शिक्षा कर्मियों की खुली स्थानांतरण नीति का स्वागत: महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद

रायपुर।प्रदेश केबिनेट के निर्णय के बाद शिक्षकर्मीयो के संविलियन की कागजी प्रक्रियाएं अंतिम चरण में है।14 औऱ 15 जुलाई को शिक्षा कर्मीयो के दस्तावेज की प्रक्रिया पूर्ण होते ही 1लाख तीन हजार शिक्षा कर्मी पंचायत विभाग से अलग हो जायेगें। और राज्य सरकार के कर्मचारी बन जाएंगे। और इन्हें वेतन,भत्ते सहित अन्य सुविधाएं इन्हें मिलने लगेगी। जिसमे 23 साल से लंबित सबसे महत्वपूर्ण मांग स्थानान्तरण भी रही है।हालाकि बीच बीच में स्थानान्तरण बनाई गई पर पंचायत विभाग की इस नीति में बहुत से पेंच थे।जिसकी वजह से ये सफल नही हो पाई कुछ विशेष लोगो का ही ट्रांसफर हुआ है।

इस विषय को लेकर शिक्षक मोर्चा अपने नव सूत्रीय मांगों में खुली स्थानान्तरण नीति की माँग भी रखी थी साथ कि शिक्षक एकता मंच के एजेंडे में खुली स्थानान्तरण नीति प्रमुख माँग थी।स्थानान्तरण नीति पर शुरू से इस माँग का खुल कर पक्ष रख रही महिला शिक्षा कर्मी नेताओं ने इसे सकारत्मक कदम बताया और कहा कि प्रदेश में अब संविलियन होने के बाद नए LB संवर्ग के शिक्षको को स्थानान्तरण नीति का लाभ मिलेगा।

वहीं मोर्चा से जुडी हुई महिला शिक्षा कर्मी नेता गंगा पासी ने बताया कि 23 कमेटियां औऱ 23 साल से एक आम शिक्षाकर्मी खुली स्थानांतरण नीति की राह देख रहा था। संघ की कई बैठकों में इस विषय को लेकर कई बार चर्चा हुई कई बार विभाग के अधिकारियों से चर्चा के दौरान इस विषय को उठाया गया। संघ की बैठक हो, विभाग कोई प्रशिक्षण कार्यक्रम हो या फिर कोई और मौके हो जब भी महिला शिक्षा कर्मीयो से मुलाकात होती तो कोई न कोई पेचीदा स्थानांतरण नीति पर बात करते हुए अपना दर्द जाहिर जरूर जरूर करता था।

गंगा पासी ने बताया कि छत्तीशगढ़ शिक्षक पंचायत व नगरीय निकाय मोर्चा की 9 सूत्री मांगों में एक प्रमुख भाग खुली स्थानांतरण नीति भी थी जो कि पूरी भी हुई है। संविलियन नीति में खुली स्थानान्तरण नीति लेकर आना राज्य सरकार का स्वागत योग्य कदम है।जिसका खास कर प्रदेश की महिला शिक्षाकर्मी स्वागत करते है। और उमीद करते है सरकार कम से कम स्थानान्तरण के मामले में नारी शक्ति को महत्व देगी।

सँयुक्त शिक्षाकर्मी संघ की प्रदेश महिला उपाध्यक्ष माया सिंह ने बताया कि सामाजिक रीति रिवाजों के अनुसार महिलाओं को विवाह के उपरान्त अपने पति के घर जाना पड़ता है। प्रदेश की महिला शिक्षाकर्मी जो विवाह के पूर्व शिक्षाकर्मी बने थे। रोजगार की वजह से उनके साथ ये सामाजिक रीति रिवाज पूर्ण नही हो सके। महिला शिक्षाकर्मी मायके में अधिक और ससुराल में कम वक्त दे रही है।जिसकी वजह से कुछ परिवार में अलगाव आ गया है।

माया ने बताया कि इस आत्मनिर्भरता के दौर में इस शिक्षा कर्मी की नॉकरी को त्यागना अपने कुशल हाथो को त्यागने जैसा है। कई महिला शिक्षा कर्मीयो ने कई सालों की शिक्षा कर्मी की नोकरी को पति पत्नी दोनों के अलग अलग क्षेत्र में रहने की वजह से बिखरते हुए परिवार को जोड़ने के लिए अपना त्याग पत्र दे दिया। आज वो अफ़सोस कर रहे होंगे।

उन्होंने ने बताया कि खुली स्थान्तरण नीति पहले अगर आ जाती तो कुछ परिवार बिखरने से बच जाते। देर आये दुरुस्त आये खुले दिल से इस खुली स्थानान्तरण नीति का स्वागत करते है।और उम्मीद करते है कि महिला शिक्षाकर्मीयो को इस व्यवस्था में प्रमुखता दी जायेगी।

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