इकबाल अहमद बोले-भू-राजस्व संशोधन,अपनी हिटलर शाही मे खुद फंस गई बीजेपी

rizvi_jccरायपुर।जनता कांग्रेस छत्तीसगढ जे के मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता इकबाल अहमद रिंजवी ने छत्तीसगढ भू- राजस्व सहिता में एकतरफा आनावश्यक निर्णय लेकर सम्मन्न विधानसभा सत्र में भू- राजस्व सशोधन बिल पास करवाकर श्रेय लेने की हडबडी में आदिवासियो के विरूद्व गलत निर्णय लिया है जो अपने पैरो पर खुद कुलाडी मारने के समान अकल्पनीय है। इसका खामियाजा भाजपा को आसन्न विधानसभा चुनाव में भुगतना पढेगा।रिंजवी ने कहा है कि भाजपा का भू राजस्व सहिता में किया गया सशोधन स्वास्र्थ प्रेरित एवं अनुसूचित जनजाति विरोधी है।भाजपा सरकार मे आदिवासी पहले से उपेक्षित है इसके बाअजूद इस अवैधानिक, अमानवीय एवं गैर वाजिब संशोधन ने करेला वह भी नीम चढा की कहावत को चरितार्थ करता है यह खेद एवं अचभ्ंिात करने वाली सच्चाई है कि प्रस्ताव को मंत्री मंडल में चर्चा के दौरान किसी भी आदिवासी या आदिवासियों के हिमायत में कसीदे पढने वाले मंत्रीगण द्वारा भी खमोश रहकर इस आदिवासी विरोधी कदम पर सहमती व्यक्त की गई जो भाजपा के दोहरे चरित्र को उजागर करता है।


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रिंजवी ने राजस्व सशोधन बिल को आदिवासियों के हितो एवं उनकी भावी पीढी के भविष्य पर कुढाराघात निरूपित करते हुए कहाॅ है कि इस सशोधन से भाजपा अपने ही जाल में खुद फस गई है। उनके पास अपने बचाव के लिए कोई भी बहाना नही है। इस सशोधन के पिछे भाजपा की बदनियती स्पष्ट परिलक्षित होती है। इस संशोधन से स्पष्ट है कि भाजपा ने अपनी पार्टी के अदिवासी जनप्रतिनिधीयो एवं नेताओं को भी मुगालते में रखा गया तथा उन्हें विश्वास में न लेना भाजपा  के हिटलर शाही को दर्शाता है ।
इस संशोधन को आदिवासियों पर बलात थोप दिया गया है जो भाजपा की आदिवासी विरोधी सोच को इंगित करता है। भाजपा को इस बेतुके एवं आदिवासी विरोधी बिल को मंत्रीमंडल एवं सदन के पटल पर रखने से पूर्व  एक सर्वदलीय बैठक बुलाकर चर्चा एवं मथंन करना चाहिए था परन्तु ऐसा न कर भाजपा ने अपनी हठ धर्मिता को उजागर कर दिया है।अब तो केवल बिल को वापस लेकर ही भाजपा अपनी चमडी बचाने का प्रयास कर सकती है,क्योंकि इस संशोधन से न केवल आदिवासी वरन हर वर्ग में भाजपा की किरकिरी हो रही है।

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