cg news- ऑनलाइन परीक्षा सेंटर के नाम पर कॉलेज से 12.39 लाख की ठगी, फर्जी प्रस्ताव से शुरू हुआ खेल
आरोप है कि ठगों ने खुद को एचसीएल टेक्नोलॉजी के परीक्षा सेंटर विभाग से जुड़ा बताकर कॉलेज प्रबंधन को भरोसे में लिया। पहले ई-मेल के जरिए परीक्षा केंद्र शुरू करने का प्रस्ताव भेजा गया, फिर कॉलेज का मुआयना कराने के लिए व्यक्ति को भेजकर प्रक्रिया को वास्तविक दिखाया गया। इसके बाद अलग-अलग मदों में रकम जमा कराई गई। भुगतान के बाद संपर्क बंद होने पर कॉलेज प्रबंधन को ठगी का संदेह हुआ।

CG NEWS/दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के अंडा स्थित शैल देवी महाविद्यालय में ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू कराने के नाम पर 12 लाख 39 हजार 483 रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है।
आरोप है कि ठगों ने खुद को एचसीएल टेक्नोलॉजी के परीक्षा सेंटर विभाग से जुड़ा बताकर कॉलेज प्रबंधन को भरोसे में लिया। पहले ई-मेल के जरिए परीक्षा केंद्र शुरू करने का प्रस्ताव भेजा गया, फिर कॉलेज का मुआयना कराने के लिए व्यक्ति को भेजकर प्रक्रिया को वास्तविक दिखाया गया। इसके बाद अलग-अलग मदों में रकम जमा कराई गई। भुगतान के बाद संपर्क बंद होने पर कॉलेज प्रबंधन को ठगी का संदेह हुआ।
शैल देवी महाविद्यालय के अध्यक्ष राजन कुमार दुबे की शिकायत पर नेवई पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी, बैंक खातों और रकम के लेन-देन की जानकारी जुटा रही है।
कॉलेज अध्यक्ष के मुताबिक, 12 अप्रैल 2025 को कॉलेज के आधिकारिक ई-मेल पर एचसीएल टेक्नोलॉजी के परीक्षा सेंटर विभाग के नाम से एक मेल आया था। इसमें कॉलेज में ऑनलाइन परीक्षा सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया था।
मेल में वेदांत कपूर नाम के व्यक्ति का मोबाइल नंबर भी दिया गया था। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन की उक्त व्यक्ति से बातचीत शुरू हुई।
17 अप्रैल को कॉलेज के ई-मेल पर एक समझौता पत्र भेजा गया। इसके अगले दिन कॉलेज के निरीक्षण के लिए बुल आई नाम की संस्था से एक व्यक्ति के आने की जानकारी दी गई। 18 अप्रैल को एके साहू नाम का व्यक्ति कॉलेज पहुंचा। उसने कॉलेज भवन और परिसर की तस्वीरें लीं तथा पूरे परिसर का निरीक्षण किया। जाते समय उसने जांच रिपोर्ट भेजने की बात कही। इस प्रक्रिया के बाद कॉलेज प्रबंधन को कथित तौर पर यह भरोसा हो गया कि परीक्षा सेंटर शुरू करने की प्रक्रिया वास्तविक है।
इसके बाद 1 मई को दोपहर करीब 3 बजे से 3:15 बजे तक कॉलेज अध्यक्ष और प्राचार्य कामेश्वर नाथ मिश्रा की जूम मीटिंग हुई। इसमें एचसीएल टेक्नोलॉजी की अनीता नाम की महिला से बातचीत हुई। इसके बाद 5 मई को गोपनीयता और साझेदारी से जुड़े दस्तावेज कॉलेज के ई-मेल पर भेजे गए। कॉलेज प्रबंधन ने 8 मई को इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर वापस भेज दिए।
इसके बाद भुगतान का सिलसिला शुरू हुआ। 19 मई को परीक्षा सेंटर के उपकरणों के नाम पर 5 लाख 98 हजार 743 रुपये का बिल भेजा गया। इसमें एक निजी फर्म का बैंक खाता दिया गया था। कॉलेज ने 21 मई को अपने बैंक खाते से उक्त रकम का भुगतान कर दिया।
इसके बाद डीजी सेट के नाम पर 3 लाख 42 हजार 200 रुपये की मांग की गई। कॉलेज ने 26 मई को यह रकम भी बताए गए खाते में जमा कर दी। इस तरह दो भुगतानों में कॉलेज से 9 लाख 40 हजार 943 रुपये लिए जा चुके थे।
मामला यहीं नहीं रुका। 11 जून को कॉलेज को सामान भेजने और बीमा के नाम पर अलग-अलग रकम जमा करने के लिए कहा गया। परिवहन के नाम पर 1 लाख 35 हजार 700 रुपये और बीमा के नाम पर 1 लाख 62 हजार 840 रुपये मांगे गए।
कॉलेज ने 13 जून को दोनों रकम का भुगतान कर दिया। इन दोनों भुगतानों के बाद कुल जमा राशि 12 लाख 39 हजार 483 रुपये हो गई।
कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक, 12 अप्रैल से 14 जून तक वेदांत कपूर नाम के व्यक्ति से लगातार संपर्क होता रहा। लेकिन 15 जून के बाद उसका मोबाइल नंबर बंद हो गया और ई-मेल का जवाब भी आना बंद हो गया। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन को पूरे मामले में ठगी की आशंका हुई।
संदेह होने पर कॉलेज प्रबंधन ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। अब नेवई पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस भुगतान किए गए बैंक खातों, संबंधित मोबाइल नंबरों, ई-मेल और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित ठगी के पीछे कौन लोग शामिल हैं और रकम कहां ट्रांसफर हुई।







