कड़ाके की ठंड से बच्चों को बचाएं…संजय ने बताया..शीतलहर से स्कूलों में उपस्थिति कम…इतनी बेरहमी ठीक नहीं

sanjay_schoolबिलासपुर— प्रदेश में शीत लहर का प्रकोप है। लोग कड़ाके की ठंड से बचने देर सुबह तक घर में दुबक गए हैं। लेकिन मासूम मजबूर बच्चे अल सुबह स्कूल जाने को मजबूर हैं। लगता है शिक्षा विभाग बिना विरोध के समय में बदलाव करने को तैयार नहीं है। यह बातें शिक्षक मोर्चा संचालक संजय शर्मा ने कही। संजय ने बताया कि सरगुजा और बस्तर संभाग में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। लेकिन शिक्षा विभाग के एसी पसंद अधिकारियों को कुछ नहीं दिखाई दे रहा है।
                संजय ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि अभिभावक मासूम बच्चों को मजबूरी में 6.30 बजे स्कूल भेज रहे हैं। यह जानते हुए भी प्रदेश में खासतौर पर बस्तर और सरगुजा संभाग भयंकर शीतलहर की चपेट में है। पारा हद से नीचे चला गया है। लेकिन प्रशासन बेखबर मासूम बच्चों की तकलीफ से अंजान बना हुआ है। प्रशासनिक फरमान के चलते प्राथमिक, माध्यमिक विद्यालय के मासूम बच्चों को ठंड में स्कूल के लिए निकल रहे है।
                छत्तीसगढ़  पंचायत / नगरीय निकाय शिक्षक संघ प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि शासन ने शालाओ को दो पाली में सुबह 7  से 11:30 और 12 से शाम 5 बजे कर दिया है। ऐसी स्थिति में सुबह 7 बजे स्कूल जाने वाले बच्चों की हालत को समझा जा सकता है। दूर के बच्चे 6.30 बजे ही घर से निकल जाते हैं।

           संजय ने बताया कि तापमान 2 डिग्री से नीच पहुंच गया है। लेकिन शासन और प्रशासन समझने को तैयार नहीं है। बच्चे लगातार शीतलहर का सामना कर रहे हैं और बीमार भी हो रहे हैं। पालक भी दिल पर पत्थर रखकर बच्चों को स्कूल भेज रहे हैं। ज्यादातर पालकों ने बच्चों को अब तो स्कूल भेजना भी बंद कर दिया है। जिसके कारण शालाओ में बच्चों की हाजिरी कम हो गयी है।  शाम को अंधेरा जल्द होने से 5 बजे घर के लिये निकलने वाले बच्चों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दूर देहात के बच्चों को जंगली हाथियों और जानवरों से डर बना रहता है।

                     संजय ने कहा कि शिक्षाकर्मियो के आंदोलन के मद्देनजर कोर्स पूरा करने के लिए  विद्यालय समय में बदलाव किया गया है। प्रशासन का निर्णय छात्र- छात्राओं को भारी पड़ रहा है। जबकि बचे हुए कोर्स को लगभग पूरा कर लिया गया है।

                                               संजय शर्मा ने स्कूल शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि ठंड को देखते हुए 50 लाख छात्रों के हित में स्कूलों के समय में परिवर्तन किया जाए।

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