मरीज की 1-1 सांस पर रहेगी हैदराबाद मेडिकल स्टाफ की भी नजर..अपोलो में लगा प्रदेश का पहला सेन्सर सिस्टम..पलक झपकते पहुंचेगा स्टाफ
अपोलो का दावा...प्रदेश का पहला एआई तकनिक सेन्सर से कमाण्ड

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बिलासपुर—अपोलो प्रबंधन ने दावा किया है कि अब भर्ती मरीज की एक एक जैविक गतिविधियों और परेशानियों का आंकड़ा आनलाइन होगा। मरीज को आने वाली परेशानियों की भी जानकारी वार्निंग सिस्टम के साथ जुड़ा होगा। किसी प्रकार की परेशानी होने पर अपोलो स्टाफ मरीज के पास कुछ ही समय में पहुंच जाएगा। यह सुविधा प्रदेश में पहली बार अपोलो अस्पताल में उपलब्ध कराया जा रहा है। यह जानकारी अपोलो के सीईओ अरनव राहा ने दी। उन्होने बताया कि नव वर्ष पर प्रदेश वासियों के लिए स्मार्ट बेड सबसे बड़ा तोहफा है। अर्ली वार्निंग से मरिजों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
प्रेसवार्ता कर अपोलो सीईओ अनरव राहा ने बताया कि प्रदेश ही नहीं बल्कि देश में अपोलो का नाम विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधा के लिए लिया जाता है। हमेशा की तरह अपोलो प्रबंधन ने अपने मरीजों की सुविधा और परेशानियों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश वासियों के लिए कुछ नया किया है। अब भर्ती होने वाले मरीजों को न केवल हमेशा के लिए बेहतर चिकित्सा की व्यवस्था होगी। बल्कि मरीजों की देखभाल नवीनतम तकनिकी के माध्यम से भी होगा। बिस्तर पर लेटे मरीजों की एक एक जैविक और चिकित्कीय गतिविधियों पर नजर आन लाइन कन्ट्रोल कमान से रखा जाएगा। ऐसा केवल स्मार्ट बेड के कारण संभव हुआ है। मरीजों के लिए स्मार्ट बेड प्रयोग वाला अपोलो प्रदेश का पहला अस्पताल है।
पत्रकारों को अरनव साहा ने बताया कि अपोलो हॉस्पिटल प्रबंधन अपने मरीजों की समुचित देखभाल के लिए एआई तकनीक आधारित रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम की सुविधा लेगा। अपोलो ने प्रदेश में पहली बार विकसित अर्ली वार्निंग सिस्टम के साथ बेहतर रोगी सुरक्षा के लिए स्मार्ट बेड की शुरुआत कीिया। संस्था प्रमुख साहा ने बताया कि अपोलो समूह सदैव बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा प्रदान करने को लेकर हमेशा प्रतिबद्ध है।
इस बात को ध्यान में रखते हुए मरीजों की बेहतर स्वास्थ्य मॉनिटरिंग सुविधा के मद्देनजर नई तकनीक के सहयोग से मरीज के बिस्तर पर एक सेंसर लगाया जाता है। मजेदार बात है कि सेंसर मरीज के शरीर को स्पर्श भी नहीं करता है। सेंसर एक छोटी मशीन से जुड़ा होता है। इसी सेंसर के माध्यम से मरीज के रक्तचाप, spo2, पल्स, हार्ट रेट, तापमान समेत अन्य गतिविधियों की निगरानी होती है।
किसी भी असामान्यता स्थिति की जानकारी तत्काल संबंधित नर्सिंग, स्टेशन दूरस्थ सेंटर मॉनिटरिंग सिस्टम को मिलता है। संबंधित शिक्षक चिकित्सक इसकी जानकारी तत्काल मरीज के करीब मौजूद स्टाफ को देता है। जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य टीम मौके पर पहुंचकर उपचार शुरू कर देती है। मजेदार बात है कि सब कुछ कुछ मिनट के अन्दर हो जाता है।
राहा ने बताया कि विशेष तकनीक के प्रयोग से मरीज को आने वाली परेशानी असामान्य परिवर्तन का तत्काल ही पता लग जाता है। मरीजों को त्वरित उपचार कर उनके जीवन को बचाने में कारगर सिद्ध होता है। उन्होने जानकारी दिया कि छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम इस तकनीक का उपयोग प्रदेश अपोलो हॉस्पिटल में किया गया है। इसके पहले सभी संबंधित स्टाफ और चिकित्सकों को प्रशिक्षित भी किया गया है। इसका लाभ अंचल के सभी मरीजों को प्राप्त होगा। आरंभिक 10 बिस्तरों के परिणामों को देखने के बाद विस्तार की योजना बनाई जाएगी। उन्होने यह भी बताया कि सेन्सर की सहयाता से मरीज पर हैदराबाद कमान सेन्टर की भी नजर रहेगी।









