MP के अध्यापकों में भारी असंतोष..नरवरिया बोले-CM की घोषणा के विपरित हुआ राजपत्र प्रकाशन

भोपाल।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने 21 जनवरी को सीएम हाउस में मध्यप्रदेश के अध्यापक नेताओ और अध्यापकों की मौजूदगी में आयोजित एक कार्यक्रम में संविदा कर्मी अध्यापकों  संविलियन की घोषणा की थी।उसके बाद 29 मई को कैबिनेट ने इस पर फैसला लिया गया और संक्षेपिक जारी की गई। उसके बाद से अध्यापकों के संगठन संविलियन के आदेश जारी करने के लिए आंदोलन के जरिये सरकार पर दबाव बना रहे थे। आखिरकर सोमवार को अध्यापकों की सेवा शर्ते सहित बहुत से नियम का राजपत्र में प्रकाशन हो गया।जिस पर शिक्षक को कई विषयों को लेकर आपत्ति है।

अध्यापक संघर्ष समिति मध्यप्रदेश के स्टेट मीडिया इंचार्च हीरानंद नरवरिया ने cgwall.com बताया कि मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा शिक्षक संवर्ग से संबंधित सेवा शर्तें एवं भर्ती नियम को राजपत्र में देखकर अध्यापक वर्ग नाखुश हुआ । प्रदेश के अध्यपक शिक्षा विभाग में संविलियन की आस को लेकर पिछले दो दशक से ज्यादा समय से अल्प वेतन पर शिक्षा का अलख जगा रहे थे।

हीरानंद नरवरिया ने बताया कि शिक्षाकर्मी अर्थात आज के अध्यापको के लिए मध्यप्रदेश सरकार का राजपत्र खुशियां लेकर नही आया है।जिन विसंगतियों का डर था वही हुआ है। संक्षेपिक के प्रकाशन के बाद मध्य प्रदेश के कई शिक्षक संघों ने विरोध दर्ज किया जिसे नज़र अंदाज़ कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के करीब तीन लाख अध्यापक बीस पच्चीस साल से शिक्षा विभाग में संविलियन ओर समान कार्य समान वेतनमान की मांग कर रहे है किंतु सरकार द्वारा हर बार छले जाते रहे है। 2007 में भी सरकार द्वारा कर्मी कल्चर खत्म कर शिक्षा विभाग में संविलियन करने की बजाय अध्यापक सवर्ग रूपी नया विभाग लाकर थमा दिया गया। एक जनवरी 2016 से प्रदेश के अध्यापको को छटा वेतनमान भी विसंगतियों से भरा तब मिला जब मध्यप्रदेश के नियमित शिक्षको को सातवा वेतनमान इस दिनांक से मिला है।

आज जारी हुए राज्यपाल के नाम राजपत्र में अध्यापको को शिक्षा विभाग में संविलियन तो नही मिला अपितु राज्य स्कूल शिक्षा सेवा नामक नया विभाग जरूर मिल गया है।

उन्होंने बताया कि अब सवाल यह है कि क्या 2007 में जिस तरह से शिक्षाकर्मियों की नो साल की सेवा अवधि खत्म कर गणना कर अध्यापक बनाया गया था उसी प्रकार क्या अब प्राथमिक माध्यमिक ओर उच्च माध्यमिक शिक्षक बनाने हेतू शिक्षाकर्मियों अर्थात अध्यापको की बीस बाईस साल की सेवा को फिर शून्य कर जुलाई 2018 से गणना की जावेगी?
उन्होंने बताया कि आखिर सरकार और उनकी नोकरशाही कब तक अध्यापक संवर्ग के साथ शोषण का खेल खेलती रहेगी ?

जनता के बीच सरकार के मुख्यमंत्री महोदय शिक्षा विभाग में संविलयन कर नियमित शिक्षक की तरह ही अध्यापको को शिक्षक बनाने का वादा करते है। किन्तु राजपत्र का मुख्यमंत्री जी के वादे के विपरीत आना बहुत ही दुःखद है। राजपत्र के जारी होने से यह खुशी है कि अब प्रदेश में कोई सविदा शिक्षक के पद पर भर्ती नही होगी लेकिन जिन तीन लाख शिक्षाकर्मी रूपी अध्यापको ने अल्प वेतन पर दो दशक से ज्यादा समय शिक्षा के अलख जगाने में बीता दिया उनकी पीड़ा को क्या शासन प्रशासन कभी समझ भी पायेगा या नही ?

Comments

  1. By subhash ambulker

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