School Education : स्कूल शिक्षा विभाग में प्रभारवाद पर कोर्ट के निर्देश के बाद अधिकारी सकते में, देना होगा इन सवालों का जवाब

School Education।बिलासपुर (मनीष जायसवाल) ।प्रभार वाद का स्कूल शिक्षा विभाग में अच्छा खासा प्रभाव है। जिसके चलते इस विभाग का सिस्टम अपनी ही बनाई नीतियों पर नहीं चलने को लेकर कई बार बैक फुट में रहा है।

नीतियों से जुड़े मामले जब न्यायालय पहुंचते है और इनका निर्णय राज्य शासन के खिलाफ आता है तब ऐसे में न्यायालय की ओर से की गई कोई महत्वपूर्ण टिप्पणी आती है। ऐसी स्थिति में कई बार विभाग असहज दिखाई देता है। व्याख्याता एलबी को प्रभारी विकास खंड शिक्षा अधिकारी बनाए जाने को लेकर भी ऐसी स्थिति छत्तीसगढ़ शासन के सामने कई बार आई है।

उसके बावजूद  शिक्षक व्याख्याता को प्रभारी अधिकारी बनाने का प्रेम व्यवस्था  के जिम्मेदार लोगों  का खत्म होता ही नहीं है। जबकि इस पद के लिए योग्यता एक दम सरल सी है। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा भर्ती पदोन्नति नियम 2019 के अनुसूची दो के अंतर्गत राजपत्र में जारी अधिसूचना के अनुसार पांच वर्षों से सेवारत प्राचार्य वर्ग दो या सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी को विकास खंड शिक्षा अधिकारी बनाने की पात्रता छत्तीसगढ़ शासन की ओर से निर्धारित की गई है।

इसके बाद भी स्कूल शिक्षा विभाग का सिस्टम व्याख्याता को प्रभार देता रहा है।

अब लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर से शुक्रवार को एक पत्र जारी कर प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से
छत्तीसगढ उच्च न्यायालय में दायर अवमानना प्रकरण क्रमांक 779/20231 के विषय में जानकारी जुटाने के लिए विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी के पद पर पदस्थ व्याख्याताओं की जानकारी मांगी गई है।

जिसमे विकासखण्ड का नाम ,विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी का नाम ,व्याख्याता कब से बीइओ के पद पर पदस्थ है , उसकी कब से व्याख्याता पद पर वरिष्ठता है। इसका पूरा ब्योरा दो दिनों में देना है।

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हाल ही में छत्तीसगढ उच्च न्यायालय में दयाल सिंह व्याख्याता शा.हा.से. स्कूल इंदूराई वि.ख. कवर्धा जिला कबीरधाम विरुद्ध छ.ग. शासन एवं संजय जायसवाल व्याख्याता एल.बी. वर्तमान प्रभारी बीईओ कवर्धा जिला कबीरधाम के संबंध में दायर याचिका क्र. WPS 8178/2022 में याचिकाकर्ता की ओर से प्रभारी बीईओ कवर्धा जिला कबीरधाम के संबंध में प्रार्थना किया गया था ।

जिस पर छत्तीसगढ उच्च न्यायालय ने संबंधित को शासन स्तर पर अभ्यावेदन देकर चार सप्ताह के भीतर स्कूल शिक्षा विभाग को उक्त अभ्यावेदन को निराकरण करने के लिए निर्देशित किया गया था। लेकिन न्यायालय के आदेश पर स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से कोई कार्यवाही नही किए जाने पर याचिकाकर्ता दयाल सिंह व्याख्याता शा.हा.से. स्कूल इंदूराई वि.ख. कवर्धा जिला कबीरधाम की ओर से व्यथित होकर अवमानना याचिका क्र. 779/2023 दायर की गई ।

इस आवमानना याचिका पर 18/09/2024 को सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह माना कि स्कूल शिक्षा विभाग राजपत्र भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2019 के तहत दयाल सिंह व्याख्याता शा.हा.से. स्कूल इंदूराई वि.ख. कवर्धा जिला कबीरधाम एवं संजय जायसवाल व्याख्याता एल.बी. वर्तमान प्रभारी बीईओ कवर्धा जिला कबीरधाम दोनों को प्रभारी बीईओ के लिए अपात्र मानता है।

न्यायालय की ओर से टिप्पणी में यह भी कहा गया कि व्याख्याता जो शैक्षणिक कार्यों के लिए नियुक्त हुए हैं …! उन्हे प्रभारी विकास खंड शिक्षा अधिकारी बनाकर विभाग की ओर से जनशक्ति का गलत उपयोग किया जा रहा है।

उच्च न्यायालय ने प्रदेश में गिरते हुए शिक्षा के स्तर पर नाराजगी जाहिर करते हुए विभाग को यह शपथ पत्र प्रस्तुत करने को कहा जिसमें व्याख्याताओं को प्रभारी बीईओ बनाए जाने पर जो विसंगति/ दुष्परिणाम हुए है उन्हें दूर करने के लिए क्या नियम/कदम विभाग की ओर से बनाए जा रहे हैं। साथ ही उच्च न्यायालय की ओर से शासन से यह जानकारी भी मांगी गई है कि वर्तमान में कितने पांच साल पूर्ण किए प्राचार्य एवं सहायक विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी है जिन्हे विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी का प्रभार दिया है।

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बताते चले कि समय-समय पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्णयों मे भी व्याख्याता को विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी के लिए अयोग्य घोषित किया जा चुका है जिसके प्रकरण कुछ इस प्रकार हैः-

1. श्री डी.एन. मिश्र vs छ.ग. शासन केस नं. wps 6869/2019

2. श्री फूलसाय मरावी vs छ.ग. शासन केस नं. wps 7279/2022

3. श्री बी.एस. बंजारे vs छ.ग. शासन केस नं. wps 7123/2022

4. श्री मुकेश मिश्रा vs छ.ग. शासन केस नं. wps 5176/2021

5. श्री महेन्द्र धर दिवान vs छ.ग. शासन केस नं. wps 4029/2021

6. श्री अमर सिंह धृत लहरे vs छ.ग. शासन केस नं. wps 7207/2019

7. श्री दयाल सिंह vs छ.ग. शासन केस नं. wps 2280/2021

8. श्री जी.पी बनर्जी vs छ.ग. शासन केस नं. wps 7165/2022

9. श्री आलोक सिंह vs छ.ग. शासन केस नं. wps 7762/2022

10. श्री संतोष सिंह vs आलोक सिंह व छ.ग. शासन केस नं. wps 8021/2022

11. श्री रमाकान्त देवांगन vs छ.ग. शासन केस नं. wps 8244/20221 जैसे कुछ प्रमुख मामले है।

यह जानना भी जरूरी है कि भारत के उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली में प्रकरण क्रमांक SLP (c) CC जिसका नंबर 3449 Of 2015 विनोद यादव vs छ.ग. शासन में छ.ग. शासन की ओर से दिये गये शपथ पत्र में शासन ने दो कैडर शैक्षणिक और प्रशासनिक बनाये जाने का उल्लेख किया है साथ ही यह कहा है कि एक कैडर के लोग दूसरे कैडर में नहीं जा पाएंगे जिसका पालन 9 साल में नही किया गया है।

विडंबना यह है कि उस शपथ पत्र में व्याख्याता को सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी के पद के लिए अयोग्य माना गया ।लेकिन उन्हे लगातार नियम विरुद्ध बी. ई.ओ. बनाया जा रहा है  ।जिससे छत्तीसगढ़ शासन की कथनी और करनी में अंतर साफ दिखाई देता है। जबकि सैकड़ो की संख्या में प्राचार्य वर्ग दो और राज्य प्रशासनिक सेवा से चयनित पांच वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके बहुत से सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारियो का कैडर स्कूल शिक्षा विभाग की व्यवस्था में मौजूद है।

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कुल मिला कर देखा जाए तो व्याख्याता को बीईओ के पद के लिए अपात्र होने के बावजूद बार-बार स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से प्रभारी बीईओ बनाया जाता रहा है। ऐसे लगभग एक दर्जन मामले छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में दर्ज हो चुके है, जहां व्याख्याता को नियम विरुद्ध बीईओ को प्रभार दिया गया है। हाई कोर्ट में याचिका लगते ही स्कूल शिक्षा विभाग तत्काल ऐसे व्याख्याता को जिसे प्रभारी बीईओ बनाया गया है हटा देता है  ।लेकिन जिन मामलों में याचिका नहीं लगती वहां जानबूझकर व्याख्याता को प्रभारी बीईओ बनाकर मनमर्जी से पोस्टिंग दी जा रही है । लेकिन इस बार उच्च न्यायालय ने किन-किन स्थानों पर व्याख्याता को बीईओ बनाया गया है,यह जानकारी शपथ पत्र सहित प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है जिसे लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी सकते में हैं।

अब छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शैक्षणिक संवर्ग के व्याख्याता को प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी बनाए जाने को लेकर अवमानना के मामले में गंभीरता से लिया है। जो आने वाले समय में एक बड़ी लकीर स्कूल शिक्षा विभाग के लिए साबित हो सकती है।

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