बिलासपुर—समाननीय श्री तोखन साहू
कानूनों का उल्लंघन होने से एस.ई.सी.एल. में अरबों रुपए का भ्रष्टाचार की जांच कर मामला ए.सी.बी./सी.बी.आई. को सौंपने बावत.।
महोदय,
कोयला (काला हीरा) की गुणवत्ता उत्पादन एवं कोयले की चोरी, परिवहन में आये दिन समाचार प्रभाषित होते रहते है। अभी हाल ही में सी.बी.आई. ने एस.ई.सी.एल. रायगढ़ क्षेत्र में कोयला यार्ड में छापा मारकर प्रकरण दर्ज किया है.।
विश्व की सर्वाधिक कोयला उत्तपादन करने वाली कम्पनी कोरबा, गेवरा, कुष्मुन्डा, दीपका एवं रायगढ़ क्षेत्रो में जंहा खुली खदानों में उत्खनन हो रहा है, वंहा भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। भारत के राष्ट्रपति द्वारा नामित सी.एम.डी., निदेशक, माइनिंग इंजीनियर के स्थान पर प्राईवेट कम्पनियों द्वारा कोयला का उत्तपादन कर रही है। तथा कंपनी के संसाधनों का भरपूर उपयोग कर फर्जी बिलिंग हो रही है।
केवल वर्तमान सी.एम.डी. श्री प्रेमसागर मिश्रा के कार्यकाल में विगत पांच वर्षो से एक लाख करोड का ठेका विभिन्न आउट सोर्सिंग कंपनियों को दिया गया, तब कम्पनी के निदेशक अधिकारी 60 हजार श्रम शक्ति का क्या कर रहे है. ।
जब से कोयले की बिक्री ई-आक्सन के माध्यम से शुरू हुई है, कोयला खरीदार कम्पनी ई-ग्रेड मित्र कोयला व उससे सस्ता रेट का कोयला खरीदकर तथाकथित कोल वाशरियों के मालिकों को दे देती है, ये खेला अरबो रुपये के क्वानटिटी एवं क्वालिटी का खेला ये वाशरी मालिक करते हैं। ध्यान रहे कि छत्तीसगढ़ के कोरबा, अम्बिकापुर, रायगढ़, बिलासपुर संभाग के आदिवासी, किसान सीमांत किसानो के लाखो एकड़ ज़मीन,जल,जंगल,जमीन लूटकर (अधिग्रहण कर) उन्हें मजदूर एवं मजबूर बनाकर देश के उर्जा के
नाम से दोहन किया जा रहा है, जिसमे सेवानिवृत कर्मचारी एवं नागरिको के शेयर के रूप में लगे है.।
भारत सरकार ने ऐसे लोगो को नियोक्ता/ मालिक बना दिए है, जो सर्वोच्च न्यायालय के नियुक्ति के नॉर्म्स भी पूरे नहीं करते है, केवल भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। इस पूरे कोयले की चोरी अच्छे गुणवत्ता का कोयला खराब गुणवत्ता दिखाकर बेचने में तथा फर्जी बिलिंग कर मालामाल होकर शेयर होल्डर एवं देश की सार्वजनिक सम्पत्ति को लूट रहे है.।
स्थानीय झगराखण्ड / चिरीमिरी में 1947 में निर्मित राष्ट्रीय कालरी मजदूर कांग्रेस (आर.सी.एम.सी.) संगठन द्वारा जब पारदर्शिता की बात की गयी तो संविधान के तहत् नियुक्त कामगारों को अनुछेद 43ए, 19ए, एवं मौलिक अधिकार दिलाने आई. डी. एक्ट की धारा 3 एवं 9 सी. को लागू कराने की मांग किया गया। ये कामगारों द्वारा कामगारों के लिए निगरानी समिति है, जो कोयला उत्पादन, रेजिंग, कोयला
परिवहन, क्रय- बिक्रय, लाभ-हानि पर निगरानी रखती है, जिसमे कम्पनी के अधिकारी एवं कर्मचारियों के चुने हुए प्रतिनिधि शामिल है। जो भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, चोरी, गैरकानून गतिविधियों पर नजर रखते है उनका निर्माण एवं संचालन होने नहीं दे रहे है ताकि खदान के अधिकारी गैरकानून / कम्पनी के विरोधी कार्य कर सके। इसके लिए कम्पनी एक्ट के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर वर्तमान एवं सेवानिवृत अधिकारी ब्याक्तिगत तौर पर उत्तरदायी है। राष्ट्रीय कालरी मजदूर कांग्रेस (आर.सी.एम.सी.) आई. आर. / जे.सी.सी. में थी मांग किया था कि प्रत्येक ट्रक / मशीनों में जी. पी. एस. सिस्टम लगायी जाये एवं कोयला उत्तपादन की नाप कमेटी के सामने किया जाये । कम्पनी “कोनट्रेक्टर लेबर एबोलेशन एक्ट” को लागु नहीं करना चाहती है हुक एवं टुक प्रावधानों के तहत् ज्यादा से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट करा सके/ छुट लेना चाहती है.।
यदि कम्पनी के निदेशकगण समझते है आई.डी. एक्ट, पेमेंट ऑफ़ वेजेस एक्ट, माइंस एक्ट, स्टैंडिंग आर्डर एक्ट का उल्लंघन नही हो रहा है। उक्त उल्लंघन से भ्रष्टाचार, चोरी, गबन की संभावनाए ज्यादा है.। थर्ड पार्टी बिलासपुर के सांसद/ छत्तीसगढ़ को केन्द्रीय मंत्री द्वारा नियुक्त जनप्रतिनिधियों के निम्न जानकारी कम्पनी की अधिकृत वेबसाइट पर उपलब्ध कराये या रिकॉर्ड उपलब्ध कराये.।
1. वर्क आर्डर – विगत 10 वर्षो के कोयला उत्पादन ओ. बी. रिम्युबह्न मशीन एवं मशीनों के कलपूर्जे खरीदना। बिली का भुगतान
2. 10 वर्षों की कम्पनी के बैलेंस शीट, सी. ए. जी. की ऑडिट रिपोर्ट. ।
3. वर्ष वार कोयला उत्पादन ग्रेड वाइज, बिक्री एवं कोयले से प्राप्त राशि. ।
4. कोयले का उत्पादन आउटशोर्स द्वारा.। 10 वर्ष का टिकRA5. कोयले की उत्पादन की कंपनी सोर्स द्वारा. ।
6. शेयर होल्डरो की बोर्ड की बैठको में लिए गये निर्णय, एक्शन टेकेन रिपोर्ट. ।
7. विगत 10 वर्षों के कांटेक्टर/ठेकेदार, सप्लायर, कंस्ट्रक्शन रिपोर्ट, खरीदी रिपोर्ट वर्षवॉर ।
8. एस. ई. सी. एल. गेस्ट हाउस में किया गया खर्च. ।
9. कम्पनी व्हीकल होते हुए किराये पर लिए गए वाहन तथा उनका उपयोग किस व्यक्ति ने किया, विगत 10 वर्षों का. ।
10. आर.टी.आई. एक्ट में पब्लिक सेक्टर को पारदर्शित रखना है। सभी जानकारी पोर्टल, वेबसाइट तथा निरिक्षण करने वाले प्रत्येक कर्मचारी / नागरिक जो देखना चाहते हो उपलब्ध कराये, परन्तु कम्पनी ऐसा नही करती है.। मृष्यचार करने ऐसा करती
11. कम्पनी में सी.वी.सी. एक्ट के तहत सी.व्ही. ओ. नियुक्त है, परन्तु सी.व्ही. ओ. कार्यालय में 99% सी.व्ही.ओ. को छोड़ सभी अधिकारी, कर्मचारी नियोक्ताओं के तहत मातहत है ।
12. छत्तीसगढ़ में ए.सी.बी./सी.बी.आई. विगत पांच वर्षो से कांग्रेस के कार्यकाल में कार्यरत नहीं था. अतः कम्पनी के अधिकारियो के मिलीभगत से सी.व्ही. ओ. अपंग है. । कम्पनी सी.ए.जी. की ऑडिट रिपोर्ट नही देती है एवं आर.टी.आई. के निरिक्षण संबंधित दस्तावेज नहीं देती है. ।
13. कॉन्ट्रैक्टर लेबर एवोलेषन एक्ट रूल्स १२ के तहत् कॉन्ट्रैक्टर की सूची उचित प्रोफार्मा में रखी जानी चाहिए, विगत १० वर्षो से रजिस्टर की छाया प्रति दिलाई जाये ।
14. क्षेत्रिय श्रम आयुक्त कार्यालय (के.) भारत सरकार से जबलपुर/बिलासपुर से प्राप्त ठेकेदारी के संबंधी, लाईसेन्स संबंधी रजिस्टर उपलब्ध करायी जाये। 10वर्ष का EPF =
15. वर्षवॉर लेटिगेशन वकील की फीस, विधिक अधिकारियों का वेतन एवं टी.ए./ डी.ए. का खर्च का विवरण दिलाया जाये, क्योंकि लेटिगेशन कर भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी से दबाया जा रहा है. ।
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Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।वर्तमान में CGWALL में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।

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