सिम्स में बनेगा सिकेल सेल रिसर्च सेन्टर…डीन ने कहा…निजी चिकित्सालयों ने बनाया डम्पिंग जोन

IMG-20170913-WA0032बिलासपुर— पत्रकारों से सिम्स के डीन ने बताया कि  निजी चिकित्सालयों ने प्रदेश के सबसे अस्पताल को मरीजों का डम्पिंग जोन बनाकर रख दिया है। पहले तो मरीजों का इलाज करते हैं। जब उनकी हालत खराब होने लगती है सिम्स भेज देते हैं। तब तक मामला बिगड़ चुका होता है। यदि मरीज सिम्स में सीधे भर्ती हो परिणाम कुछ अलग ही होगा। जबकि सिम्स में स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था है। नकारात्मक खबरों के कारण लोग सिम्स नहीं आकर निजी चिकित्सालयों में जाते हैं। इससे परिजनों को ही नुकसान होता है।

                    सिम्स के डीन व्ही.एन.पात्रा ने बताया कि नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होने वाला है। नई बिल्डिंग में कालेज, कैंसर यूनिट, मल्टीस्पेशिलटी वार्ड, बर्न यूनिट और सिकल सेल रिसर्च सेन्टर खोला जाएगा।

               पात्रा ने बताया कि शासन से सिम्स में सिकल सेल सेन्टर खोलने की अनुमति मिल चुकी है। सिकल सेल प्रदेश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य जनित समस्या है। सरकार सिकल सेल उन्मूलन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसे लेकर व्यापक स्तर पर शोध किया जा रहा है। सिकल सेल के कारणों और निदानों को खोजा जा रहा है।

                             पात्रा ने कहा कि सिम्स में स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था है। नकारात्मक खबरों के कारण लोगों ने बिना सोचे समझे सिम्स के प्रति गलत धारणा बना लिया है। पात्रा ने बताया कि यहां विश्वस्तरीय सिकल सेल रिसर्च सेन्टर खोला जाएगा। मेडिकल टीम शोध करेगी। सिकल सेल उन्मूलन के लिए काम करेगी।

17 लाख लोगों पर किया रिसर्च

                       डॉ.रमणेश मूर्ति ने बताया कि डॉक्टर व्ही.एन.पात्रा ने छत्तीसगढ सरकार के निर्देश पर सिकल सेल एनिमिया पर विश्वस्तरीय अध्ययन किया है। सालों से लोगों के बीच काम करते हुए सिकल सेल एनिमिया के कारण और उन्मूलन पर शोध किया है। उन्होने सिकल सेल में 17 लाख लोगों पर रिसर्च किया। दो लाख सैम्पल  कलेक्ट किया है। रिसर्च सेन्टर बनने के बाद इसका फायदा ना केवल बिलासपुर बल्कि प्रदेश की जनता को मिलेगा। छत्तीसगढ में कुछ क्षेत्र विशेष में सिकल सेल बहुत बड़ी समस्या है। सरकार समस्या को खत्म करने के लिए लगातार काम कर रही है।

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