CG NEWS:सरकारी सिस्टम बना रहा स्कूल के छात्रों को खतरे का खिलाड़ी … हादसे पर फिर होगा सियासत का तमाशा ..? फाइलों में दब कर रह गया इस जिले का मामला

CG NEWS:बिश्रामपुर: (मनीष जायसवाल)  । दिल्‍ली के कोचिंग सेंटर में हुए हादसे में तीन छात्र-छात्राओं की मौत के बाद देश और प्रदेश में कई बड़े एक्शन का कापी पेस्ट शुरु हो चुका है..।वही सूरजपुर जिले के डीएवी एसईसीएल बिश्रामपुर स्कूल में 30 से 40 की संख्या के करीब पुराने और कमजोर हो चुके नीलगिरी के पेड़ों की वजह से दो हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की संख्या वाला स्कूल हादसे की गोद में बैठा है..! जिला प्रशासन, एसईसीएल बिश्रामपुर प्रबंधन संभावित हादसे पर सियासत का तमाशा देखने की भूमिका में इंतजार करता नजर आता है। इसलिए डीएवी स्कूल की से ओर से पेड़ो को काटने के लिए व्यवस्था के जिम्मेदार लोगों को दिए गए आवेदन पर पिछले दो सालों से कार्यवाही करने की बजाय अपना पल्ला झाड़ रहा है..! इधर इतने दिनो से डीएवी स्कूल के छात्र-छात्राएं और स्कूल का स्टाफ सरकारी सिस्टम की खामियों के चलते खतरों के खिलाड़ी बनकर स्कूल जाने को मजबूर है..।

मालूम हो कि डीएवी एसईसीएल बिश्रामपुर स्कूल परिसर के अंदर नीलगिरी के पेड़ काफी पुराने हो चुके है जो भविष्य में तेज हवाओं और खराब मौसम की स्थिति में किसी अप्रिय घटना को न्योता दे सकते है। स्कूल प्रबंधन की ओर से सूरजपुर जिला प्रशासन, एसईसीएल बिश्रामपुर को कई बार इस अंजान खतरे को देखते हुए यहाँ लगे हुए पेड़ों की कटाई करने के लिए आवेदन दिया जा चुका है। लेकिन व्यवस्था के जिम्मेदार लोगों के कानों में अब तक जू नहीं रेंगी है।

यहां स्कूल परिसर के अंदर किसी जमाने में स्कूल की सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाए गए नीलगिरी के 30 से 40 के करीब पेड़ जिनकी ऊंचाई 60 से 70 फुट के आसपास हो चुकी है। अक्सर ये पेड़ तेज हवाओं में स्कूल के छात्रों और शिक्षकों को डराते रहते है।कई बार यहां डालियां भी टूट कर गिरते रहती है। नीलगिरी के एक दो पेड़ तो गिर भी चुके है। एक बड़ी सी डाल तो लटकी हुई ही थी। जिसे हाल ही में स्कूल की ओर से कटवाया भी गया है।

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मामला पेड़ की कटाई और वन विभाग का होने की वजह से स्कूल प्रबंधन सिर्फ संबंधित विभाग और प्रशासन से पत्राचार करीब बीते दो सालों से कर रहा है। लेकिन व्यवस्था के जिम्मेदार लोग स्कूल प्रबंधन की चिंता को आवक जावक की फाइलों में रख कर एक बड़े हादसे को नजर अंदाज कर प्रकृति प्रेम दिखा कर पेड़ो को कटवाने की दिशा में ठोस निर्णय नही ले पा रहे है।

बताते चले कि प्रबंधन डीएवी स्कूल प्रबंधन नीलगिरी के पेड़ों की सामान्य सी छटाई तो कर सकता है पर इन पेड़ो को काटना स्कूल प्रबंधन के बस की बात नही है। पेड़ो की कटाई का यह काम एसईसीएल या वन विभाग या फिर स्थानीय प्रशासन की ओर से मिले निर्देश पर संबंधित विभाग को करना मालूम होता है।

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