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ded abhyarthiyon ka anshan- 25वें दिन डीएड अभ्यर्थियों का मुंडन कराकर विरोध, एंबुलेंस न मिलने पर ‘छोटा हाथी’ से अस्पताल पहुंचे बीमार आंदोलनकारी

नवा रायपुर के तूता स्थित धरना स्थल पर कड़ाके की ठंड के बीच पिछले 25 दिनों से जारी इस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक रूप से मुंडन करवाकर अपना विरोध दर्ज कराया

ded abhyarthiyon ka anshan/छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के शेष पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड योग्यता धारी अभ्यर्थियों का आमरण अनशन अब एक बेहद भावुक और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है।

ded abhyarthiyon ka anshan/नवा रायपुर के तूता स्थित धरना स्थल पर कड़ाके की ठंड के बीच पिछले 25 दिनों से जारी इस आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक रूप से मुंडन करवाकर अपना विरोध दर्ज कराया। करीब 2300 पदों पर नियुक्ति की बाट जोह रहे इन अभ्यर्थियों का आक्रोश उस समय और बढ़ गया जब अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने पर बुलाने के बावजूद एंबुलेंस नहीं पहुंची और बीमार साथियों को ‘छोटा हाथी’ यानी मालवाहक वाहन के जरिए अस्पताल ले जाना पड़ा। अब तक कुल 13 अभ्यर्थियों की सेहत बिगड़ चुकी है, जिनमें योगेश्वरी, मानवेन्द्र, वेदप्रकाश, शत्रुहन राणा, संगीता नाग, त्रिशला, गुलापी राठिया, यशोदा देवांगन, रूखमणि यादव, यमुना साहू और सुधा वर्मा जैसे नाम शामिल हैं।

इस पूरे विवाद की जड़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 की प्रक्रिया है जिसमें डीएड अभ्यर्थियों का दावा है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उन्हें अब तक जॉइनिंग नहीं दी गई है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिलासपुर उच्च न्यायालय ने 2 अप्रैल 2024 और फिर 26 सितंबर 2025 को नियुक्ति के पक्ष में स्पष्ट आदेश पारित किए थे, साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने भी 28 अगस्त 2024 को राज्य शासन को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके सरकार ने बीएड योग्यता धारियों को बर्खास्त कर विज्ञान प्रयोगशालाओं में तो समायोजित कर दिया, लेकिन रिक्त हुए करीब 2300 पदों पर डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल रखा है। अभ्यर्थी इसे न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और अपने संवैधानिक अधिकारों का हनन मान रहे हैं।

ded abhyarthiyon ka anshan/अभ्यर्थियों की निराशा तब और बढ़ गई जब हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हुई। विधायक रिकेश सेन द्वारा उठाए गए प्रश्न के जवाब में वर्तमान शिक्षा मंत्री ने इन नियुक्तियों के लिए कोई भी समय-सीमा बताने से इनकार कर दिया। सरकार के इस रुख ने उन हजारों युवाओं को मानसिक और सामाजिक संकट में डाल दिया है जो वर्षों से सरकारी नौकरी का सपना देख रहे थे। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब देश की सबसे बड़ी अदालतें उनके पक्ष में फैसला दे चुकी हैं, तब शासन का समय-सीमा बताने से पीछे हटना उनकी उदासीनता को दर्शाता है।

इसी कारण उन्हें विवश होकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आमरण अनशन जैसा कठोर रास्ता अपनाना पड़ा है।

नियुक्ति के इस संघर्ष के साथ ही डीएड अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार के सामने अपनी अन्य प्रमुख मांगें भी रखी हैं। उनकी मांग है कि सभी विषयों को शामिल करते हुए तत्काल 57 हजार पदों पर नई शिक्षक भर्ती निकाली जाए और इसका नोटिफिकेशन इसी वित्तीय वर्ष में जारी हो। इसके अलावा वे सरकार की उस नीति का भी कड़ा विरोध कर रहे हैं जिसके तहत प्रदेश के 10,463 सरकारी स्कूलों को मर्ज करने की योजना बनाई जा रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह शिक्षा के अधिकार का हनन है और इस नीति को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। साथ ही वे स्कूलों में व्यायाम और कला शिक्षकों की अनिवार्य नियुक्ति की मांग भी कर रहे हैं क्योंकि कला संकाय के व्याख्याता पदों पर पिछले 14 वर्षों से कोई भर्ती नहीं हुई है।

आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका यह प्रदर्शन पूरी तरह से गैर-राजनीतिक है और वे केवल अपने कानूनी हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। कड़ाके की ठंड और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के बावजूद अभ्यर्थी धरना स्थल पर डटे हुए हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक 2300 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं होती, वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे।

Shri Mi

पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ राजनैतिक खबरों पर पैनी नजर
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