कौन बनेगा अतिरिक्त तहसीलदार..? शासन के सभी अधिकारी निकले अयोग्य..! आखिर किसे लाने की हो रही तैयारी…

बिलासपुर– शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने तहसीलदारों की नियुक्ति आदेश जारी कर दिया है। आदेश जारी होने के बाद तहसीलदारों में खलबली मच गयी है। तुलाराम को मस्तूरी की जगह बिलासपुर में देख लोग अचरज में पड़ गए हैं। पी.के.गुप्ता का मस्तूरी मोह किसी के गले से नहीं उतर रहा है। सूत्रों की मानें तो पी.के.गुप्ता समेत स्थानांरित होकर आए तहसीलदारों में कोई भी काबिल नहीं था। जिसके कारण कलेक्टर ने जारी आदेश में बिलासपुर अतिरिक्त तहसीलदार की कुर्सी को खाली छोड़ दिया है।

                        कलेक्टर ने शासन से आदेश जारी होने के बाद तहसीलदारों में तहसील का बंटवारा कर दिया है। आदेश में अतिरिक्त तहसीदार की कुर्सी को खाली रखा गया है। ऐसा लगता है कि जिला प्रशासन किसी विशेष को अतिरिक्त तहसीलदार की जिम्मेदारी देना चाहता है।

                      मालूम हो कि स्थानांतरित होने से पहले नारायण प्रसाद गभेल बिलासपुर में अतिरिक्त तहसीलदार थे। मुगेली जाने के बाद कयास लगाया जा रहा था कि कोई नया काबिल तहसीलदार नारायण गभेल की कुर्सी को संभालेंगा। लेकिन कलेक्टर की सूची में किसी भी तहसीलदार को अतिरिक्त तहसीलदार के काबिल नहीं समझा गया है। मतलब साफ है कि अब बिलासपुर तहसील को बिना अतिरिक्त तहसीलदार के रहना होगा। या फिर कुछ दिनों तक अतिरिक्त तहसीलदार का इंतजार करना होगा। जाहिर सी बात है कि नए तहसीलदार पर काम का दबाव भी बढ़ेगा।

                                             सूत्रों की माने तो सूची बनाने में जिला प्रशासन को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। पूर्व अतिरिक्त तहसीलदार का क्षेत्र मोपका लिंगियाडीह,चिल्हाटी काफी विवादास्पद रहा है। जब तब इन क्षेत्रों में अवैध प्लाटिंग,सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायत मिलती रही है। शायद इन्ही बातों को ध्यान में रखकर कलेक्टर ने अतिरिक्त तहसीलदार की कुर्सी को खाली रखा है। लेकिन लोगों के गले से बात नहीं उतर रही है। शासन ने तुलाराम का स्थानान्तरण कोरबा से मस्तूरी किया था। लेकिन मस्तूरी के वजाय बिलासपुर तहसीलदार की जिम्मेदारी दी गयी है। जबकि यहां पी.के.गुप्ता को होना था। किस्मत देखिये कि पी.के.गुप्ता को मस्तूरी तहसील से निकलने नहीं दिया गया।

                             जाहिर सी बात है कि लोग इस उलटफेर को काफी गंभीरता से ले रहे हैं। कई लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि दाल में कुछ है। मोपका लिंगियाडीह और चिल्हाटी के विवादों से बचने के लिए ही अतिरिक्त तहसीलदार की कुर्सी को खाली रखा गया है। यदि नारायण गभेल को फिर से अतिरिक्त तहसीलदार के पद पर बैठा दिया जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। लेकिन इसकी फिलहाल संभावना कम है। क्योंकि नारायण गभेल का स्थानांतरण मुंगेली हो चुका है। कलेक्टर ने एक तरफा रीलिव भी कर दिया है। फिर भी लौट आए तो कोई आश्यर्च नहीं होगा। क्योंकि बिलासपुर जिला प्रशासन का उलट बासी करने का अपना अलग रिकार्ड रहा है।

                                     सूत्रों की माने तो मोपका लिंगियाडीह और चिल्हाटी बिलासपुर शहर का काफी राजस्व देने वाला क्षेत्र है। इसे शहर का इकोनामी जोन भी कहा जाता है। पटवारी और तहसीलदार के लिए यह क्षेत्र किसी कुबेर के खजाने से कम नहीं है । और विवादों का केन्द्र भी है।  यदि किसी नये तहसीलदार को अतिरिक्त की कुर्सी पर बैठाया जाता है तो बंटाधार होना निश्चित है। कुल मिलाकर जिला प्रशासन के आदेश में गुुढ़ रहस्य छिपा हुआ है। शायद किसी को बचाने या फिर किसी को लाने की कोशिश की जा रही है।

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