पूर्ण पेंशन शिक्षकों का सबसे बड़ा मुद्दा – संजय शर्मा

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा है कि एल बी संवर्ग के शिक्षक जीरो पेंशन में रिटायर हो रहे है, यह सौ टके की बात है कि शिक्षकों की स्थिति को देखते हुए पूर्ण पेंशन सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।

पुरानी पेंशन के समय से नियुक्त 1998 के शिक्षक भी पुरानी पेंशन से वंचित है और अब 1998 व 2005 में नियुक्त शिक्षक लगातार रिटायर होते जा रहे हैं, हजारों शिक्षक ऐसे हैं जो न्यूनतम पेंशन के दायरे में नहीं आ रहे हैं क्योंकि संविलियन के पश्चात 10 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले शिक्षक ही न्यूनतम पेंशन के दायरे में आएंगे।
ऐसे में 2018 में संविलियन हुए शिक्षक संवर्ग 2028 में रिटायर होने वाले हजारों शिक्षक जीरो पेंशन में रिटायर हो रहे हैं यह अत्यंत दुखद है, अगर करीब से उन्हें आप देखेंगे तो उनकी पीड़ा को समझ सकेंगे,,60 हजार 80 हजार और 90 हजार अंतिम वेतन प्राप्त करने वाले शिक्षक,जीरो पेंशन में रिटायर हो रहे है और उनकी स्थिति बदतर होती जा रही है।
समाज में इससे शिक्षकों का सम्मान बिगड़ता जा रहा है, रहन-सहन का स्तर रिटायर होने के बाद न्यून होता जा रहा है, परिवार परेशानी में आ रहा है, स्वास्थ्य सुविधाएं नही जुटा पा रहे है,, छोटे-मोटे व दूसरे कार्य करने के लिए रिटायर शिक्षक मजबूर हो रहे हैं।
हालांकि यह पीड़ा आज हमारे रिटायर शिक्षकों की है लेकिन गंभीरता से अगर आप चिंतन करें तो यह पीड़ा हम सबकी है जिन्हें 33 वर्ष की सेवा पूर्ण नहीं होगा वे सारे शिक्षक अल्प पेंशन के दायरे में आएंगे अर्थात अंतिम माह के वेतन का 50% वेतन – पेंशन में नहीं मिलेगा और जीरो पेंशन का दर्द आज हजारों शिक्षकों के सामने सुरसा की भांति खड़ा है।
जीरी पेंशन वाले कुछ शिक्षक हमे दिख भी रहा है और यह लगातार ही आता जा रहा है,,इसी प्रकार से निरंतर रिटायर होने वाले शिक्षकों की संख्या बढ़ती जाएगी और वह आशिक पेंशन के दायरे में आएंगे, जिससे परिवार का आगे महंगाई के दौर में भरण पोषण भी असंभव होता जाएगा।
यह ज्वलंत विषय है इसीलिए है क्योंकि माननीय हाई कोर्ट छत्तीसगढ़ द्वारा पूर्व सेवा को रेखांकित किया गया है, उन्होंने कहा है कि संविलियन से पूर्व याचिकाकर्ताओ द्वारा दी गई दीर्घकालीन सेवाओं को अप्रासंगिक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर एसोसिएशन द्वारा हाई कोर्ट द्वारा पारित निर्णय के तहत पूर्व सेवा गणना करते हुए संविलियन पूर्व सेवा को पेंशन योग्य सेवा मान्य करने हेतु आदेश जारी करने की मांग की जा रही है।
और इसीलिए हम पूर्व सेवा को पेंशन योग्य सेवा मानने का अभियान चला रहे है, सेवा में रहते जितने भी गुलाटिया लेंगे लेकिन सेवानिवृत्ति होने के बाद भौतिक साधनों को जुटाने में असंभव स्थिति बनेगी इसीलिए एल बी संवर्ग के इस विषय को छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन की ओर से लगातार पुरानी पेंशन की बात को हर संभव मंच पर उठाया जा रहा है और यही विषय हम सभी के लिए प्रमुख विषय बना हुआ है।
मोदी की गारंटी में वेतन विसंगति को इस लहजे में लिखा गया है कि क्रमोन्नत वेतनमान से वेतन विसंगति दूर होगी, ऐसे में छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन की एक थीम पदोन्नति में वन टाइम रिलैक्सेशन को अधिसंख्य शिक्षक साथियों ने स्वीकार किया और अब वही साथी शेष रह गए हैं जिनके लिए पदोन्नति के पद नहीं है, बड़े बड़े दावा करने वाले धुरंधरों ने जब अवसर मिला पदोन्नति लिया, गजब जाल है साहेब वेतन विसंगति की दुहाई देने वाले पदोन्नत हो गए और वेतन विसंगति दूर हो गई, विसंगति की लड़ाई अब इस हाल में है कि पदोन्नति लेते जाओ, पद नही होने के कारण जिनकी पदोन्नति नही हुई वह क्रमोन्नति लें, लेकिन वह भी शासन निर्धारित 10 वर्ष की सेवा पूर्ण होने के बाद।
सरकार लगातार मोदी के गारंटी को पूरा कर चुके हैं ऐसा दावा कर रही है, इसमे वेतन विसंगति अब विस्मृत हो गया ऐसे में क्रमोन्नति वेतनमान के रूप में लाभ लिया जा सकता है और इसको छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन की थीम पर पूर्व में 5 वर्ष के पदोन्नति के अनुभव को शिथिल करते हुए 3 वर्ष में पदोन्नति प्राप्त कराया गया, आज उसी प्रकार से बड़े अभियान के रूप में वन टाइम रिलैक्सेशन क्रमोन्नति के लिए टीचर्स एसोसिएशन की मांग है ताकि जिन्हें पदोन्नति नहीं मिली है ऐसे साथियों को समुचित रूप से 5 वर्ष में क्रमोन्नति वेतनमान का लाभ मिले और वे उसे दायरे में शामिल हो जाए कि उनका वेतन स्पष्ट हो सके।














