वह शिक्षक जो पूरी जिन्दगी टॉपर को खोजकर दिया पार्कर पेन…अब बच्चे मेधावियों को बांट रहे स्कारशिप..पढ़ें विस्तार से…

बिलासपुर—सबकी जिन्दगी की अपनी अपनी कहानी होती है। कहानी बहुत याद आती है..जब वह जिन्दगी हमारे बीच नहीं होती। जिसने इस रहस्य को समझ लिया..उसकी जिन्दगी का रंग ही अनुकरणीय हो जाता है। शायद इसे ही जिन्दगी और विचारों का प्रवाह कहते हैं। सबको अपने जीवन में परिवार और समाज से परम्पराएं हासिल होती है। कोई उसे समेट कर सबके बीच बांट देता है..तो कोई उसे जिन्दगी भर दिल में छिपाकर रखता है। बिलासपुर में एक ऐसा ही परिवार है..जिसे अपने परम्पराओं यानी लेगेसी बांटने..देश और समाज को देने में आनन्द पाता है। ऐसे लोग निश्चित रूप से पर्दे पर आने से संकोच हैं। क्योंकि यह संकोच भी तो परिवार से मिलता है। बावजूद इसके गुपचुप अपने उत्तरदायित्यों को पूरे मन से पूरा करते हैं। प्रोफेसर एमएन सिन्हा का परिवार भी ऐसा ही है।
परिवार का एक-एक सदस्य आज भी अपनी पिता की लेगेसी को शिद्दत के साथ जी रहा है। लेकिन मीडिया से बचकर..क्योंकि उन्हें चकाचौंध से दूर रहने की जो आदत जो है। जी हां हम प्रदेश और बिलासपुर के सबसे लोकप्रिय शिक्षकों में एक ज्योतिषाचार्य और पेशे से शिक्षक एमएन सिन्हां की ही बात कर रहे हैं। पढाई लिखाई को लेकर बच्चों में बहुत ही सख्त नजर आने वाले सिन्हा रिजल्ट खुलते ही टापर की तलाश में निकल पड़ते थे…। जब तक टॉपर को सबसे महंगी पार्कर पेन तोहफा में नहीं दे देते..घर नहीं लौटते थे। आज उनके बच्चे परम्परा को ना केवल जीवित रखे हैं। बल्कि स्वर्गीय पिता की याद में टॉपर को ना केवल आर्थिक भेंट कर सम्मानित कर रहे हैं। बल्कि उच्च शिक्षा में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों में स्कारशिप भी बांट रहे हैं।
पेशे से शिक्षक एमएमन सिन्हा ने अपनी नौकरी पेशा की शुरूआत 1961 में अविभाज्य मध्यप्रदेश की श्रे्ष्ठ स्कूलों में एक मल्टीपरपज स्कूल से किया। इसके अलावा प्रदेश के अलग स्थानों में अपनी सेवाएं दी। उनका सर्वाधिक समय बिलासपुर जिले के स्कूलों में बीता। रिटायर्ड होने के बाद यहीं रम गए। इसके पहले उन्हें अवसर भी मिला जिसकी चाहत सबको होती है। एमएन सिन्हां 1993 से 1999 तक मल्टीपरपज के प्राचार्य पद पर भी रहे। आज यानी 14 अगस्त को मल्टीपरपज स्कूल यानी आत्मानन्द स्कूल प्रबंधन ने बच्चों के साथ प्रोफेसर सिन्हा के योगदान को याद किया। सभी ने अपने अपने संस्मरण सुनाए। इस दौरान सिन्हा परिवार के सभी सदस्य मौजूद थे। कमोबेश सभी वक्ताओं े यही कहा कि बच्चों से बेहद प्यार करने वाले सिन्हा बच्चों के भविष्य को लेकर बहुत ही सख्त थे। उनका मानना था कि यदि बच्चे अच्छे से पढ़ेंगे लिखेंगे..तो देश का भविष्य संवरेंगा और चमगेगा। बच्चा कितना भी बदमाशी करे..लेकिन रिजल्ट अच्छा लाए तो सारी गलतियां माफ हो जाती है।
संस्मरण सुनाने वालों ने कहा कि तत्कालीन समय शिक्षकों का वेतन बहुत कम हुआ करता था। उनके सामने हमेशा एक ही प्रश्न रहता था.. क्या बचाएं और क्या खर्च करें । लेकिन ना जाने किस मिट्टी के सिन्हा जी बने थे। अभाव में भी स्कूल के बच्चों के सुनहरे भविष्य को लेकर हमेशा हाथ खुला रखा। ज भी याद है..स्कूल में रहने के दौरान या अन्य जगह स्थानांतरण के बाद भी उन्हें रिजल्ट का हमेशा इंतजार रहता था।
रिजल्ट खुलते ही टापर बच्चों की खोज में हाथ में पार्कर पेन लेकर निकल जाते थे। पार्कर पेन का आज भी क्रेज है। पेन लेकर बच्चों के घर या स्कूल पहुंच जाते थे। टापर को पेन देने के साथ जिला प्रदेश और देश के साथ माता पिता गुरू का नाम रोशन करने का आशीर्वाद देते। बहरहाल आज सब समझ में आने लगा है। उन्होने सभी स्कूली बच्चों में वैसा ही संस्कार देने का प्रयास किया। जैसा उन्होने अपने बच्चों को दिया। उनकी बड़ी बेटी अनुपमा सक्सेना और दामाद अमित सक्सेना गुरू घासी दास केन्द्रीय विश्वविद्यालय में प्राध्यापक हैं। बड़ा बेटा डॉ.तारकेश्वर सिन्हा बिलासपुर में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी तो छोटा बेटा तारन प्रकाश सिन्हा आईएएस है। कई जिलों की कलेक्टरी कर चुके है। छोटी बेटी और दामाद अनूपपुर में शिक्षा जगत में अपनी सेवाएं दे रही है। सभी बच्चे अपनी मां सुषमा सिन्हा की सेवा कर रहे हैं।
उपस्थित सैकड़ों छात्रों को संबोधित कर स्वर्गीय एमएन सिन्हा की बड़ी बेटी अनुपमा सक्सेना ने बताया कि लोगों ने बहुत कुछ कहा। कहने को कुछ रह नहीं गया है। सिन्हा परिवार ने पिता के परमधाम जाने के बाद परम्पराओं को बढ़ाने का संकल्प लिया। हम भाई बहनों ने फैसला किया कि पिता की पार्कर पेन यात्रा को बनाकर रखें। चूंकि पिता की यात्रा मल्टीपरपज स्कूल से शुरू हुई। इसलिए हमने हर साल दसवी और 12 वीं टापर करने वाले दो छात्र और दो छात्राओं को सम्मानित करने का फैसला किय। इसके अलावा यह भी फैसला किया कि यदि कोई मेधावी बच्चा आर्थिक परेशानियों के कारण उच्च शिक्षा में प्रवेश से वंचित होता है तो उसे तीस हजार रूपये सालाना स्कालरशिप देंगे।
अनुपमा सक्सेना ने बताया कि इस साल मां सुषमा सिन्हां के हाथों कक्षा 10 वी की टापर छात्रा पायल साहू और आयुष तिवारी को दस दस हजार दिया गया है। इसी तरह कक्षा 12 वी के टापर सूरज यादव और राहुल देवांगन को भी दस दस हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि दी गयी है।
कार्यक्रम में उपस्थित विशेष रूप से एमएन सिन्हा की धर्मपत्नी ने मेधावी बच्चों को स्कालरशिप के साथ आशीर्वाद दिया। उन्होने बच्चों से कहा..पढ़ लिखकर बड़ा बने। देश के साथ स्कूल, माता पिता और गुरूओं का नाम रोशन करें। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्कूल प्राचार्य मैडम पाल और रौनक साव के अलावा स्कूल स्टाफ की अहम भूमिका रही।









