caste census 2027-डिजिटल जनगणना 2027 और जाति गणना, सुप्रीम कोर्ट ने प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों को सरकार के पास भेजा, जानिए क्या है पूरा मामला

caste census 2027/भारत की आगामी 16वीं राष्ट्रीय जनगणना को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने 2027 में होने वाली डिजिटल जनगणना में जाति दर्ज करने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
caste census 2027/मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1958 के वैधानिक ढांचे के तहत संचालित होती है। अदालत ने केंद्र सरकार और भारत के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वे याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सुझावों पर गंभीरता से विचार करें, ताकि इस ऐतिहासिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि की गुंजाइश न रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में इस बात पर जोर दिया कि जनगणना का तरीका और इसके तहत पूछे जाने वाले बिंदुओं को तय करने का अधिकार कानूनन संबंधित अधिकारियों और विशेषज्ञों के पास है।
caste census 2027/पीठ ने विश्वास जताया कि सक्षम प्राधिकरण विषय विशेषज्ञों की मदद से एक ऐसी मजबूत और त्रुटिहीन प्रणाली विकसित करेंगे जो आधुनिक समय की जरूरतों के अनुरूप हो। हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता द्वारा पारदर्शिता के संबंध में उठाए गए कुछ मुद्दे प्रासंगिक हैं, जिन्हें पहले ही रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है।
यह याचिका शिक्षाविद आकाश गोयल द्वारा दायर की गई थी, जिसकी पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने की।
याचिका में मुख्य रूप से यह मांग की गई थी कि जाति संबंधी आंकड़ों को दर्ज, वर्गीकृत और सत्यापित करने के लिए उपयोग की जाने वाली प्रश्नावली को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का आरोप था कि जनगणना संचालन निदेशालय ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि नागरिकों की जाति की पहचान दर्ज करने के लिए कौन-से मानदंड अपनाए जाएंगे। यह स्पष्टता इसलिए भी आवश्यक मानी जा रही है क्योंकि इस बार जाति गणना का दायरा केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) तक सीमित न रहकर व्यापक स्तर पर अन्य जातियों तक बढ़ाया जा रहा है।
2027 की यह जनगणना भारत के सांख्यिकीय इतिहास में कई मायनों में ऐतिहासिक और क्रांतिकारी साबित होने वाली है। यह न केवल देश की 16वीं राष्ट्रीय जनगणना होगी, बल्कि यह भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना भी होगी। डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रह करने से आंकड़ों के विश्लेषण में तेजी आएगी और भविष्य की सरकारी योजनाओं के निर्माण में अधिक सटीकता मिलने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, 1931 के बाद यह पहली बार होगा जब देश में इतने बड़े पैमाने पर जाति आधारित आंकड़े जुटाए जाएंगे।









