CG News- ACB की बड़ी कार्रवाई, हाउसिंग बोर्ड के संभागीय कमिश्नर और क्लर्क 65 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

पूरा मामला हाउसिंग बोर्ड के ठेकेदार रवि कुमार की शिकायत से शुरू हुआ। रवि कुमार ने 20 जनवरी 2026 को सरगुजा एसीबी में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने बलरामपुर जिले के दौरा कोचली में करीब 65 लाख रुपये की लागत से तहसील भवन और लुंड्रा में 43.51 लाख रुपये की लागत से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराया था

CG News/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सरगुजा एसीबी (एन्टी करप्शन ब्यूरो) की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसीबी ने हाउसिंग बोर्ड के संभागीय कमिश्नर पूनम चंद्र अग्रवाल और उनके क्लर्क अनिल सिन्हा को एक ठेकेदार से 65 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

यह कार्रवाई गुरुवार शाम हाउसिंग बोर्ड के संभागीय कार्यालय में की गई। आरोपियों ने ठेकेदार के रुके हुए बिलों का भुगतान करने और निर्माण कार्य की समय सीमा (वर्क टाइम) बढ़ाने के एवज में रिश्वत की मांग की थी। इस गिरफ्तारी के बाद से विभाग में हड़कंप मच गया है।

पूरा मामला हाउसिंग बोर्ड के ठेकेदार रवि कुमार की शिकायत से शुरू हुआ। रवि कुमार ने 20 जनवरी 2026 को सरगुजा एसीबी में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने बलरामपुर जिले के दौरा कोचली में करीब 65 लाख रुपये की लागत से तहसील भवन और लुंड्रा में 43.51 लाख रुपये की लागत से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराया था।

तहसील भवन का कार्य पूर्ण हो चुका था, जिसका करीब 28 लाख रुपये का अंतिम भुगतान शेष था। वहीं, कस्तूरबा आश्रम भवन के लिए उन्हें कुल 70.50 लाख रुपये का भुगतान मिलना था। इन भुगतानों को क्लियर करने और कार्य की अवधि बढ़ाने के बदले संभागीय कमिश्नर पूनम चंद्र अग्रवाल ने 60 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।

शिकायत की पुष्टि होने के बाद एसीबी के डीएसपी प्रमोद कुमार खेस के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई और ट्रैप बिछाया गया। गुरुवार को योजना के मुताबिक, एसीबी ने ठेकेदार को केमिकल लगे हुए 60 हजार रुपये देकर कार्यालय भेजा। जब ठेकेदार ने कमिश्नर से संपर्क किया, तो उन्होंने रकम क्लर्क अनिल सिन्हा के पास जमा करने को कहा।

जब ठेकेदार क्लर्क के पास पहुंचा, तो क्लर्क ने मोलभाव करते हुए कहा कि मांग 70 हजार रुपये की थी, न कि 60 हजार की। ठेकेदार ने इसकी जानकारी तुरंत बाहर खड़ी एसीबी टीम को दी, जिसके बाद टीम ने 5 हजार रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था कर उसे दी। जैसे ही ठेकेदार ने कुल 65 हजार रुपये क्लर्क को सौंपे, क्लर्क ने 5 हजार रुपये अपने पास रखे और 60 हजार रुपये कमिश्नर को दे दिए।

रुपयों का लेनदेन पूरा होते ही इशारा मिलते ही एसीबी की टीम ने दफ्तर में दबिश दी और दोनों को दबोच लिया। जब उनके हाथ धुलवाए गए, तो वे केमिकल के कारण गुलाबी हो गए, जो इस बात का पुख्ता सबूत था कि उन्होंने रिश्वत की रकम छुई थी। पुलिस ने मौके से रिश्वत की राशि और संबंधित दस्तावेज जब्त कर लिए हैं।

एसीबी के अनुसार, दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वर्तमान में पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और उनके पिछले रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

Shri Mi

पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर

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