कर्मचारियों की मांग पूरी नहीं हुई तो सरकार को चुनाव में भुगतना पड़ेगा परिणाम-तिवारी

रामानुजगंज(पृथ्वीलाल केशरी) छत्तीसगढ़ सरकार की कैबिनेट बैठक में कर्मचारियों की अनदेखी से कर्मचारी संघों में काफी नाराजगी है। सरकार कर्मचारियों को आंदोलन के लिये बाध्य कर रही है। कर्मचारियों के पास उग्र आंदोलन के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नही दिख रहा है। उक्त बातें छग प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष रमेश तिवारी ने कही।
रमेश तिवारी ने बताया कि कर्मचारी वर्ग आशान्वित थे कि केबिनेट की बैठक मॆ कर्मचारी हितैषी निर्णय लिये जायेंगे। जिसमें लिपिक वेतन विसंगति दूर करने, चार स्तरीय पदोन्नति वेतनमान,सातवें वेतन का एरियर्स,मंहगाई भत्ता एवं गृह भाडा भत्ता पुनरीक्षित करने,अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण व अन्य माँग प्रमुख हैं। तिवारी ने बताया कि कैबिनेट की बैठक के पूर्व छग प्रदेश लिपिक वर्गीय शास कर्म संघ ने पाँच चरणों मे अबतक आंदोलन कर चुकी हैं।
छत्तीसगढ़ विकास यात्रा के दौरान बलरामपुर के साथ ही कई जिलों में मुख्यमंत्री से मुलाकात करके लिपिक हितैषी माँगो के निराकरण हेतु ध्यान आकृष्ट कराया गया था। यदि 15 अगस्त तक लिपिकों की मांगो पर सरकार सकारात्मक पहल नही करती हैं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन का शंखनाद  पूरे प्रदेश भर के लिपिक कार्यालयों में तालाबन्दी करके,काम काज ठप्प करेंगे। छत्तीसगढ़ सरकार को अपने किये गये वादे भी आज याद नही रहे।
उनकी वादाखिलाफी का ही परिणाम है कि आज हर शासकिय वर्ग आंदोलन की राह पर है,बावजूद उसके सरकार उनकी माँगो को नजरअंदाज कर रही है। सरकार को कर्मचारियों के आक्रोश का सामना आगामी चुनाव में भुगतना पड़ सकता है

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