Budget 2025- जानिए क्या हुआ महंगा और क्या हुआ सस्ता?

Budget 2025-केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2025-26 का आम बजट पेश किया। बजट में की गई घोषणाओं के कई चीजों के दाम बढ़ने की संभावना है तो वहीं कई चीजें सस्ती भी होंगी।
Budget 2025-सरकार ने लिथियम आयन बैटरी बनाने वाली कंपनियों के लिए इस्तेमाल होने वाली पूंजीगत वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी शून्य करने की घोषणा की है। इससे मोबाइल फोन और इलेक्ट्रिक वाहनों के दाम कम होने की उम्मीद है।
Budget 2025-कई मेडिकल उपकरणों, जीवन रक्षक दवाओं और कैंसर से जुड़ी दवाओं को शून्य बेसिक कस्टम ड्यूटी की सूची में जोड़ा गया है। इससे इनके भी दाम कम होंगे।
Budget 2025-आयातित मोटरसाइकिलों की विभिन्न श्रेणियों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में पांच से 20 प्रतिशत तक की कटौती की गई है।
Budget 2025-घरेलू कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए छोटे और मध्यम लूम्स के आयात शुल्क को 7.5 को घटाकर शून्य कर दिया गया है। इससे इस क्षेत्र में एमएसएमई को प्रोत्साहन मिलेगा और कपड़ों के दाम कम होने की उम्मीद है। वेट ब्लू लेदर और क्रस्ट लेदर पर इम्पोर्ट शुल्क को शून्य कर देने से इनके उत्पाद भी सस्ते होने की उम्मीद है।
Budget 2025-इसके अलावा, एलसीडी/एलईडी टीवी सेट के लिए ओपन सेल्स विनिर्माण के लिए पूंजीगत वस्तुओं के आयात पर शुल्क 2.5 प्रतिशत से घटाकर शून्य करने से टेलीविजन सेट सस्ते होने की उम्मीद है।
Budget 2025-तैयार कपड़ों की विभिन्न श्रेणियों के आयात पर शुल्क बढ़ाकर 20 प्रतिशत या 115 रुपये प्रति किलोग्राम (जो भी ज्यादा हो) कर दिया गया है। इसके अलावा इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले पर कस्टम ड्यूटी 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दी गई है। इससे इनके दाम भी बढ़ेंगे।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नए टैक्स स्लैब की घोषणा करते हुए कहा कि अब 12.75 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा। आजाद भारत में मिडिल क्लास के लिए टैक्स स्लैब में कई बार बदलाव हुए हैं। बदलाव की यह कहानी 1949-50 से शुरू हुई, तब 10 हजार पर 1 आने का टैक्स लगाया गया था।
सबसे पहली बार 1949-50 में जॉन मथाई वित्त मंत्री थे। उनके ही कार्यकाल में टैक्स स्लैब को घटाया गया, तब 10,000 रुपये की सालाना आय पर 1 आना टैक्स लगाया गया। इस तरह इसमें एक चौथाई की कटौती की गई। इसके बाद 10,000 से अधिक की आय वाले दूसरे स्लैब पर टैक्स को 2 आना से घटाकर 1.9 आना किया गया।
फिर वर्षों बाद बदलाव किया गया। वित्तीय बजट 1974-75 में वित्त मंत्री यशवंतराव चव्हाण ने इनकम टैक्स की ऊपरी सीमा 97.75 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दी। 6,000 रुपये सालाना कमाने वालों को छूट मिली। सभी कैटेगरी के लिए सरचार्ज की सीमा घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई।
1985-86 में वी.पी. सिंह वित्त मंत्री बने। उन्होंने टैक्स स्लैब्स की संख्या, जो पहले 8 थी, उसे घटाकर 4 कर दी। 1 लाख रुपये से ज्यादा की आय पर 50 प्रतिशत टैक्स लागू किया। अधिकतम मार्जिनल टैक्स रेट 61.875 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया।
1992-93 में मनमोहन सिंह ने टैक्स स्लैब को तीन हिस्सों में बांट दिया। 30-50 हजार पर 20 प्रतिशत, 50 हजार-1 लाख पर 30 प्रतिशत और 1 लाख से ऊपर 40 प्रतिशत टैक्स तय हुआ। वर्तमान टैक्स ढांचे की नींव इसी बजट में रखी गई।
वहीं, 1994-95 में पहले स्लैब को 35-60 हजार की आय के लिए 20 प्रतिशत पर रखा गया। 60 हजार-1.2 लाख पर 30 प्रतिशत और 1.2 लाख से ऊपर 40 प्रतिशत कर तय हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ, बस स्लैब सुधारा गया।
1997-98 में पी. चिदंबरम का ‘ड्रीम बजट’ टैक्स दरों में बड़ी कटौती लेकर आया। 40-60 हजार रुपये पर 10 प्रतिशत, 60 हजार-1.5 लाख पर 20 प्रतिशत और उससे ऊपर 30 प्रतिशत टैक्स लागू हुआ। इससे करदाताओं को राहत मिली। इसके बाद 2005-06 में 1 लाख रुपये तक की आय को पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया। 1-1.5 लाख पर 10 प्रतिशत, 1.5-2.5 लाख पर 20 प्रतिशत और उससे अधिक पर 30 प्रतिशत टैक्स रखा गया। इसे नौकरीपेशा मिडिल क्लास के लिए बड़ी राहत माना गया।
2010-11 में प्रणब मुखर्जी ने 1.6 लाख तक की आय को टैक्स फ्री कर दिया। 1.6-5 लाख पर 10 प्रतिशत, 5-8 लाख पर 20 प्रतिशत और 8 लाख से ऊपर 30 प्रतिशत टैक्स तय हुआ। जानकारों ने इस नए ढांचे को अधिक व्यवस्थित बताया।
2012-13 में टैक्स छूट सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई। 2-5 लाख पर 10 प्रतिशत, 5-10 लाख पर 20 प्रतिशत और 10 लाख से ऊपर 30 प्रतिशत टैक्स तय हुआ।
2017-18 में एनडीए सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सेक्शन 87ए में बदलाव कर ढाई हजार रुपये तक की छूट साढ़े तीन लाख तक की आय वालों को दी। उन्होंने 2.5-5 लाख की आय पर टैक्स 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया।
2020-21 में देश के सामने ‘न्यू टैक्स रिजीम’ पेश किया गया। टैक्स स्लैब को आसान बनाया गया। कई छूटें खत्म कर 5 लाख तक की आय पर राहत दे दी गई। करदाताओं के लिए यह नई व्यवस्था अधिक सरल और स्पष्ट थी।
2025-26 के बजट में नए टैक्स स्लैब का ऐलान किया गया। कहा गया कि अब 12.75 लाख रुपये तक की कमाई को टैक्स फ्री कर दिया गया है। इसमें स्टैंडर्ड टैक्स डिडक्शन भी शामिल है। टैक्स स्लैब में हुए इस बड़े बदलाव के बाद 0 से 12 लाख तक जीरो टैक्स हो गया है, लेकिन अगर कमाई 13 लाख रुपये होती है, तो फिर 16 लाख रुपये तक की इनकम पर 15 फीसदी के टैक्स स्लैब में आ जाएंगे।
इसके मुताबिक 4-8 लाख रुपये तक पर 5 फीसदी, 8-10 लाख रुपये तक पर 10 फीसदी, 12-16 लाख पर 15 फीसदी, 16-20 लाख पर 20 फीसदी, 20-24 लाख पर 25 फीसदी और 24 लाख से अधिक कमाई पर 30 फीसदी तक का टैक्स भरना होगा।
बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने 2025-26 के केंद्रीय आम बजट को ऐतिहासिक बताया है। सम्राट चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश बजट को बिहार के लिए ऐतिहासिक बजट करार दिया।
उन्होंने दावा करते हुए कहा कि यह बिहार के समेकित विकास वाला और ऐतिहासिक बजट है। यह बजट बिहार के लिए विशेष लाभ पहुंचाने वाला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आग्रह पर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के बजट में बिहार के लिए कई योजनाएं स्थापित की हैं।
बिहार के उपमुख्यमंत्री चौधरी ने इस बजट के लिए प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण का आभार भी जताया।
इधर,बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने इस बजट को विकसित भारत की दिशा में उठाया गया ‘उम्मीदों भरा कदम’ वाला बजट बताया है। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को धन्यवाद देते हुए कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार ने एक बार फिर से सिद्ध किया है कि गरीब, किसान, युवा और नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण से ही देश का समेकित और सतत विकास संभव है।
सिन्हा ने भरोसा जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा पूर्वोदय से भारत उदय की बात करते हैं। हमारा राज्य इस ‘पूर्वोदय’ का असली चालक बनेगा। केंद्र सरकार ने ‘मखाना बोर्ड’ बनाने का निर्णय लिया है। इससे मखाना किसानों सहित पूरे मखाना उद्यम को नई दिशा मिलेगी। राज्य में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान खोलने का निर्णय लिया गया है, इससे किसानों और युवाओं के राजस्व और रोजगार पर गुणात्मक प्रभाव होगा।
उन्होंने कहा, “बजट में मिथिलांचल में पश्चिमी कोशी नहर परियोजना को वित्तीय सहायता मिलना एक बहुप्रतीक्षित और प्रशंसनीय कदम है। राज्य में बिहटा ब्राउनफील्ड एयरपोर्ट के अलावा तीन नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विकास से संपर्कता से समृद्धि की नई कहानी लिखी जा सकेगी। निश्चित रूप से ये सुधारात्मक पहल बढ़ते और बदलते बिहार के लिए गेम चेंजर साबित होंगे।”
सिन्हा ने कहा कि वास्तव में यह बजट ‘सर्वांगीण विकास’ की ओर उठाया गया मजबूत कदम है, जिसमें समाज कल्याण से लेकर मानव विकास तक, एमएसएमई से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते क्षेत्रों तक और ग्रामीण उद्यमिता से लेकर सतत शहरी विकास तक को देश के विकास विजन में भागीदार बनाने का सफल प्रयास किया गया है। कुल मिलाकर यह बजट देशवासियों में ‘सबके उदय से भारत उदय’ का भाव जगाता है।Budget 2025


