शिक्षा कर्मियों के एरियर्स के लिए आबंटन ना मांगें….. पंचायत संचालक के आदेश से शिक्षक संगठनों में आक्रोश … कहा हमारा हक देना पड़ेगा…..

रायपुर । छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में काम कर रहे शिक्षा कर्मियों के शिक्षा विभाग में संविलयन की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो गई है। इस सिलसिलें में करीब रोजाना ही शासन की ओर से नए-नए आदेश जारी हो रहे हैं। ऐसे ही शिक्षा कर्मियों के वेतन -भत्तों के लिए आबंटन की माँग के संबंध में पंचायत संचालक की ओर से जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अदिकारियों के नाम जारी एक आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। जिसमें कहा गया है कि संविलयन के बाद अब 8 साल से कम की सेवा वाले शिक्षा कर्मियों के वेतन के लिए ही आबंटन की मांग  भेजी जाए। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्थिति में एरियर्स राशि की मांग  न की जाए। इस बारे में शिक्षा कर्मी संगठन के नेताओँ का कहना है कि हजारों शिक्षा कर्मियों के बकाया वेतन और समयमान वेतन आदि के एरियर्स का भुगतान पेंडिग है। ऐसी स्थिति में एक-एक शिक्षा कर्मी को लाख-लाख रुपए का नुकसान हो सकता है औऱ उन्हे एरियर्स की राशि से हाथ धोना पड़ सकता है। शासन को  नए सिरे से इस पर विचार कर आदेश जारी करना चाहिए । जिससे शिक्षा कर्मियों को सभी बकाया राशि का भुगतान समय पर हो सके ।
नवीन शिक्षाकर्मी संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा कि  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के संचालक का पंचायत शिक्षक संवर्ग के लिए एरियर्स राशि की मांग न करने सम्बन्धी आदेश अव्यवहारिक है ।  क्योकि 1 जुलाई 2018 से राज्य सरकार द्वारा 8 वर्ष पूर्ण कर चुके शिक्षक पंचायत संवर्ग को शिक्षा विभाग मे संविलियन करने का निर्णय लिया गया है  ।  जिसके कारण 8 वर्ष पूर्ण कर चुके शिक्षक पंचायत संवर्ग को संचालक पंचायत के आदेश के बाद अपने ही कमाये वेतन के एरियर्स राशि से हाथ धोना पड़ सकता है    ।  पंचायत विभाग की लापरवाही के कारण लाखो शिक्षाकर्मियों का वार्षिक वेतन वृद्धि,डीए व समयमान वेतनमान की अंतर राशि करोड़ो मे भुगतान नही किया गया है  । पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग शिक्षक पंचायत संवर्ग के अंतर का राशि जल्द ही आबंटन कर एरियर्स के रूप मे शिक्षक पंचायत संवर्ग को भुगतान करे और अपनी गलती की सजा शिक्षक पंचायत संवर्ग को न दे।
शासन द्वारा शिक्षाकर्मीयो के एरियर्स भुगतान सम्बन्धी रोक लगाए जाने पर शिक्षक पं/ननि एम्पलाइज एसोसिएशन, छग के अध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग का कहना है कि पँचायत संवर्ग के शिक्षको के एरियर्स पर रोक लगाना सरासर गलत है।सरकार को चाहिए था कि संविलियन के पहले शिक्षाकर्मियो के सभी प्रकार का पिछला भुगतान कर दिया जाना था ।  पर अपनी इच्छाशक्ति और अधिकारियों के सौतेला व्यवहार के कारण आज पर्यन्त तक पिछला भुगतान रुका है  । जिसे न देकर शासन एक नए आंदोलन को जन्म दे रहा है तथा शिक्षाकर्मीयो के कोप का भाजन बन रहा है।
शिक्षक पंच./ननि एम्पलाइज एसोसिएशन के प्रदेश सचिव शिव सारथी ने पंचायत  संचालकके आदेश की आलोचना करते हुए कहा  कि शिक्षाकर्मी लगातार 22 वर्षो से शासन से आर्थिक और मानसिक शोषण का शिकार होते आये है  । उनका समय रहते लम्बित डी. ए. ,परिवीक्षा अवधि, समयमान व निम्न से उच्च पद के एरिर्यस का भुगतान कर दिया जाना था  ।  पर ऐसा नही किया गया  फिर भी हमे उम्मीद थी  कि देर – सबेर भुगतान हो ही जायेगा ।  पर संचालक का रोक  सम्बधी आदेश तुगलकी आदेश हैं  । जिसकी निंदा करते हुए तत्काल पिछले एरियर्स भुगतान की मांग करते है वरना इसके लिए भी आंदोलन किया जाएगा।
व्यख्याता पंचायत संघ के प्रांताध्यक्ष कामलेश्वर   सिंह ने कहा कि संचालक पंचायत संचनालय द्वारा पिछला एरियर्स की मांग न करने के सम्बद्ध में जो आदेश किया है यह विधि सम्मत नही है  .  क्योंकि प्रत्येक कर्मचारी को अपने पूर्व के वेतन से सम्बंधित बकाया राशि पाने का  अधिकार है । जैसे, समय समय पर जारी महँगाई भत्ता की की किश्त की राशि ,सात वर्ष से 08 वर्ष के बीच में समयमान वेतन की अंतर की राशि ,रुके हुआ वेतन की राशि आदि । नियमानुसार जो एरियर्स आने का हक है उसके लिए आबंटन जारी करना चाहिए ।
सहायक शिक्षक कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष भूपेंदर बनाफर ने कहा कि शिक्षाकर्मियों के एरियर्स का मुद्दा अब एक गंभीर विषय हो गया है  ।  इसे हल्के में नही ले रहे है।इस मामले को लेकर हम जल्द ही रायपुर में उच्च अधिकारियों से मिलेंगे।और मेरा आग्रह है कि पंचायत व नगरीय निकाय के सभी शिक्षक संघों को एक सुर में इस विषय को शासन की ओर से मांगें गए सुझाव के साथ इस एरियर्स भुगतान की समस्या पर शिक्षा कर्मीयो का मजबूती से पक्ष रखना होगा। एक आम मुद्दे पर अपनी शिक्षक एकता का प्रदर्शन करना होगा। एरियर्स शिक्षा कर्मीयो के वाज़िब हक का पैसा है।इसके हमारा सहायक शिक्षक कल्याण संघ सरकर से  लड़ने को तैयार है।

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