सिर्फ 6 महीने में 13 करोड़ का ऋण…पूर्व विधायक ने कहा…बिलासपुर में झूठ फैलाकर गए केन्द्रीय मंत्री प्रताप राव जाधव
आज तक नहीं मिला जीएसटी का पैसा...रायल्टी भी नहीं मिली

बिलासपुर— केंद्रीय मंत्री ने बिलासपुर की धरती पर झूठ का पुलिंदा छोड़ा है। पिछले छह महीने में साय सरकार ने 13 हज़ार करोड़ का ऋण लिया है। बिलासपुर प्रवास के दौरान केन्द्रीय मंत्री को यह बात भी बतानी चाहिए थी। यह बातें पूर्व नगर विधायक शैलेष पाण्डेय प्रेस नोट जारी कर बताया। कांग्रेस नेता ने कहा कि कोरोना काल में केन्द्र सरकार ने जनता को सहायता देना तो छोड़िये, सिर्फ जनता से थाली पिटवाया है। बिलासपुर प्रवास के दौारन केंद्रीय मंत्री ने ट्रेन बंदी डीज़ल,पेट्रोल और अधिक जीएसटी और महंगाई पर राहत की बात नहीं कर जनता के साथ धोखा किया है।
कांग्रेस नेता शैलेष पाण्डेय ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि केंद्रीय मंत्री,प्रताप राव जाधव मोदी सरकार के बजट की अफ़वाह फैलाने आये थे। इस दौरान उन्होने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय छत्तीसगढ़ को दिये गये टैक्स शेयर और अनुदान के बारे में जमकर झूठ बोला है।
पूर्व विधायक ने कहा कि यदि मोदी सरकार पर्याप्त पैसा देती तो सरकारों को ऋण नहीं लेना पड़ता। आप ही की सरकार थी जब कोरोना काल में आपने छत्तीसगढ़ की सरकार को उसका हिस्सा यानि टैक्स शेयर और अनुदान नहीं दे पाते थे। सरकार को ऋण लेने की सलाह दिया करते थे। जिसके कारण कांग्रेस की सरकार को छत्तीसगढ़ में ऋण लेना पड़ा था। यही नहीं अभी छत्तीसगढ़ में बीजेपी की साय सरकार को भी छह महीने में तेरह हज़ार करोड़ का ऋण लेना पड़ा है। मोदी सरकार छत्तीसगढ़ की जनता की खून पसीने की कमाई का भी टैक्स शेयर समय पर पूरा नहीं देती है। इसके कारण राज्य सरकारों पर आर्थिक बोझ बढता जा रहा है।
ट्रेनों के परिचालन के लिए केंद्रीय मंत्री बिलासपुर प्रवास के दौरान कुछ नहीं कहा। चार साल से छत्तीसगढ़ की जनता ट्रेन बंदी से परेशान,हैरान है। त्योहारों के समय अधिक से अधिक ट्रेन बंद करना जनता के साथ सौतेला व्यवहार है।महंगाई पर केन्द्र और राज्य सरकार मौन है। रुपया लगातार गिर रहा है। मोदी सरकार की आर्थिक गल त नीतियों का ख़ामियाज़ा देश की जनता को उठाना पड़ रहा है।
शैलेश ने कहा कि मोदी सरकार ने छत्तीसगढ़ के साथ हमेशा सौतला व्यवहार किया। राज्य सरकार को कभी भी समय पर और पूरा पैसा नहीं दिया गया। किसान आज भी खाद ,बीज,वारदाना के लिए भटक रहे हैं। कोयले की रॉयल्टी को लटका के रखा जा रहा है। जीएसटी का बकाया पैसा आज तक नहीं दिया गया है।









