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highcourt verdict on compassionate appointment-अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का फैसला, भाई की सरकारी नौकरी होने पर भी बहन को मिलेगी नौकरी, यदि वह परिवार से रहता है अलग

highcourt verdict on compassionate appointment/भोपाल/अनुकंपा नियुक्ति के कानूनी प्रावधानों और मानवीय संवेदनाओं को लेकर हाईकोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मृतक सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में है, लेकिन वह परिवार से अलग रहता है और शेष सदस्यों की जिम्मेदारी नहीं उठा रहा, तो इस आधार पर किसी अन्य सदस्य की अनुकंपा नियुक्ति निरस्त नहीं की जा सकती।

highcourt verdict on compassionate appointment/जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकल पीठ ने देवास बैंक नोट प्रेस द्वारा बिना किसी विस्तृत जांच के एक महिला कर्मचारी की सेवा समाप्त करने के आदेश को अनुचित ठहराते हुए उसे तत्काल बहाल करने का आदेश दिया है। इस फैसले ने उन अनेक आश्रितों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है जो केवल तकनीकी कारणों से सरकारी सहायता और रोजगार से वंचित रह जाते हैं।

यह मामला देवास नोट प्रेस में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (ट्रेनी) के पद पर कार्यरत मनीषा से जुड़ा है, जिन्होंने अपने पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त की थी।

मनीषा के पिता, जो बैंक नोट प्रेस में सीनियर चेकर के पद पर कार्यरत थे, का निधन 29 मार्च 2021 को हो गया था। पिता की मृत्यु के कुछ समय बाद ही उनकी माता का भी देहांत हो गया, जिससे याचिकाकर्ता मनीषा पूरी तरह बेसहारा हो गईं। उन्होंने जीवन यापन के लिए अनुकंपा नियुक्ति हेतु आवेदन किया था और उन्हें नौकरी मिल भी गई थी।

हालांकि, बैंक नोट प्रेस प्रशासन ने 30 सितंबर को उनकी सेवा इस आधार पर समाप्त कर दी कि उनका बड़ा भाई पहले से ही पुलिस विभाग में सरकारी नौकरी कर रहा है। प्रशासन का तर्क था कि परिवार का एक सदस्य पहले से कमाऊ है, इसलिए अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता नहीं बनती।

highcourt verdict on compassionate appointment/हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि बैंक नोट प्रेस प्रशासन ने इस बात की गंभीरता से जांच नहीं की कि पुलिस विभाग में कार्यरत भाई वास्तव में अपनी बहन की देखभाल कर रहा है या नहीं।

मनीषा ने कोर्ट को बताया कि उनका भाई परिवार से अलग रहता है और माता-पिता के निधन के बाद उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई थी। अदालत ने माना कि अनुकंपा नियुक्ति का प्राथमिक उद्देश्य शोक संतप्त परिवार को अचानक आए वित्तीय संकट से उबारना और उन्हें तत्काल राहत प्रदान करना है। यदि परिवार का कोई कमाऊ सदस्य अलग रह रहा हो और आश्रितों की मदद नहीं कर रहा हो, तो ऐसी स्थिति में पीड़ित सदस्य को मिलने वाली सहायता को केवल इस आधार पर नहीं छीना जा सकता कि उनका कोई संबंधी सरकारी पद पर है।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति किसी उच्च पद पर पदोन्नति का अधिकार नहीं है, बल्कि यह एक मानवीय आधार पर दी जाने वाली आर्थिक सहायता है। इसका मुख्य लक्ष्य मृतक कर्मचारी के परिवार को आय का स्रोत बंद होने से उत्पन्न गरीबी और कठिनाइयों से बचाना होता है। देवास नोट प्रेस द्वारा बिना तथ्यों की जांच किए नौकरी समाप्त करने के फैसले को हाईकोर्ट ने कानूनन गलत माना और मनीषा की नौकरी को बहाल करने के निर्देश दिए।

Shri Mi

पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर
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