नई तकनीकों से दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंचाई जा सकती हैं, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं-डॉ. रमन सिंह

रायपुर-मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में खोजी जा रही नई तकनीकों के प्रयोग से राज्य के दूरस्थ अंचलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, टेलीमेडीसिन, बायोसेंसर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल इसके लिए किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नवाचारों के जरिए मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर और कुपोषण में कमी लाने के लिए कार्य योजना बनाकर कार्य किया गया, जिसके बेहतर नतीजे मिले। डॉ. सिंह आज यहां स्वास्थ्य विभाग और स्टेनफोर्ड बायो डिजाइन इन इंडिया फाउंडर्स फोरम द्वारा आयोजित एक दिवसीय ’मेडिटेक इनोवेशन समिट’ के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। कार्यशाला में डॉ. सिंह ने ’हेल्थ टेक्नॉलाजी इनोवेशन इन द इंडियन कांटेक्स्ट’ शीर्षक से प्रकाशित पुस्तिका का विमोचन किया और अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को मैं एक स्टार्ट अप राज्य के रूप में देखता हूं। राज्य में मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर कुपोषण एक बड़ी चुनौती के रूप में हमारे सामने थी। इन सूचकांकों में सुधार के लिए प्रदेश में अनेक नवाचारों के जरिए कार्ययोजना बनाकर कार्य किया गया और बड़ी सफलता हासिल की। प्रदेश में पिछले 18 वर्षों में स्वास्थ्य सहित कई क्षेत्रों में नए प्रयोग किए गए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नई तकनीक का उपयोग स्वास्थ्य के क्षेत्र में करने के लिए स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ वर्ष 2016 में एम.ओ.यू. हुआ। इस कार्यशाला में स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई तकनीकों के माध्यम से अस्पतालों और चिकित्सकों को आपस में जोड़कर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, टेलिमेडिसिन, बायोसेंसर जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर चर्चा होगी और सस्ती स्वास्थ्य तकनीकों के उपयोग पर विचार होगा।

 कार्यशाला में मुख्य सचिव अजय सिंह, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव अमन कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग की सचिव  निहारिका बारीक सिंह, स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के इंडिया बायोडिजाइन प्रोग्राम के सह संचालक डॉ. राजीव दोशी और डॉ. अनुराग मायरल, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, और गुजरात, महाराष्ट्र सहित छह राज्यों के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, देश विदेश के इनोवेटर्स, चिकित्सक, यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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