छत्तीसगढ़ मे रजिस्ट्री पर कोई पाबंदी नहीं,ई-पंजीयन से मिली सहूलियत,12 फीसदी अधिक रजिस्ट्री

बिलासपुर, अम्बिकापुर, दुर्ग ,जगदलपुर,ट्रांजिट हॉस्टल,chhattisgarh,pwdरायपुर-राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्री पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। वाणिज्यिक-कर (पंजीयन) विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आम जनता की सुविधा के लिए प्रदेश में ई-पंजीयन प्रणाली फरवरी 2017 से लागू की गई है, जो निरंतर कार्यरत है। रजिस्ट्रीकरण हेतु अनिवार्य बिन्दु, रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के अतिरिक्त, रजिस्ट्रीकरण नियमों में ही, विधिक रूप से निर्धारित है। विधिक रूप से सही रहने के साथ-साथ, ऑडिट के परिप्रेक्ष्य में तथा न्यायालयों में पारित आदेशों के परिपालन में, इन नियमों को कम्प्यूटरीकृत ई-पंजीयन प्रणाली का ही भाग बना लिया गया है।    रजिस्ट्रीकरण नियम 1939 के नियम 19 (ण) और 19(त) में ही जमीन की पहचान हेतु बी-1/खसरा/भू-खण्ड का लेख किया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही प्रत्येक भूमि का कुल रकबा में से कितना रकबा रजिस्ट्री के लिए विचार में लाया जा रहा है, का भी स्पष्ट उल्लेख एवं चिन्हाकंन होना अनिवार्य, विधिक प्रावधान है। जमीन किसके नाम पर वर्तमान में दर्ज है और उसके रकबा संबंधी जानकारी, राजस्व विभाग के अभिलेखों से ही प्राप्त होती है। पूर्व में यह मैन्युवली प्राप्त होता था। अब यह ऑनलाईन हो गया है और दोनों विभागों, पंजीयन एवं राजस्व, के साफ्टवेयर आपस में जोड़कर कार्य निष्पादन निरंतर चल रहा है।

पंजीयन की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। पिछले साल 2017-18 में अप्रैल से जून तक 14 हजार 347 दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था, जबकि चालू वर्ष 2018-19 की इसी तिमाही में 16 हजार 044 दस्तावेज पंजीकृत हुए हैं। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले 12 प्रतिशत ज्यादा है। वर्ष 2017 के जून माह में 9215 पंजीयन हुए थे, जबकि इस वर्ष जून 2018 में 16500 दस्तावेजों का पंजीयन किया गया, जो विगत वर्ष के जून माह की तुलना में 79 प्रतिशत ज्यादा है।

अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में विशेष उल्लेखनीय है कि, दस्तावेजों के साथ रजिस्ट्रिकरण नियम-19 के तहत कृषि भूमि, भवन/भूखण्ड के दस्तावेजों के संबंध में, राजस्व विभाग द्वारा कम्प्यूटरीकृत बी-1, पांचसाला, खसरा ही मान्य होगा तथा उक्त विक्रित सम्पत्ति के खसरों एवं रकबों का राजस्व विभाग के भुइंया साफ्टवेयर से सत्यापन होना भी अनिवार्य है। उक्त साफ्टवेयर में कृषि भूमि के साथ नजूल एवं व्यपवर्तित भूमि का सत्यापन भी किया जाना अनिवार्य है। सत्यापन उपरांत ही दस्तावेज पंजीयन हेतु स्वीकार होगा। भूमि के पंजीयन के लिए भूमि संबंधित दस्तावेज के रूप में, पक्षकारों द्वारा

पटवारी के हाथ से लिखा हुआ मैन्युएल नकल न ले जाकर, कम्प्यूटरीकृत नकल, प्रस्तुत किया जाना चाहिए। यह कम्प्यूटरीकृत नकल भुईयां वेबसाईट से कोई भी प्राप्त कर सकता है। यह आम जनता की सुविधा के लिए रखा गया है। पंजीयन पर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं है। राज्य के पंजीयन कार्यालयों में विगत वर्ष 2017-18 में अप्रैल से जून तक 14,347 दस्तावेज का पंजीयन हुआ था, जबकि इस वर्ष 2018-19 में अप्रैल से जून तक 16,044 दस्तावेज पंजीबद्ध हुए है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है। लोगों को यह भ्रांति है कि, बिना खसरा नम्बर सत्यापन के दस्तावेज पंजीयन हेतु स्वीकार होता है। यह गलत है। पक्षकार पंजीयन कराने के पहले परख लेेेे कि, उनके द्वारा खरीदी जा रही संपत्ति का भुइंया साफ्टवेयर में सत्यापन हो रहा है या नहीं। मिलान नही होने की स्थिति में पंजीयन कार्य नही हो पाएगा। भुइंया साफ्टवेयर में सुधार/अपडेशन का कार्य राजस्व विभाग से संबंधित है।

किसी भी सुधार/अपडेशन के लिए संबंधित तहसीलदार से संपर्क किया जा सकता है। सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रस्तुत विलेखों का, भुइंया सॉफ्टवेयर से सत्यापन पश्चात, प्रदेश के सभी उप पंजीयक कार्यालयों में ई-पंजीयन साफ्टवेयर के माध्यम से, पंजीयन सुलभता से हो रहा है।

वर्तमान में, नजूल संपत्ति के विषय में प्राधिकृत अधिकारी से प्रमाणित नजूल संधारण खसरा में उल्लेखित नजूल शीट क्रमांक/ब्लाक क्रमांक एवं भूखण्ड क्रमांक को पंजीयन के लिए, राजस्व विभाग द्वारा मान्य किये जाने के उपरान्त से, ई-पंजीयन साफ्टवेयर के माध्यम से भुईंयां से शीट क्रमांक/ब्लाक क्रमांक एवं भूखण्ड क्रमांक का सत्यापन होने पर, दस्तावेजो का पंजीयन हो रहा है। राजस्व विभाग द्वारा भुईयां में 1,331 नजूल शीट और उनसे जुडे सभी प्लाट संबंधित जानकारी ऑनलाईन की जा चुकी हैै।

पाँच जुलाई से सात जुलाई तक नगरीय निकायों में नजूल भूमि की 20 रजिस्ट्री संपादित होकर पूर्ण हो चुकी है। इन 20 में से रायपुर के 02, बिलासपुर के 06, राजनांदगांव के 03, धमतरी के 03, जगदलपुर के 05 एवं बलौदाबाजार के 01 सफल नजूल रजिस्ट्री पूर्ण होना शामिल है। इसी प्रकार राजस्व विभाग द्वारा भुईयां में 1525 परिवर्तित मेन्टेनेंस खसरा के मास्टर शीट और उनसे जुडे सभी प्लाट संबंधित जानकारी ऑनलाईन की जा चुकी हैै। ऐसे पूर्ण एवं अद्यतन हो चुके नजूल और परिवर्तित, दोनों प्रकार की भूमियों के भी पंजीयन, विधिक रूप से सही तरह, ई-पंजीयन के माध्यम से निष्पादित हो रहे हैं। पंजीयन विभाग द्वारा, पंजीयन की कार्यप्रणाली को आम जनता के लिए विधिक रूप से सही एवं आनलाईन प्रणाली के सुगम उपयोग के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है, जिससे कि बिना किसी मध्यस्त के, पक्षकार स्वयं ही ई-पंजीयन प्रणाली का उपयोग कर सके।   अधिकारियों ने बताया -इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि पंजीयन कार्य (भूमि संबंधी एवं अन्य) प्रति दिन नियमित रूप से निरंतर चल रहा है और पूर्व वर्ष की तुलना में इसमें काफी वृद्धि हुई है।

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