PHOTO:बैगा आदिवासियों तक नहीं पहुंच पा रही योजनाएं..बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र

लोरमी(योगेश मौर्य)।बैगा आदिवासी जिन्हें राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र कहा जाता है ।  जिनके विकास के लिए शासन द्वारा बहुत सारी योजनाएं चलाई जाती है ।  लेकिन अधिकारियो और जनप्रतिनिधियो की लापरवाही के कारण उन तक वो योजनाये नही पहुच पाती और जो योजनाएं पहुचती है वो भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है ।  ऐसा ही मामला मुंगेली जिले के लोरमी ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बांकल, बोकराकछार और साम्भरधसान का है ।  जिन्हें अचानकमार टाइगर रिजर्व के जंगलों से लेकर विस्थापित किया गया ।  लेकिन उन्हें जो मुलभुत सुविधा मिलनी थी उससे वो वंचित हो रहे है।

बैगा आदिवासी जो कि अक्सर जंगलो में रहना पसंद करते है और जंगलो में ही अपना जीवन यापन करते है जिनके विकास के लिए शासन के द्वारा योजनाएं लागू की जाती है  ।   ताकि उन योजनाओं का लाभ उन्हें मिल सके। लेकिन जनप्रतिनिधियो और अधिकारियो की लापरवाही के कारण अधिकतर योजनाओं से उन्हें वंचित होना पड़ता है।

ऐसा ही मामला मुंगेली जिले के लोरमी ब्लॉक का है  । जहाँ उन आदिवासियों को योजना का लाभ तो दिया गया ।  लेकिन उस योजना में जमकर भ्रष्टाचार भी किया गया। बता दें कि मुंगेली जिले में अचानकमार टाइगर रिजर्व है ।  जहाँ जंगली जानवरों की संख्या धीरे धीरे बढ़ती जा रही है ।  जिसके कारण जंगलो में रहने वाले आदिवासियों को दूसरी जगह विस्थापित किया गया है।लेकिन विस्थापन के बाद उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। पूरा मामला ग्राम पंचायत कारिडोंगरी का है  …। जहाँ बैगाओं को विस्थापित कर तीन गावों में बसाया गया है ।  जहाँ सैकड़ो परिवार निवास करते है ।  वहीं सरपंच के द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का निर्माण कराया गया , जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया ।  साथ ही वहां के 9 परिवारों को जीवकोपार्जन के लिए सुअर पालने के लिए शेड बनवाया गया ।  जिसमे सरपंच द्वारा जमकर भ्रष्टाचार किया गया।

वहीं बैगा आदिवासी रामसिंह (बैगा ग्रामीण) ने बताया कि जो शौचालय बना है।  वो काफी खराब है और शेड का निर्माण कराया गया वो भी गुणवत्ताहीन बनवाया गया है।बैगा आदिवासियों के विकास की योजना का ठीक तरीके से क्रियान्वयन हो रहा है कि नही उसकी मॉनिटरिंग भी की जाती जिसमे जिले के कलेक्टर भी गांव का दौरा करते है ।  जब मुंगेली जिले के कलेक्टर ने उन तीनों विस्थापित गांव का दौरा किया तो उनसे आदिवासियों ने अपनी समस्या सुनाई   ।  जिस पर कलेक्टर ने सरपंच को जल्द ही समस्याओं को दूर करने की हिदायत दी  ।  लेकिन 1 हफ्ते से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्य नही किया जा सका।

वहीं सरपंच पुत्र का कहना है कि हमारे द्वारा निर्माण कार्य कराया गया है ।  लेकिन आंधी- तूफान के कारण सब निर्माण ढह गये। कांग्रेसियो ने जिले के अधिकारियो और क्षेत्रीय विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि अधिकारियो की मिलीभगत से ही पूरा भ्रष्टाचार का खेल होता है  ।  साथ ही विधायक का सह होने के कारण  उन पर कोई कार्यवाही नही होती। वहीं इस मामले में कलेक्टर और लोरमी एसडीएम भी गोलमोल जवाब देते हुए अपना पल्ला झाड़ लिए।

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