निकायों तक पहुंचा भाजपा का खरीद-फरोख्त का खेल,अशोक गहलोत बोले: पार्षदों को दिए जा रहे 2-2 करोड़ के प्रलोभन
गहलोत ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए 'इक्वल लेवल प्लेइंग फील्ड' होना अत्यंत आवश्यक है, लेकिन प्रदेश में एकतरफा पुलिस कार्रवाई की जा रही है, पार्षदों को डराया-धमकाया जा रहा है और मंत्रियों को बिठाकर डेढ़ करोड़, दो करोड़ व ढाई करोड़ रुपये तक के भारी प्रलोभन दिए जा रहे हैं। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि देश में भाजपा के पास पैसों की कमी नहीं है। देशभर में निर्वाचित सरकारों को गिराने के लिए धनबल का जो तमाशा किया गया, 'जैसा देश वैसा भेष' की तर्ज पर वही प्रेरणा अब नीचे जिलों और ब्लॉकों तक पहुंच चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने तीखी आलोचना करते हुए कहा कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग, मनमाना परिसीमन, मुख्यमंत्री के स्वयं के रोड शो और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री की मॉनिटरिंग के बावजूद 64% वोट भाजपा के खिलाफ पड़े हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निकाय चुनावों में भाजपा की झूठी जीत की बधाई देना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस कारण अब राज्य सरकार पर किसी भी तरह से ज्यादा से ज्यादा बोर्ड बनाने का भारी दबाव है।

जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के नतीजों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार को जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गहलोत ने आरोप लगाया कि निकाय बोर्डों पर नियंत्रण हासिल करने के लिए धनबल, पुलिस और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर मिलना जरूरी है, लेकिन उनके अनुसार चुनाव के बाद निर्दलीय और विपक्षी पार्षदों पर दबाव बनाया जा रहा है।
गहलोत ने दावा किया कि कुछ पार्षदों को कथित तौर पर डेढ़ करोड़, दो करोड़ और ढाई करोड़ रुपये तक के प्रलोभन दिए जा रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर सत्ता और धनबल के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कहा कि इसका असर अब स्थानीय स्तर तक दिखाई दे रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा की ओर से इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोई जवाब सामने नहीं आया है।
राजस्थान के 309 शहरी निकायों में हुए चुनाव में भाजपा सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। उपलब्ध चुनाव परिणामों के मुताबिक, कुल 10,244 वार्डों में भाजपा ने 4,179 और कांग्रेस ने 3,613 वार्ड जीते। निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्डों में जीत दर्ज की।
वोट शेयर के आंकड़ों को लेकर भी गहलोत ने सरकार पर निशाना साधा। चुनाव परिणामों के अनुसार भाजपा को करीब 35.19 प्रतिशत और कांग्रेस को 34.25 प्रतिशत वोट मिले, यानी दोनों दलों के बीच वोट शेयर का अंतर 0.94 प्रतिशत रहा। गहलोत ने इन आंकड़ों के आधार पर दावा किया कि सीटों और वोट प्रतिशत के बीच बड़ा अंतर वार्ड परिसीमन के प्रभाव को दिखाता है और उन्होंने कई निकायों में परिसीमन पर सवाल उठाए।
जोधपुर का उदाहरण देते हुए गहलोत ने दावा किया कि कांग्रेस को भाजपा से अधिक वोट मिलने के बावजूद दोनों दलों को 44-44 सीटें मिलीं। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्डों के परिसीमन में कांग्रेस समर्थक क्षेत्रों को अलग तरीके से बांटा गया, जबकि भाजपा समर्थक क्षेत्रों में भी वार्डों की संरचना बदली गई। चुनाव परिणामों के अनुसार जोधपुर नगर निगम में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने 44-44 वार्ड जीते हैं।
जयपुर को लेकर भी गहलोत ने परिसीमन पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस को अधिक वोट मिलने के बावजूद भाजपा अधिक वार्ड जीतने में सफल रही। जयपुर के अंतिम उपलब्ध नतीजों में भाजपा के पास 78 और कांग्रेस के पास 57 सीटें हैं, जबकि निर्दलीय 15 सीटों पर हैं।
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समेत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के गृह क्षेत्रों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भरतपुर, अजमेर, अलवर, जोधपुर, पाली और झालावाड़ जैसे क्षेत्रों में भाजपा को अपेक्षित बहुमत नहीं मिला। चुनाव परिणामों के अनुसार भाजपा ने 10 नगर निगमों में से चार—जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा और कोटा—में स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस ने बीकानेर नगर निगम में बहुमत हासिल किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अब चुनाव के बाद बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय और कांग्रेस पार्षदों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने झुंझुनूं, नीमराना, टोंक, ज


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