CG NEWS:शिक्षक संगठनों से बात करने बुधवार को डीपीआई नें बुलाई मीटिंग… क्या दुरुस्त होंगे आपसी रिश्ते…. ?

CG NEWS:रायपुर (मनीष जायसवाल)  ।लोक शिक्षण संचालनालय ने बुधवार शाम चार बजे कई शिक्षक संगठनों से चर्चा के लिए एक मीटिंग बुलाई है ..। देर आए पर कितना दुरुस्त आए और कितनी दूर तलक दुरुस्त जायेंगे इसका आंकलन तो अभी नही किया जा सकता है। लेकिन लोक शिक्षण संचालनालय के ऊपर आम शिक्षकों के मन में सरकार के खिलाफ नकारात्मकता फैलाने के लिए केदार जैन के नेतृत्व वाले संयुक्त शिक्षक संघ की ओर से लगाए गए आरोप ने पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की कमी का एहसास जरूर कर दिया..। उनके रहते शायद ऐसी स्थिति नही बनती ..! उनके हटते ही चंद दिनों में शिक्षक और विभाग के बीच भरोसे में कमी आई है।

अधिकारियों के लिए शिक्षा विभाग एक काम की तरह हो सकता है। अनेक कर्मचारी उनके अधीनस्थ हो सकते है। लेकिन इनके बीच में रिश्ता अपना पन नहीं बन सकता क्योंकि आज अधिकारियो के पास आज यह विभाग तो कल कोई और विभाग होगा कोई और जिम्मेदारी होगी ..! रिश्ता तो सत्ता और शिक्षकों के बीच बनता और बिगड़ता रहा है। जिसमें बृजमोहन के आम शिक्षकों के साथ साथ शिक्षक नेताओं के मधुर रिश्ते का कोई और सानी पूरे प्रदेश में फिलहाल नहीं दिखाई देता है..! यही वजह है कि बहुत कम समय में बृज मोहन अग्रवाल ने स्कूल शिक्षा विभाग में बड़े रिफॉर्म का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया था। जिस पर प्रदेश के सभी शिक्षक नेताओं को भी भरोसा था। कि समस्याओं को बातचीत से दूर कर लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री बनने के बाद श्री साय से जो भी शिक्षक नेता मिला सीएम ने बड़ी संजीदगी से उनको सुना और आश्वासन जरूर दिया है। उनकी सरलता सहजता की तारीफ जरूर किया है । उन्हे दिए गए ज्ञापनों में सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति, शिक्षकों की नियुक्ति तिथि सेवा गणना , पुरानी पेंशन का मामला ऐसे कई सारे मुद्दे उनके संज्ञान में है .!इस बात को शिक्षक नेता खुद कहते है।

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अभी इस भार साधक मंत्री के रूप में स्कूल शिक्षा विभाग की कमान खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पास है।
स्वाभाविक है कि मुख्यमंत्री के पास काम का दबाव बहुत अधिक रहता है उनके पास दर्जनों विभाग है। राज्य की सियासत, लोगो से मेल मुलाकात, लगभग 52 प्रकार के विभागों की मॉनिटरिंग कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शासन की योजनाओं की समीक्षा संचालन, प्रदेश का दौरा अनेकों कार्यक्रम में उपस्थित और कई तरह की जिम्मेदारियां का बोझ सबसे अधिक सीएम के उपर रहता है।

लेकिन भार साधक मंत्री होने के नाते प्रदेश के सबसे बड़े शिक्षा विभाग और पहले से दर्जनों समस्याओं से उलझे हुए इस विभाग की नीतियों पर पैनी नजर रख पाना मुख्यमंत्री के लिए शायद संभव नहीं है..।
ठीक उसी तरह जैसे एकल शिक्षकिय प्राथमिक स्कूल के प्रधान पाठक के पास पांच कक्षाओं की जवाबदारी रहती है।
इसलिए ऐसा लगता है कि विभाग अधिकारियों के भरोसे है। भरोसे में चल रहे स्कूल शिक्षा विभाग में इसी भरोसे की कमी की वजह शिक्षक नेताओं का गुस्सा उबल रहा था …! जिसे अधिकारियो ने नजर अंदाज कर दिया..।

विभाग में चल रही आन लाइन अवकाश,शिक्षकों की पदोन्नति , सेवा पुस्तिका संधारण एवं सत्यापन, एरियर्स राशि का भुगतान, परीक्षा अनुमति जैसे कई लंबित विषयों पर विभाग की पकड़ कमजोर होती हुई दिखाई दी है। तो दूसरी और एक पर एक आदेश आए दिन थोपे जा रहे हैं। शिक्षकों का ध्यान पढ़ाई करने में कम आदेशों पर अमल करने में ज्यादा व्यतीत हो रहा है।

विभाग की किरकिरी तो कई दिन से हो रही है। मंगलवार को जब बात शिक्षको की सरकार के खिलाफ नकारात्मकता की आई तो व्यवस्था हरकत में आई आनन फानन में बुधवार को शिक्षक नेताओं की बैठक लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर
में बुलाई गई है। अब इस बैठक के बाद क्या निकलेगा या तो भविष्य में तय होगा पर कहीं ना कहीं स्कूल शिक्षा विभाग के रवैये ने शिक्षकों में सरकार के प्रति नकारात्मकता की धारणा को पनपने के लिए माहौल और विपक्ष के पास कहने का अवसर तो जरूर दे दिया है।

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