चीफ सेक्रेटरी ने बढ़ाया बिलासपुरियन का मान…मेधावी लेकिन संकोची थे अजय…1976 में टॉपर को मिला था मेडल

IMG20180111161201 बिलासपुर—अजय सिंह का प्रदेश का मुख्य सचिव होना बिलासपुरियन का सम्मान है। अजय सिंह को मैने कक्षा 10 वीं में पढ़ाया। शर्मिले स्वभाव के मेधावी छात्र थे। खेलकूद से बहुत लगाव नहीं था लेकि वार्षिक उत्सव जैसे कार्यक्रमों में भागीदारी करते थे। प्रश्नों का जवाब रूक कर देते थे। लेकिन जवाब सटीक होता था। उम्मीद थी कि अजय सिह जिले में जरूर नाम रोशन करेंगे..लेकिन 1976 में अविभाजित मध्यप्रदेश में 11 वीं टाप कर ना केवल कालूराम वैद्य मेडल हासिल किया बल्कि उनकी सफलता ने बिलासपुरिन प्रतिभा को प्रदेश में स्थापित किया है। यह कहना है मुख्यसचिव अजय सिंह चंदेल के रसायन शास्त्र शिक्षक अरूण कुमार सिंहा का। अजय सिंह जब मिशन स्कूल में 10 वीं पढ़ रहे थे…तब अरूण कुमार सिन्हा क्लास टीचर हुआ करते थे।

                                 प्रदेश के नौवें मुख्य सचिव अजय सिंह बनते ही बिलासपुर मुंगेली के साथ बृहस्पतिबाजार स्थित मिशन स्कूल में जश्न का माहौल है। हो भी क्यों ने स्कूल का होनहार छात्र प्रदेश का मुख्य सचिव बना है। मिशन स्कूल के बच्चों में भी अजय सिंह की उपलब्धि को लेकर अपार खुशी है। यद्यपि उन्हें नहीं मालूम कि अजय सिंह मिशन स्कूल के छात्र हुआ करते थे। लेकिन टीचरों की जुबान से सुनने के बाद बच्चों के चेहरे पर अपने स्कूल के प्रति खासतौर पर आज गुरूर जरूर देखने को मिला।IMG20180111164428

              स्कूल के प्राचार्य पी.आर.पाल ने बताया कि अजय सिंह जब मिशन स्कूल के छात्र हुआ करते थे..उस समय में स्कूल में नहीं था। स्कूल से जुड़ने के बाद अजय सिंह को पत्र पत्रिकाओं और चर्चा के दौरान जाना और समझा। इसी दौरान पता चला कि आईएएस अजय सिंह चंदेल बिलासपुरियन हैं। मिशन स्कूल में उन्होने कक्षा 6 से 11 तक पढ़ा है। उन्होने अविभाजित मध्यप्रदेश में कक्षा 11 में टाप किया। सरकार ने मेधावी छात्र को कालूराम वैद्य मेडल से सम्मानित किया। उनका परिवार राजेन्द्रनगर में रहा करता था। यद्यपि वे लोग मुंगेली जिले से हैं। लेकिन कुछ साल पहले तक मुंगेली बिलासपुर का तहसील हुआ करता था।

                      प्राचार्य ने बताया कि मिशन स्कूल में हिन्दी मीडियम में पढ़ाई होती है। अब तो हिन्दी मिडीयम स्कूल को कोई भी अभिभावक पसंद नहीं करता है। लेकिन एक बार फिर साल 1976 की तरह 2018 में अजय सिंह ने मिशन स्कूल का नाम रोशन किया है। पाल ने सीजी वाल को अजय सिंह का दाखिला रजिस्टर भी दिखाया। उन्होेने बताया कि अजय सिंह का जन्म पथरिया के बेलखुरी गांव में 12 फरवरी 1960 में हुआ। अजय सिंह तीन भाइयों में पिता फत्ते नारायण चंदेल के मझले संतान हैं। मिशन स्कूल में उनका दाखिला 6 कक्षा में 25 जून 1970 को हुआ। साल1976 में ग्यारहवीं टाप करने के बाद स्कूल का नाम रोशन कर बाहर पढ़ने चले गए।

                        मिशन स्कूल के प्राचार्य पाल ने बताया कि हम उन्हें स्कूल आमंत्रित कर सम्मानित करेंगे। स्कूल आने पर बच्चों का उत्साह बढ़ेगा। हो सकता है कि उनके दिशा निर्देश में फिर एक कोई अजय सिंह भविष्य में मिशन स्कूल का नाम रोशन करे।

मेधावी लेकिन बहुत संकोची थे..अरूण कुमार सिन्हा (केमेस्ट्री शिक्षक)

                      अरूण कुमार सिन्हा  ने बताया कि मेरी अजय सिंह से पहली मुलाकात दसवीं में हुई। मैं उनका केमेस्ट्री टीचर हुआ करता था। बहुत शांत और संकोची स्वभाव के थे अजय सिंह चंदेल। हर प्रश्न का जवाब दिया करते थे…लेकिन रूककर..किसी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करते थे। लेकिन प्रश्नों का उत्तर पाइंट टू पाइंट हुआ करता था। खेल गतिविधियों में बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन सालाना कल्चरल कार्यक्रम में शामिल हुआ करते थे। उन्होने साल 1976 में मिशन स्कूल का नाम रोशन किया। 1983 में आईएएस टापर बनें। स्कूलिंग के समय ही सभी शिक्षकों को भरोसा था कि वह बिलासपुर का नाम रोशन करेंगे। अब तो प्रदेश प्रमुख सचिव बन गए हैं। मुझे लगता है कि यह पद केवल अजय सिंह के लिए ही नहीं बल्कि बिलासपुरियन प्रतिभा का भी सम्मान है। उनसे जरूर मिलने का प्रयास करूंगा।ajay_singh_new

फिर किया बिलासपुर और मिशन स्कूल को गौरवान्वित–मैथ्यू..(गणित शिक्षक)

            मिशन स्कूल में  गणित के शिक्षक रह चुके मैथ्यू ने बताया कि अजय सिंह मेधावी छात्र थे…मिशन स्कूल का संस्कार उनके साथ जीवन भर रहा। आज भी बेदाग छवि के अधिकारी के रूप में उनकी गिनती होती है। मेरी पहली मुलाकात कक्षा 9 वीं में हुई। शांत गंभीर स्वभाव के अजय सिह सामान्य बच्चों की तरह थे। लेकिन पढ़ाई लिखाई में बहुत तेज थे। सभी विषय के टेस्ट में प्रथम स्थान पर होते थे। टापर रहना उनके स्वभाव में था। बावजूद इसके अन्य बच्चों के साथ रहकर भी वह अलग थे। उन्होने मिशन स्कूल,मिशन के शिक्षक और बिलासपुर का सम्मान बढ़ाया है। उन्होने बताया कि मैं जरूर मिलना चाहूंगा। क्योंकि किसी शिक्षक के जीवन में अजय सिंह चंदेल जैसा शिष्य मिलना गर्व की बात है।

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