Chhattisgarh Chief Secretary: छत्तीसगढ़ में नए मुख्य सचिव की तलाश: दिल्ली और रायपुर के बीच फंसा पेच, क्या जैन को मिलेगा पुनर्वास?
दिलचस्प बात यह है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता सिर्फ नए मुख्य सचिव का चयन नहीं, बल्कि रिटायर हो रहे अमिताभ जैन के साथ-साथ पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा के पुनर्वास की भी है।

Chhattisgarh Chief Secretary: छत्तीसगढ़ के शीर्ष प्रशासनिक पद पर बदलाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है। मौजूदा मुख्य सचिव अमिताभ जैन इस महीने की 30 तारीख को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, और उनके उत्तराधिकारी को लेकर भाजपा की राज्य सरकार और केंद्र के बीच गहन मंथन जारी है।
दिलचस्प बात यह है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता सिर्फ नए मुख्य सचिव का चयन नहीं, बल्कि रिटायर हो रहे अमिताभ जैन के साथ-साथ पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा के पुनर्वास की भी है।
मुख्य सचिव की कुर्सी पर दावेदारों की लंबी कतार
नए मुख्य सचिव की नियुक्ति महज चार दिन दूर है, लेकिन चयन प्रक्रिया अभी भी एक उलझी हुई पहेली बनी हुई है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रेणु पिल्लई, ऋचा शर्मा, अमित अग्रवाल, सुब्रत साहू और मनोज पिंगुआ के नाम दौड़ में शामिल हैं।
इस उलझन की मुख्य वजह केंद्र सरकार की सहमति का अनिवार्य होना है। बताया जा रहा है कि जिस नाम पर राज्य सरकार सहमत है, केंद्र उससे पूरी तरह सहमत नहीं है, और जिस नाम में केंद्र की रुचि है, उस पर राज्य को आपत्ति है।
इस खींचतान के बीच, अमिताभ जैन को सेवा विस्तार (एक्सटेंशन) दिए जाने की चर्चा भी चल रही है, हालांकि इसकी संभावना काफी कम मानी जा रही है क्योंकि अभी तक इस संबंध में कोई फाइल आगे नहीं बढ़ी है। भाजपा संगठन का एक प्रभावशाली वर्ग इस एक्सटेंशन के पूरी तरह खिलाफ है और एक बड़े नेता ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गोपनीय पत्र लिखकर जैन को सेवा विस्तार न देने और न ही उनका पुनर्वास करने का आग्रह किया है। पत्र में जैन और जुनेजा दोनों को पिछली भूपेश सरकार का करीबी बताया गया है।
मनोज पिंगुआ या रेणु पिल्लई: किसका पलड़ा भारी?
वरिष्ठता के क्रम में रेणु पिल्लई, ऋचा शर्मा और सुब्रत साहू के नाम सबसे ऊपर हैं। हालांकि, राज्य सरकार मनोज पिंगुआ को मुख्य सचिव बनाने की पुरजोर वकालत कर रही है। खबरें हैं कि पिंगुआ ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है, और हाल ही में छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए शाह की अगवानी भी उन्होंने ही की थी, जिससे उनके नाम पर सहमति बनाने के प्रयासों के संकेत मिलते हैं।
अगर केंद्र सरकार महिला अधिकारी को प्राथमिकता देती है, तो रेणु पिल्लई बाजी मार सकती हैं। पिल्लई की छवि एक स्वच्छ, ईमानदार और तेज-तर्रार अधिकारी की है।
उनका प्रशासनिक परिवार से भी गहरा नाता है; उनके पति हाल ही में रिटायर हुए आईपीएस अधिकारी हैं, पिता आंध्र प्रदेश कैडर के आईएएस रहे हैं, पुत्र ओडिशा कैडर के आईएएस हैं, और पुत्री छत्तीसगढ़ कैडर की आईपीएस हैं।
वहीं, 1992 बैच के आईएएस सुब्रत साहू भी अपने ओडिशा कनेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं। ओडिशा के मूल निवासी साहू के पिता भी आईएएस अधिकारी थे, और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम उनके साथ जोड़ा जा रहा है।
जैन और जुनेजा के पुनर्वास पर सरकार की ‘फिक्र’
नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के बाद अमिताभ जैन को क्या पद मिलेगा, इसकी चिंता खुद जैन से ज्यादा सरकार को है। सूत्रों के अनुसार, जैन की दिलचस्पी सूचना आयोग में है, हालांकि राज्य नीति (योजना) आयोग के उपाध्यक्ष पद का प्रभार फिलहाल उनके पास ही है, लेकिन वे इस पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं।
इसी तरह, पूर्व डीजीपी अशोक जुनेजा को राज्य का मुख्य निर्वाचन आयुक्त बनाने की खबर आ रही है। लेकिन, इस नियुक्ति में अभी समय लग सकता है, क्योंकि उच्च न्यायालय ने सूचना आयुक्त के तीन उम्मीदवारों की आपत्ति के बाद आयोग में नियुक्ति पर रोक लगा दी है।
बताया जा रहा है कि याचिकाकर्ताओं को अपनी याचिका वापस लेने के लिए मनाने के प्रयास चल रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो अशोक जुनेजा इस पद के प्रबल दावेदार होंगे। जुनेजा को यह आश्वासन मिला था कि रिटायर होने के बाद दिल्ली शिफ्ट होने के बावजूद उन्हें पद मिलेगा, लेकिन राज्य के भाजपा नेताओं के कड़े विरोध के कारण उनका रास्ता भी आसान नहीं है।
अगर प्रदेश भाजपा नेताओं द्वारा लिखे गए पत्र को केंद्र ने तरजीह दी, तो अमिताभ जैन और अशोक जुनेजा दोनों को निराशा हाथ लग सकती है, और सुब्रत साहू के मुख्य सचिव बनने के प्रयासों को भी झटका लग सकता है। छत्तीसगढ़ में मुख्य सचिव का चयन फिलहाल एक टेढ़ी खीर बना हुआ है, और सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि अगले कुछ दिनों में दिल्ली और रायपुर के बीच की यह रस्साकशी किस नतीजे पर पहुंचती है।







