शिक्षाकर्मियों के संविलयन के लिए दो दिन का शिविर शुरू: हर एक शिक्षाकर्मी को शामिल होना जरूरी

रायपुर। 14 व 15 जूलाई को प्रदेश में शिक्षाकर्मीयो के संविलियन शिविर आयोजित होने है।जिसमे करीब एक लाख तीन हजार शिक्षाकर्मीयो का संविलियन होना है। आज से ये मान लिया जायेगा कि अब ये शिक्षाकर्मी पंचायत विभाग को अलविदा कह कर शिक्षा विभाग से सम्बंधित राज्य शासन के नियमित कर्मचारी हो गए है। और अब ये शिक्षा कर्मी से शिक्षक LB बन गए है।संविलियन के इस महाअभियान को संपादित करने के लिए शिक्षा विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जिसकी तैयारियां व्यापक स्तर पर की जा रही है। मंत्रलाय से जारी आदेशो में कई जगहों पर जनपद सीईओ, एसडीएम तहसीलदार, नायब तहसीलदारो संवलियन शिविर में महत्वपूर्ण प्रभार दिए गए है। वही कई कम्प्यूटर ऑपरेटरों बाबुओं और शिक्षको की भी इस कार्य मे शामिल किया गया है।

विभाग के एक आदेश के मुताबिक उसमे स्पस्ट कहा गया है। कि इस संविलियन प्रक्रिया में जो शिक्षा कर्मी पात्र है। उंन्हे संविलियन शिविर में उपस्थित रहना अनिवार्य है।अनुपस्थित पाए जाने पर जिम्मेदारी उस शिक्षाकर्मी की ही स्वयं की होगी।

आदेश में यह भी कहा गया है कि संबंधित सभी शिक्षको को एम्प्लाई डाटा फार्म व महत्वपूर्ण दस्तावेजो सहित निर्धारित तिथि व संकुल स्तर पर आदेशित स्थल पर पहुँचने को कहा गया है।शिविर प्रातः 9:30 से ब्लाक मुख्यालय स्तर पर होना है।

सोशल मीडिया में मिल रही जानाकरी के मुताबिक कुछ स्कुलो के प्राचार्यो, प्रधानपाठकों ने शिक्षाकर्मीयो को पहले स्कूल में हाजरी देने को कहा है। उसके बाद संविलियन शिविर में जाने के ऐसे निर्देष भी दिए गए है। जिसे शिक्षा कर्मी नेताओ ने गंभीरता पूर्वक लिया है।

इस विषय पर प्रतिक्रिया करते हुए संयुक्त शिक्षा कर्मी संघ के प्रदेश अध्यक्ष केदार जैन ने बताया कि संविलियन शिविर शासन स्तर का महत्वपूर्ण कार्य है। इसमें जो भी शामिल होगा वो आन डियूटी ही रहेगा। ऐसे में कुछ स्कूल के प्रचार्यो व प्रधान पाठको को ये बात समझ नही आ रही है।
उन्होंने बताया कि प्रचार्यो व प्रधान पाठको ने मनमानी का ये पहला मामला नही है।और हमारा संयुक्त शिक्षा कर्मी संघ ऐसे तुगलगी आदेशों का विरोध करता रहा है, और करते रहेगा। मैं अपने सभी जिला अध्यक्षों से इस सम्बंध में जानकारी एकत्र कर प्रदेश के शिक्षा सचिव से मुलाकात कर शिकायत करूँगा।

इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए विकास सिंह राजपूत ने बताया कि कुछ स्कूलो के प्राचार्य और प्रधान पाठक शिक्षा कर्मीयो के ऊपर बेवजह के नियम कानून थोपते है। संविलियन शिविर में जाने से पहले अगर कोई भी प्राचार्य और प्रधान पाठक अगर स्कूल में पहले उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए कहते है तो ये नियम विपरीत है। क्योकि आदेश मंत्रालय से मिले है। सुबह 9:30 बजे शिविर स्थल पहुँचना है ऐसे स्कूल जाना शिक्षक के लिए अव्यवहारिक होगा।

अगर वाकई में प्राचार्य और प्रधान पाठको की ओर से दिए गए ऐसे आदेशो का नवीन शिक्षाकर्मी संघ विरोध करता है। और ऐसे मामले अगर संघ के संज्ञान में आते है तो उसकी शिकायत उच्च स्तर पर की जाएगी। और कार्यवाही के लिए दवाब बनाया जाएगा।

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