B.Ed holder – प्राथमिक शिक्षक भर्ती से बाहर हुए बीएड. धारक, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

B.Ed holder/छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर दिया है कि अब प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 5) में शिक्षक बनने के लिए केवल डीएलएड (D.El.Ed.) या समकक्ष डिप्लोमा धारक ही पात्र होंगे। इस फैसले के बाद, बीएड. (B.Ed.) डिग्री धारकों को इस पद पर आवेदन करने का अधिकार नहीं होगा।

B.Ed holder/यह फैसला जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने बिलासपुर निवासी सुनील कुमार गहरे की 2018 में दायर याचिका पर सुनवाई की।
याचिकाकर्ता ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की उस अधिसूचना को चुनौती दी थी, जिसमें बीएड. धारकों को भी प्राथमिक शिक्षक बनने की अनुमति दी गई थी।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि बीएड. पाठ्यक्रम माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के लिए बनाया गया है, जबकि छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण (डीएलएड) की जरूरत होती है। कोर्ट ने भी इस तर्क को सही माना और कहा कि बच्चों के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अधिकार से समझौता नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एनसीटीई द्वारा बीएड. धारकों के लिए प्रस्तावित छह महीने का ब्रिज कोर्स अब तक लागू नहीं हो पाया है, जिससे बीएड. डिग्री धारक प्राथमिक स्तर के बच्चों को पढ़ाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 2022 की शिक्षक भर्ती में सभी बीएड. उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित किया जाए और नई चयन सूची 12 हफ्तों के भीतर फिर से तैयार की जाए।
यह फैसला लाखों बीएड. डिग्री धारकों के लिए एक बड़ा झटका है, जबकि डीएलएड. उम्मीदवारों के लिए एक राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाई कोर्ट भी पहले इसी तरह के मामलों में बीएड. धारकों को अयोग्य ठहरा चुके हैं।














