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School Exam- वार्षिक परीक्षाओं पर छिड़ा विवाद..प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने की DPI को पत्र लिखकर वार्षिक परीक्षा के लिए जारी आदेश को रद्द करने की मांग

एसोसिएशन के अनुसार, बोर्ड परीक्षाओं के अलावा अन्य कक्षाओं में इस तरह का हस्तक्षेप निजी स्कूलों की स्वायत्तता पर सीधा हमला है। निजी स्कूलों का कहना है कि वे अपने संस्थानों में कई ऐसे अतिरिक्त विषय भी पढ़ाते हैं जो सरकारी पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं, ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा लिए जाने वाले मूल्यांकन में उन विषयों के परिणामों का क्या होगा, इस पर विभाग ने कोई स्पष्टता नहीं दी है।

School Exam/रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा पहली से 11वीं (5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं को छोड़कर) की वार्षिक परीक्षाओं के आयोजन को लेकर जारी किए गए हालिया आदेश ने प्रदेश में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा 3 फरवरी 2026 को जारी इस निर्देश का छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन ने न केवल इस आदेश को रद्द करने की मांग की है, बल्कि मांग पूरी न होने पर प्रदेश व्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने डीपीआई को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियों को विस्तार से साझा किया है, जिसमें उन्होंने शिक्षा विभाग के इस फैसले को नियमों के विरुद्ध और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया है।

एसोसिएशन का तर्क है कि शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून और स्कूलों की मान्यता संबंधी नियमों में इस तरह की परीक्षाओं का कहीं कोई उल्लेख नहीं है।

एसोसिएशन के अनुसार, बोर्ड परीक्षाओं के अलावा अन्य कक्षाओं में इस तरह का हस्तक्षेप निजी स्कूलों की स्वायत्तता पर सीधा हमला है। निजी स्कूलों का कहना है कि वे अपने संस्थानों में कई ऐसे अतिरिक्त विषय भी पढ़ाते हैं जो सरकारी पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं, ऐसे में शिक्षा विभाग द्वारा लिए जाने वाले मूल्यांकन में उन विषयों के परिणामों का क्या होगा, इस पर विभाग ने कोई स्पष्टता नहीं दी है।

स्कूल संचालकों ने इस फैसले के समय पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शैक्षणिक सत्र के अंतिम महीने में अचानक परीक्षा की घोषणा करना विद्यार्थियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव डालने जैसा है। यह न केवल बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालेगा, बल्कि अभिभावकों के उन मौलिक अधिकारों का भी हनन है जिसके तहत वे यह तय करते हैं कि उनके बच्चों को किस पद्धति से पढ़ाया जाए।

सोसिएशन ने विभाग की तैयारियों पर भी उंगली उठाई है। पत्र में कहा गया है कि मार्च में परीक्षा आयोजित करने की बात तो कही गई है, लेकिन अभी तक न तो परीक्षाओं का ब्लूप्रिंट जारी हुआ है और न ही पाठ्यक्रम (सिलेबस) को लेकर कोई दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासनिक स्तर पर भी इस आदेश के क्रियान्वयन को लेकर संशय जताया जा रहा है।

School Exam/एसोसिएशन का कहना है कि आदेश के अनुसार जिला स्तरीय समितियों का गठन होना था, लेकिन अब तक किसी भी जिले में ऐसी कोई समिति अस्तित्व में नहीं आई है। जहां एक ओर 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रक्रिया अक्टूबर माह से ही शुरू कर दी जाती है, वहीं सत्र खत्म होने के करीब आने के बावजूद इन परीक्षाओं के लिए आवेदन की अधिसूचना तक जारी नहीं हुई है। ऐसे में लाखों विद्यार्थियों के लिए एक महीने के भीतर परीक्षा का पुख्ता इंतजाम करना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती नजर आ रहा है। 

Shri Mi

पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर

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