा है और क्या उजागर हो रहा है..?

Shri Mi

पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर

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