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WhatsApp यूजर्स के डेटा पर घिरा मेटा, सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कही यह बात

दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप (WhatsApp) और मेटा (Meta) की डेटा शेयरिंग पॉलिसी को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को एक अहम सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने साफ किया कि वह करोड़ों भारतीयों की निजी जानकारी का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं होने देगी।

कोर्ट ने मेटा को दो टूक शब्दों में कहा कि नागरिकों की प्राइवेसी कोई व्यापारिक वस्तु नहीं है।भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मेटा की नई नीतियों पर आपत्ति जताते हुए कहा, “हम यूजर्स की जानकारी का व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं होने देंगे। यह कोर्ट देश के आम नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए है, किसी अंतरराष्ट्रीय कंपनी के अरबों-करोड़ों के मुनाफे के लिए नहीं। नागरिकों की प्राइवेसी उनका मौलिक अधिकार है और इसकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।”

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने मेटा की ‘ऑप्ट-आउट’ (Opt-out) नीति और जटिल नियमों पर तीखे सवाल किए। उन्होंने कहा, “आप कहते हैं कि यूजर के पास डेटा शेयरिंग से इनकार करने का विकल्प है। लेकिन क्या सड़क किनारे फल बेचने वाली एक साधारण महिला आपकी इन जटिल शर्तों को समझ सकती है? आपकी शर्तें इतनी कठिन भाषा में लिखी गई हैं कि शायद कानूनी विशेषज्ञों को भी समझने में पसीने छूट जाएं।”

CJI ने आगे इसे गंभीर बताते हुए कहा, “बिना स्पष्ट समझ के डेटा लेना एक तरह की चोरी है और हम इसकी इजाजत कभी नहीं देंगे।”

सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा कि आज के दौर में व्हाट्सएप जैसे ऐप्स की लोगों को लत लगा दी गई है। लोग संचार के लिए इन पर निर्भर हो गए हैं, और अब कंपनियां इसी मजबूरी का गलत फायदा उठाकर उन पर अपनी शर्तें थोप रही हैं। कोर्ट ने चिंता जताई कि अब तक लाखों यूजर्स का डेटा बिना उनकी सही जानकारी के व्यावसायिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा चुका है।

मेटा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अखिल सिबल ने दलील दी कि कंपनी व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए केवल ‘सीमित डेटा’ साझा करने की इजाजत मांग रही है।

इस पर CJI ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “अगर आपको डेटा का कोई भी हिस्सा बेचने लायक लगेगा, तो आप उसे बेच देंगे। सिर्फ इसलिए कि भारतीय उपभोक्ता शांत हैं और संगठित रूप से अपनी आवाज नहीं उठा पा रहे, आप उन्हें अपना शिकार (Prey) नहीं बना सकते। हम भारतीय नागरिकों की चुप्पी को उनकी कमजोरी नहीं बनने देंगे।”a

Shri Mi

पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर

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