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कांकेर बना शाला त्यागी मुक्त ग्राम अभियान का मॉडल

उत्तर बस्तर कांकेर/आकांक्षी जिला उत्तर बस्तर कांकेर में जिला प्रशासन द्वारा संचालित “अनुरोध कार्यक्रम – शाला त्यागी मुक्त ग्राम” अभियान ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई और प्रेरणादायी मिसाल कायम की है। कलेक्टर नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर के नेतृत्व, स्पष्ट दिशा-निर्देशों एवं सतत निगरानी में यह अभियान 21 नवम्बर से 26 नवम्बर तक जिले के समस्त ग्राम पंचायतों में सफलतापूर्वक संचालित किया गया।

नक्सल प्रभावित, आदिवासी बाहुल्य एवं दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों तथा समुदाय की सहभागिता से यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप ले सका।

तिथि-वार अभियान की प्रमुख गतिविधियाँ
21 नवम्बर से 24 नवम्बर के मध्य जिले के सभी विकासखंडों में घर-घर सर्वेक्षण कर शाला अप्रवेशी एवं शाला त्यागी बच्चों का चिन्हांकन किया गया। इस सर्वे में 6 से 14 आयु वर्ग के बच्चों के साथ-साथ कक्षा 1 से 12 तक के ऐसे बच्चों की पहचान की गई, जो किसी कारणवश विद्यालय से बाहर थे।

सर्वे कार्य प्रधानाध्यापकों, संकुल प्राचार्यों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं पंचायत प्रतिनिधियों के आपसी समन्वय से संपन्न हुआ। बच्चों की जानकारी विद्यालयों की उपस्थिति पंजी से मिलान कर निर्धारित प्रपत्र में संकलित की गई। इस दौरान विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग बच्चों का पृथक चिन्हांकन भी किया गया।
26 नवम्बर को जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई। ग्राम सभा में चिन्हांकित बच्चों की सूची का सार्वजनिक वाचन किया गया तथा पालकों, पंचायत सदस्यों एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में बच्चों को विद्यालय में पुनः नामांकित कराने हेतु काउंसलिंग की गई।

मुख्यधारा में शिक्षा से जुड़ाव,अभियान के अंतर्गत शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों को समीपस्थ प्राथमिक, माध्यमिक, हाई एवं हायर सेकंडरी विद्यालयों में समुचित कक्षा में प्रवेश दिलाया गया। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को आश्रम शाला, केजीबीवी, 50 सीटर एवं 200 सीटर डारमेटरी तथा आवासीय विद्यालयों में प्रवेश प्रदान किया गया।

कक्षा 8 उत्तीर्ण लेकिन कक्षा 9 में प्रवेश न लेने वाले बच्चों को चिन्हांकित कर ओपन स्कूल प्रणाली के माध्यम से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया। इसके साथ ही लगातार अनुपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों के लिए विद्यालय स्तर पर अनुरोध कार्यक्रम आयोजित कर उपचारात्मक शिक्षण एवं विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई।

निरंतर मॉनिटरिंग और जनजागरूकता
अभियान के दौरान कोटवारों द्वारा मुनादी कराई गई तथा विद्यालय स्तर पर गठित मीडिया सेल के माध्यम से जनजागरूकता बढ़ाई गई। 28 नवम्बर तक संकुल स्तर पर डाटा का सत्यापन कर विकासखंड कार्यालय में जमा कराया गया, जिसे बीआरसीसी एवं बीईओ द्वारा प्रमाणित कर जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

प्रभावशाली परिणाम
अनुरोध कार्यक्रम के सार्थक और सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सत्र 2025–26 में अब तक जिले में 288 शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा चुका है। अनुपस्थित बच्चों से 3 दिवस के भीतर शिक्षकों द्वारा संपर्क एवं अनुरोध सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे उपस्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है।
इस अभियान के परिणामस्वरूप जिले की कई ग्राम पंचायतों ने स्वयं को “शाला त्यागी मुक्त ग्राम” घोषित किया है, जिनके प्रमाण पत्र ग्राम-वार प्राप्त किए जा रहे हैं।

कलेक्टर क्षीरसागर ने बताया कि ऐसे ग्राम पंचायतों एवं विद्यालय परिवारों को 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
यह अभियान इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जनभागीदारी, प्रशासनिक संकल्प और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता से कोई भी बच्चा विद्यालय से वंचित नहीं रह सकता।अब जिला कांकेर शाला त्यागी मुक्त होने की दिशा में निर्णायक रूप से अग्रसर है।

Shri Mi

पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर

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