jojobetcasibomJojobet GirişcasibomJojobet Girişcasibom girişvaycasinomarsbahis girişJojobetHoliganbet Giriş

SC ने पोर्न बैन पर सुनवाई से किया इनकार, नेपाल का हवाला देकर दिया बड़ा बयान

3A 92

नई दिल्ली

 सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पोर्नोग्राफी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर विचार करने से फिलहाल इनकार कर दिया. अदालत ने इस मामले का जिक्र करते हुए नेपाल में हाल ही में हुए जेन जेड (Gen Z) विरोध प्रदर्शनों का उदाहरण दिया. कोर्ट ने कहा कि देखिए, प्रतिबंध को लेकर नेपाल में क्या हुआ. हालांकि, निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद निर्धारित की है. इस बीच आपको बता दें कि मुख्य न्यायाधीश गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं.

याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह देश में पोर्नोग्राफी पर नियंत्रण के लिए एक राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना तैयार करे, विशेष रूप से नाबालिगों को अश्लील सामग्री से बचाने के उद्देश्य से. इसके अलावा, याचिका में सार्वजनिक स्थलों पर ऐसी किसी भी सामग्री को देखने पर रोक लगाने की भी मांग की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि डिजिटलीकरण के युग में हर व्यक्ति के पास इंटरनेट की पहुंच है और अब शिक्षित या अशिक्षित का फर्क नहीं रह गया है. सब कुछ एक क्लिक में उपलब्ध है. उन्होंने सरकार के उस बयान का भी हवाला दिया जिसमें यह स्वीकार किया गया था कि इंटरनेट पर अरबों पोर्न साइट्स मौजूद हैं.

 भारत में 20 करोड़ से अधिक अश्लील वीडियो

याचिका में यह भी कहा गया कि कोविड-19 महामारी के दौरान बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा के लिए डिजिटल उपकरणों का उपयोग करना पड़ा, लेकिन इन उपकरणों पर पोर्नोग्राफी देखने से रोकने के लिए कोई प्रभावी तंत्र मौजूद नहीं है. हालांकि, अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि ऐसे कई सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं जो माता-पिता को अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों को नियंत्रित या मॉनिटर करने की सुविधा देते हैं.

याचिकाकर्ता के अनुसार, पोर्नोग्राफी समाज पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, खासतौर पर 13 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों पर. उन्होंने दावा किया कि भारत में 20 करोड़ से अधिक अश्लील वीडियो या क्लिप है जिनमें बाल यौन सामग्री भी शामिल है और बिक्री के लिए आसानी से उपलब्ध हैं. याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के तहत सरकार के पास ऐसे वेबसाइट्स या सामग्री तक आम जनता की पहुंच रोकने का अधिकार है. 

Related Articles