कानून से ऊपर कोई नहीं..IG दीपांशु ने कहा…सच हुआ माता पिता का सपना…वर्दी पहने इंसान में भी इमोशन हैं

बिलासपुर– मेरा जन्म नागपुर में हुआ। हम चार भाई बहन हैं। बडे भाई घर में रहते हैं। एक बहन रायपुर में और दूसरी बिलासपुर में रहती है। बीई करने तक आईपीएस या सिविल सर्विसेज की बहुत अधिक जानकारी नहीं थी। यहां तक कि मेरे  माता पिता को भी सिविल सर्विसेज का बहुत अधिक ज्ञान नहीं था कि इसके लिए क्या करना होगा। लेकिन साल 1997 में माता पिता का सपना पूरा हुआ। मुझे भी आईपीएस बनकर खुशी हुई। यह बातें  बिलासपुर आईजी दीपांशु काबरा ने प्रेस क्लब के पहुना कार्यक्रम में पत्रकारों से कही।

                        आईजी दीपांशु काबरा ने प्रेस क्लब के पहुना कार्यक्रम में पत्रकारों से अपने जीवन से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी। इस दौरान उन्होने सवालों का जवाब स्पष्ट दिया। उन्होने बताया कि पिता बी.बी.काबरा माइनिंग इंजीनियर थे। उन्होने डब्लूसीएल को सेवाएं दी। देश के कोने-कोने में उन्हें काम करने का अवसर मिला। उन्होने बिलासपुर समेत अविभाज्य मध्यप्रदेश के छत्तीसगढ़ में कई जिलों में सेवाएं दी। मेरा जन्मस्थान नागपुर है। हम चार भाई बहन हैं। बड़े भाई इस समय घर में मतलब नागपुर में रहते हैं। दो बहने छत्तीसगढ़ में हैं। एक रायपुर में रहती है तो दूसरी बिलासपुर में। बहन डाक्टर भी है।

            माता पिता ने मेरे लिए बचपन से ही सिविल सर्विस का सपना देख रखा था। यद्यपि सिविल सर्विस के लिए करना क्या होता उन्हें बहुत अधिक जानकारी नहीं थी। सातवीं तक मेरा रैंक कमजोर था। इसकी मुख्य मेरी ड्राइंग ठीक नहीं थी। इसके बाद रैंक भी सुधरा और दिशा भी। नागपुर स्थित एनआईटी से केमिकल इंजीनियर की डिग्री लिया। इसके बाद दिल्ली चला गया। दोस्तों के साथ सिविल सर्विस की तैयारी शुरू की। अनुभवी दोस्तों के साथ तैयारी करते हुए मुझे 1997 में आईपीएस के लिए चुना गया। 85 वां रैंक हासिल किया। कैडर मध्यप्रदेश मिला।

                      दीपांशु काबरा ने बताया कि प्रीलिम्स लोकप्रशासन से निकाला। मेन्स में अनुभवी दोस्त के मार्गदर्शन में जियोग्राफी की तैयारी की। इन्टरव्यू दिया और आईपीएस बन गया। काबरा ने बताया कि जनता की सेवा का दूसरा नाम है। हमारा काम कानून व्यवस्था को ना केवल बनाना बल्कि जनता के हितों में ही काम करना है।

               आईजी काबरा ने जानकारी दी कि पहली पोस्टिंग भोपाल में हुई। तात्कालीन गृहमत्री नन्दकुमार पटेल ने मुझे विशेष रूचि को देखते हुए भाटापारा एसडीओपी बनाकर भेजा। राज्य बनने के बाद मुझे पहले गवर्नर का एडीएसी बनने का मौका मिला। इसके बाद रायपुर एडिश्नल एसपी बना। इसके बाद क्रमिक रूप से मुझे बीजापुर,धमतरी,महासमुन्द,रायगढ़,दुर्ग और रायपुर में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी मिली। आईजी ने बताया कि डीआईजी के अलावा नक्सल आईजी बनकर सेवा करने का अवसर मिला। सरगुजा संभाग का आईजी और अब बिलासपुर आईजी बनकर सेवा कर रहा हूं।

                             इस दौरान आईजी ने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया। उन्होने कहा कि यह गलत है कि पुलिस की दोस्ती और दुश्मनी दोनो खतरनाक है। इसे कुछ इस तरह से समझा जाए कि दोस्ती तो ठीक है लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं है। क्योंकि कानून दोस्त और दुश्मन के लिए बराबर होता है। उन्होने बताया कि पुलिस के पास बहुत काम और जिम्मेदारियां हैं। मुझे खुशी है कि बिलासपुर में कोई भी देशद्रोही यानि एनएसए का मामला नहीं आया। लेकिन इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि आईजी रहते हुए अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। हवाला और भ्रष्टाचार के सवाल पर दीपांशु काबरा ने कहा कि कोई कितना भी बड़ा क्यों ना हो दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।

                यातायात व्यवस्था पर आईजी ने कहा कि बिलासपुर की ट्रैफिक में सुधार हुआ है। लेकिन इंंजीनियरिंग क्षेत्र में आमूल चूल परिवर्तन किया जाना जरूरी है। ताकि किसी को किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। रायपुर आने जाने का एक ही रास्ता है। जाहिर सी बात है कि व्यवस्था करने में थोड़ी परेशानी होती है। लेकिन प्रयास किया जाएगा कि व्हीआईपी के आने पर किसी को कष्ट या परेशानी ना हो।  अंत आईजी ने कहा कि पुलिसिंग कुछ ऐसी हो कि जनता को परेशानी भी ना हो दोषियों को सजा भी मिले। उन्होने जोर देकर कहा कि पुलिस भी इंसान है। जाहिर सी बात है कि उसके भी इमोशन है। मैने हमेशा इस बात को लेकर जनता से संवाद किया। परिणाम भी अच्छा आया।

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