New Tax Regime benifits: नई या पुरानी टैक्स व्यवस्था… 2026-27 में आपकी सैलरी पर किसका पड़ेगा ज्यादा असर? जानिए सही चुनाव का फॉर्मूला
यदि आपकी सालाना आय 12.75 लाख रुपए तक है और आप ज्यादा निवेश या टैक्स सेविंग नहीं करते, तो नई टैक्स व्यवस्था आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन और सेक्शन 87ए के तहत टैक्स शून्य तक हो सकता है, जिससे आपकी जेब में अधिक सैलरी बचती है।

New Tax Regime benifits/दिल्ली। वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही सैलरीड कर्मचारियों के सामने एक अहम फैसला फिर खड़ा हो गया है—पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनें या नई। यह चुनाव सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आपकी हर महीने की टेक-होम सैलरी और सालाना टैक्स बोझ पर सीधा असर डालता है। खास बात यह है कि इस साल भले ही आयकर स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ हो, लेकिन कुछ नए अपडेट और स्पष्टीकरण के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है कि आखिर किसे चुनना ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

New Tax Regime benifits/पुरानी टैक्स व्यवस्था में टैक्सपेयर्स को कई तरह की छूट और डिडक्शन का लाभ मिलता है। इसमें सेक्शन 80सी के तहत निवेश, हेल्थ इंश्योरेंस (80डी), होम लोन ब्याज, एचआरए और एलटीए जैसी सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि, इन छूटों के बदले टैक्स दरें अपेक्षाकृत अधिक रहती हैं। इस व्यवस्था में 2.5 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता, जबकि 2.5 से 5 लाख पर 5 प्रतिशत, 5 से 10 लाख पर 20 प्रतिशत और 10 लाख से ऊपर की आय पर 30 प्रतिशत टैक्स देना होता है।
दूसरी ओर, नई टैक्स व्यवस्था को सरल और कम दरों वाला विकल्प माना जा रहा है। इसमें अधिकांश छूट और डिडक्शन खत्म कर दिए गए हैं, लेकिन टैक्स दरें कम रखी गई हैं।
New Tax Regime benifits/इस सिस्टम में 4 लाख रुपए तक की आय टैक्स फ्री है। इसके बाद 4 से 8 लाख पर 5 प्रतिशत, 8 से 12 लाख पर 10 प्रतिशत, 12 से 16 लाख पर 15 प्रतिशत, 16 से 20 लाख पर 20 प्रतिशत, 20 से 24 लाख पर 25 प्रतिशत और 24 लाख से ऊपर 30 प्रतिशत टैक्स लगता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि आपकी सालाना आय 12.75 लाख रुपए तक है और आप ज्यादा निवेश या टैक्स सेविंग नहीं करते, तो नई टैक्स व्यवस्था आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन और सेक्शन 87ए के तहत टैक्स शून्य तक हो सकता है, जिससे आपकी जेब में अधिक सैलरी बचती है।
हालांकि, यदि आप 4-5 लाख रुपए या उससे ज्यादा के डिडक्शन क्लेम करते हैं—जैसे पीएफ, एलआईसी, हेल्थ इंश्योरेंस, एचआरए या होम लोन—तो पुरानी टैक्स व्यवस्था आपके लिए बेहतर साबित हो सकती है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और पारिवारिक जिम्मेदारियों वाले लोगों के लिए यह विकल्प अधिक लाभदायक माना जा रहा है।New Tax Regime benifits
इस बीच, 1 अप्रैल 2026 से कुछ नए बदलाव भी लागू किए गए हैं, जो खासतौर पर पुरानी टैक्स व्यवस्था को थोड़ा आकर्षक बनाते हैं। अब 200 रुपए तक का भोजन अलाउंस टैक्स फ्री होगा, जो पहले 50 रुपए था। गिफ्ट वाउचर और कूपन की टैक्स फ्री सीमा बढ़ाकर 15,000 रुपए सालाना कर दी गई है।
इसके अलावा, अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे को हाई एचआरए कैटेगरी में शामिल किया गया है, जिससे इन शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त राहत मिलेगी। बच्चों की शिक्षा भत्ता 100 रुपए से बढ़ाकर 3,000 रुपए प्रति माह और हॉस्टल खर्च 300 रुपए से बढ़ाकर 9,000 रुपए प्रति माह कर दिया गया है। ट्रांसपोर्ट अलाउंस भी बढ़ाकर 25,000 रुपए प्रति माह कर दिया गया है।
रिटर्न फाइलिंग को लेकर भी एक अहम बदलाव किया गया है। बजट 2026 के तहत आईटीआर-3 और आईटीआर-4 भरने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है, जिससे टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त समय मिलेगा।








