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CG Highcourt: बिना सूचना के एसीआर में खराब ग्रेडिंग अवैध, हाईकोर्ट ने हेड कांस्टेबल को सब-इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नत करने का दिया आदेश

CG Highcourt:बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के सेवा लाभ और पदोन्नति से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी कर्मचारी को उसकी गोपनीय चरित्रावली (ACR) में की गई नकारात्मक या प्रतिकूल टिप्पणी के बारे में सूचित किए बिना, उसे पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट के इस निर्णय ने साफ कर दिया है कि बिना ‘कारण बताओ नोटिस’ या सूचना के दी गई कोई भी नकारात्मक प्रविष्टि कानूनी रूप से प्रभावहीन मानी जाएगी। यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जिन्हें अक्सर ‘खराब एसीआर’ का हवाला देकर प्रमोशन से रोक दिया जाता है।

यह कानूनी विवाद आबकारी विभाग में जांजगीर-चांपा जिले में कार्यरत हेड कांस्टेबल मुकेश शर्मा से जुड़ा है। मामला वर्ष 2023 का है, जब रायपुर में आबकारी आयुक्त द्वारा हेड कांस्टेबल से सब-इंस्पेक्टर (SI) के पद पर पदोन्नति के लिए विभागीय लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। मुकेश शर्मा ने इस कठिन परीक्षा में 200 में से 172 अंक प्राप्त किए, जो चयन के लिए पर्याप्त थे।

हालांकि, जब अंतिम चयन की बारी आई, तो विभाग ने उनकी वर्ष 2017, 2018 और 2019 की गोपनीय चरित्रावली (ACR) में दर्ज नकारात्मक टिप्पणियों का हवाला देते हुए उनके अंक कम कर दिए। इसके परिणामस्वरूप, बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन के बावजूद मुकेश शर्मा पदोन्नति की सूची से बाहर हो गए। विभाग के इस अन्यायपूर्ण निर्णय के खिलाफ उन्होंने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय और वर्षा शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

याचिकाकर्ता की ओर से दलीलों में सुप्रीम कोर्ट के उन नजीरों का उल्लेख किया गया, जिनमें कहा गया है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत यदि किसी कर्मचारी के रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टि की जाती है, तो उसे अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने तथ्यों का विश्लेषण करते हुए पाया कि मुकेश शर्मा को उनकी खराब ग्रेडिंग या नकारात्मक टिप्पणी के संबंध में कभी कोई सूचना या ‘शो-कॉज नोटिस’ नहीं दिया गया था।

नियमों के अनुसार, ऐसी अघोषित प्रतिकूल प्रविष्टियां पदोन्नति में बाधा नहीं बन सकतीं। याचिकाकर्ता की पदस्थापना वर्ष 2018-19 में अनुसूचित जिले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) में थी। राज्य सरकार के 2005 के परिपत्र के अनुसार, कठिन क्षेत्रों में सेवा देने वाले कर्मचारियों की ‘कैटेगरी बी’ को ‘कैटेगरी ए’ माना जाना चाहिए था, जिससे उन्हें अतिरिक्त अंक मिलने थे।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और आबकारी विभाग को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने निर्देश दिया कि मुकेश शर्मा को तत्काल प्रभाव से आबकारी सब-इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत किया जाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि कर्मचारी को मौका दिए बिना उसके रिकॉर्ड में की गई कोई भी नकारात्मक टिप्पणी शून्य मानी जाएगी और उसका उपयोग उसे सेवा लाभों से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता।

Shri Mi

पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर

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