मोबाइल पर रोज चल रही हिंदी की एक अनूठी क्लास,कोई भी घर बैठे हो सकता है शामिल

sangya tondonबिलासपुर । आज के दौर में हिंदी को लेकर काम करने वालों की कमी नहीं है। ऐसा ही एक नाम है- बिलासपुर की  संज्ञा टंडन का……। जो प्रदेश ही नहीं देश के जाने-माने भाषाविद्  प्रोफेसर डाॅ.रमेशचंद्र महरोत्रा  की सुपुत्री हैं और आज के दौर के मीडिया यानी मोबाइल-इंटरनेट के जरिए हिंदी की बेहतरी के लिए बड़ा काम कर रही हैं। हिंदी दिवस पर जब सब ओर हिंदी की बात हो रही है, ऐसे में संज्ञा टंडन की मोबाइल पर लगने वाली रोज की क्लास पर बात न हो तो कुछ अधूरा सा लगता है। अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए संज्ञा टंडन रोज  एक वेबसाइट पर ऑडियो के जरिए  हिंदी के दो एक समान से लगने वाले शब्दों की चर्चा करती हैं। और उनके प्रयोग को लेकर संदेहों को दूर करती हैं। सोशल मीडिया ( वाट्सअप और फेसबुक ) के जरिेए यह रोज हजारों लोग तक पहुंच रहा है और इसे काफी लोकप्रियता भी मिल रही है।

                                संज्ञा टंडन का यह प्रयोग इस मायने में एक अच्छा उदाहरण कहा जा सकता है कि आज के दौर में सोशल मीडिया के जरिए भी हिंदी को लेकर अच्छी सामग्री लोगों तक पहुंचाई जा सकती है। संज्ञा टंडन ने पहले पंचतंत्र की कहानियों को वीडियो रूपांतरण के साथ यूट्यूब के जरिए भी लोगों तक पहुंचाया था। जो खासकर बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय रहा।

पेश है इस सिलसिले में सीजीवाल के साथ संज्ञा टंडन की बातचीत के अँशः-

_20170914_172232संज्ञा टंडन कहती हैं कि आज मोबाइल पर सुबह से ही हिन्दी दिवस की शुभकामनाओं के मेसेज आ रहे हैं। साल भर अंग्रेजी को अपनी हिन्दी में लगातार स्थान देने वाले लोग आज गर्व से हिन्दी और हिन्दुस्तान से जुड़े रहने के संदेश प्रेषित कर रहे हैं।दरअसल हमारी संस्कृति में ही हिन्दी के अंदर अंग्रजी धीरे धीरे इस तरह से समाहित होती जा रही है कि हमारा हिंग्लिश का इस्तेमाल दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है, मजबूरी बनता जा रहा है। करें भी तो क्या, नई पीढ़ी के अधिकांश लोग एसएमएस भाषा के इतनी आदी हो चुके हैं कि एक पन्ना हिन्दी लिखने की बात पर भी सिहर जाते हैं और हिन्दी को भी अंग्रेजी वर्णक्षरों में हिन्दी लिखने लग जाते हैं।सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्राइमरी और नर्सरी शिक्षकों को बच्चों को हिन्दी के प्रति प्रेम और रुचि जगाने की होनी चाहिये। बच्चे ए बी सी डी की जगह अ आ इ ई पहले सीखें, अपनी राष्ट्रभाषा में दक्ष होने के बाद ही अपनी मातृभाषा और अंग्रेजी पर ध्यान दें, तब शायद हिन्दी की स्थिति 14 सिंतंबर, हिन्दी सप्ताह, हिन्दी पखवाड़े से निकलकर साल के हर दिन उपयोग में आये और सुधरे।रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर के पूर्व भाषाविज्ञान के प्रोफेसर डाॅ.रमेशचंद्र महरोत्रा ने हिन्दी के लिये काफी काम किया। उनके लिखे ‘दो शब्द‘ नामक साप्ताहिक काॅलम को ‘देशबन्धु‘ ने लगभग 15 वर्षों तक लगातार छापा, जिसमें अर्थ, वर्तनी, व्याकरण आदि में एक जैसे लगने वाले दो शब्दों में बारीक अंतर समझाया जाता था। बाद में इन शब्द युग्मों ‘मानक हिन्दी के शुद्ध प्रयोग‘ नामक पुस्तक के 4 भागों में प्रकाशित भी किया गया।

                                         हिन्दी का एक तरह का अलग शब्दकोश बन गया है ये ग्रंथ, परन्तु आज लोगों की पढ़ने में कम रुचि या हिन्दी के प्रति उदासीनता के कारण ये समृद्ध जानकारियां लोगों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।संज्ञा टंडन बताती हैं कि हिन्दी सुधारने, लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के उद्देश्य से आज की तकनीक और माध्यम का उपयोग कर इन शब्दों के अंतर में उच्चारण को भी शामिल करते हुए दो से चार मिनट के आॅडियो बनाकर निस्वार्थ भाव से व्हाट्सएप और फेसबुक पर लोगों को रोज भेज रही हैं।

                                           आमंत्रण व निमंत्रण, अफवाह व किंवदंती, अहं व अहंकार, अजीब व गरीब, अजनबी व जनाब जैसे शब्द युग्मों के बीच बारीक से अंतर को आॅडियो में सुनकर समझना बड़ा अच्छा प्रयोग और आसान लग रहा है। बहुत से अंतर तो ऐसे हैं कि बुजुर्ग भी पहली बार समझ पा रहे हैं। आज के युवा व बच्चों को हिन्दी के अनछुए पहलुओं को जानने का एक बेहतरीन माध्यम है। मोबाइल पर चलने वाली ये क्लास है हिन्दी को संरक्षण देने की एक कोशिश है।

( संज्ञा टंडन  के इस अभिनव पहल से रूबरू होने और मोबाइल पर चलने वाली उनकी हिंदी की इस क्लास से घर बैठे जुड़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक और वाट्सअप नंबर से सम्पर्क किया जा सकता है।)
वाट्सअप नम्बरः-9827150507

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