कोयला मजदूर नेता रमेन्द्र के कड़वे बोल…विरोधियों को नहीं लेने देंगे चैन की नींद..एसईसीएल के सामने दिया धरना

बिलासपुर–संयुक्त कोयला मजदूर संघ एटक के बैनर तले मजदूरों ने एसईसीएल मुख्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया। संगठन नेताओं के साथ कोयला मजदूरों ने केन्द्र सरकार और प्रबंधन पर कमर्शियल माइनिंग एक्ट को वापस लेने का दबाव बनाया। सार्वजनिक क्षेत्र का विनिवेश बंद करने का विरोध भी किया। इस दौरान मजदूरों ने मांगो को लेकर एसईसील के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
                             संयुक्त कोयला मजदूर संघ के बैनर तले एसईसीएल के मजदूरों ने गेट के सामने धरना प्रदर्शन किया । इस दौरान नेताओं और मजदूरों ने जमकर नारेबाजी भी की। मजदूर नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केन्द्र सरकार 2 करोड़ रोजगार देने में असफल हो गयी है। कहां बोला गया था कि 100 दिनों में महंगाई कम हो जाएगी। लेकिन हालात अब बद से बदतर हो गए हैं। विदेश निवेश में कमी आयी है। कार्पोरेट घरानों को धन लुटाया जा रहा है।
                 एटक के राष्ट्रीय अद्यक्ष रमेन्द्र कुमार ने कहा कि सरकार सोची समझी रणनीति के तहत मजदूरों को बाहर निकालने का रास्ता तैयार कर लिया है। सरकार ने निश्चित अवधि के लिए रोजगार देने का कानून बनाया है। नए कानून के अनुसार मजदूर अब स्थायी और नियमित काम पर नहीं रखे जाएंगे। रमेन्द्र ने बताया कि 19 सार्वजनिक बैंकों में से 17 बैंकों का घाटा 80 हजार करोड़ के ऊपर पहुंच गया है। अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटा जा रहा है। सरकार के खिलाफ बोलने वालों की जुबान जबरदस्ती बंंद किया जा रहा है।
     रमेन्द्र ने कहा कि कोयला खदान में कमर्शियल माइनिंग का फैसला कोयला उद्योग को बरबाद करने वाला है। इससे ना केवल काला धन पैदा होगा बल्कि मजदूरों का शोषण भी होगा। कामरेड ने बताया कि कोयला उद्योग में ठेका मजदूरों का बड़े पैमाने पर शोषण किया जा रहा है। प्रबंधन और ठेकेदार की जुगलबंदी से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। खदान में मजदूरों की भर्ती बंद है। लेकिन उत्पादन लक्ष्य दिनों दिन बढ़ाया जा रहा है। मजदूरों की जिन्दगी खतरे में है।
             मजदूर नेता हरिद्वार सिंह ने बताया कि एटक मजदूरों की लड़ाई अंत तक लड़ेगा। 9 अगस्त को इतिहास में क्रांति दिवस के रूप में जाना जाता है। आज देश के कोयला मजदूर एक साथ आंदोलन पर हैं। मजदर हितों के खिलाफ नियम और कायदे बनाने वाले प्रबंधन और सरकार चैन की नींद नहीं लेने देंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *