सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता सुदीप की मांग..मालिकों पर दर्ज हो गैर इरातन हत्या का अपराध…मजदूरों को दिया जाए एक-एक करोड़ा का मुआवजा
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बिलासपुर—प्रदेश और देश के जाने माने अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने रामबोड़ स्थित कुसुम फैक्ट्री संचालकों और प्रबंधकों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किए जाने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट के वकील ने बताया कि प्लांट चालू होने से पहले सुरक्षा जांच करने वाले अधिकारी पर कार्यवाही हो। मृतक मजदूर के परिवार को एक एक करोड रुपए का मुआवजा दिया जाना उचित होगा।
सुप्रीम कोर्ट के जाने माने अधिवक्ता सुूदीप श्रीवास्तव ने रामबोड़ प्लान्ट हादसा को लेकर चिंता जाहिर किया है। उन्होने 11 जनवरी को कुसुम फैक्ट्री में हुए हादसे पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। श्रीवास्तव ने कहा कि चार-चार मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी है । इस अपराध के लिए कुसुम फैक्ट्री के संचालकों और प्रबंधकों पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
श्रीवास्तव ने आगे कहा कि कुछ दिन पहले ही चालू हुए प्लांट की सुरक्षा जांच नियमों के तहत की गई होगी । जिस अधिकारी ने जांच कर प्लांट को हरी झण्डी दिखाया होगा उसे बुलाकर पूछताछ किया जाना चाहिए। यही नहीं जिन चार मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। उनके परिवारों को एक-एक करोड रुपए का मुआवजा भी दिया जाना चाहिए।
सुदीप श्रीवास्तव ने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य में औद्योगिक सुरक्षा के मापदंडों का खुला उल्लंघन पहले से ही होता आ रहा है। इसके पहले भी विभिन्न फैक्ट्री में हादसों के बाद भी सरकार को चेत नहीं है। प्रदेश में लगभग हर साल कई फैक्ट्रियों में ऐसे हादसे हो रहे हैं। मजदूरों की जान जा रही है। बावजूद इसके औद्योगिक सुरक्षा के मापदंडों की खुली उपेक्षा की जाती है।
कुसुम फैक्ट्री में सिलो कोयले के वजन को संभाल नहीं सका। और इसके बाद हादसा को टाला नहीं जा सका। इससे जाहिर होता है कि भयंकर लावरवाही के साथ निर्माण में गुणवत्ता को लेकर भारी लापरवाही को अंजाम दिया गया है। आवश्यक क्षमता का पदार्थ उपयोग न कर पैसे बचाने के प्रयास किया गया है। हमार राज पार्टी की ओर से ऐसे सभी प्लान्ट की जांच की मांग है।









