अब अमित जोगी बोले -शिक्षाकर्मियों के साथ हुआ धोखा,त्रुटि सुधारने सुझाए तीन तरीके

रायपुर।छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में काम कर रहे शिक्षा कर्मियों के संविलयन की घोषणा और कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद भी इसे लेकर कयासों और अनुमानों का दौर जारी है। इस सिलसिले में मरवाही विधायक अमित जोगी ने बयान जारी कर कहा कि संविलयन के इस मसौदे से शिक्षा कर्मी वर्ग – 3 को काफी नुकसान हो रहा है और पहले से चली आ रही वेतन विसंगति की वजह से उन्हे उम्मीद के हिसाब से लाभ नहीं मिल पा रहा है। अमित जोगी ने कहा कि संविलयन से पहले वेतन विसंगति दूर कर दी जाए तो इससे वर्ग -3 और सभी शिक्षा कर्मियों के आक्रोश को कम किया जा सकता है।

इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए अमित जोगी ने कहा कि अविभाजित मध्यप्रदेश में शिक्षा कर्मी भर्ती एवम् सेवा की शर्ते नियम 1997 में ही वेतन विसंगति का बीज रोपण हो गया था ।यदि 1997 में ही तत्कालीन श्री दिग्विजय सिंह की सरकार में वेतन पुनरीक्षण नियम 1998 के समतुल्य वर्ग 01 को 4000-100-6000, वर्ग 02 को 3500-80-4700-100-5200, वर्ग 03 को 2750-70-3800-75-44400 दिया गया होता तो विसंगति कम हो जाती । परन्तु वर्ग एक को 1200-40-200, वर्ग दो को 1000-30-1600, वर्ग तीन को 800-20-1200 दिया गया।

शासकीय शिक्षको के समतुल्य वेतन का सिलसिला 2007 में संशोधित वेतनमान से शुरू हुआ । जिसमे वर्ग को 5300, वर्ग 02 को 4500, वर्ग 03 को 3800 स्वीकृत किया। जो नियमित शिक्षको के पांचवे वेतनमान से क्रमशः 200,500 एवम् 200 कम किया गया था । राज्य शासन ने अपने आदेश दिनांक 17.5.2013 के अनुसार 8 वर्ष की पूर्ण तिथि में शिक्षा कर्मियो को शासकीय शिक्षको के समतुल्य छ.ग.वेतन पुनरीक्षण नियम 2009(3एवम् 04) की अनुसूची एक का वेतन बैंड वर्ग एक को 9300+34800+ग्रेड पे 4300, वर्ग दो को 9300-34800+4200 ग्रेड पे तथा वर्ग तीन को 5200-20200+2400 ग्रेड पे स्वीकृत किया गया ।

अमित जोगी ने कहा कि यहाँ उल्लेखनीय बात है यह है कि शासकीय शिक्षको के समान वेतनमान तो स्वीकृत कर दिया गया परन्तु 23 जून 2018 को जिस तरह शिक्षा सचिव ने 8 वर्ष की पूर्ण तिथि से वेतन रिवीजन करते हुए 1.7.2018 को प्राप्त वेतन का 2.57 से गुणा कर प्राप्त राशि को वेतन मैट्रिक्स में वेतन निर्धारण करने का निर्देश दिया है। ठीक उसी प्रकार दिनांक 1.5.2013 को समयमान /क्रमोन्नत वेतनमान के आधार पर 1.86 से गुणा कर वेतन निर्धारण का आदेश दिया गया होता तो आज की स्थिति में वेतन विसंगति नही होती ।जबकि केवल वेतन निर्धारण नियम 07 को छोड़कर नियम 08 के तहत न्यूनतम में वेतन निर्धारण कर दिया गया ।नियम 05 को छोड़कर नियम 13 के तहत पदोन्नत वेतन के आधार पर वेतन पुनरीक्षण कर दिया गया ।

अमित जोगी ने सवाल किया कि नियम 09 के तहत प्रत्येक वर्ष मूल वेतन का 3% वार्षिक वेतन वृद्धि ,नियम 10 के तहत प्रत्येक वर्ष 1 जुलाई को वार्षिक वेतन वृद्धि करने का नियम लागू किया तो नियम 07 के तहत विद्यमान मूल वेतन का 1.86 से गुणा करने ,नियम 05 के तहत समयमान/क्रमोन्नत वेतनमान में वेतन उन्नयन के आधार पर क्यों नही किया गया ?

जोगी ने बताया कि पिछले वेतनमान निर्धारण में हुई त्रुटि को कैसे सुधरा जाये:
– पहला कि समतुल्य वेतनमान में 1.5.2013 से पूर्व प्राप्त समयमान /क्रमोन्नत वेतनमान के आधार पर वेतन पुनरीक्षण करते हुए वेतन की गणना की जाये तथा 1.7.2018 की स्थिति में प्राप्त विद्यमान मूल वेतन का 2.57 से गुणांक कर वेतन किया जाये ।
– दूसरा यह कि 8 वर्ष की तिथि में समतुल्य वेतनमान के न्यूतम में वेतन निर्धारण किया गया है । प्रत्येक वर्ष वेतन वृद्धि करते हुए 10 वर्ष की तिथि में शासकीय शिक्षको के समान समयमान योजना के तहत प्रथम उच्चतर वेतनमान का वेतन बैंड एवम् ग्रेड में क्रमशः व्यख्याता को 4800,शिक्षक को 4400 एवम् सहायक शिक्षक (एलबी) को 4200 ग्रेड पे दिया जाये
– तीसरा कि छ.ग.वेतन पुनरीक्षण नियम 2017 के नियम 05 के 1.7.2018 की स्थिति में क्रमोन्नत वेतनमान के आधार पर वेतन निर्धारण किया जाए।

अमित जोगी ने कहा कि वेतन विसंगति को समयमान /क्रमोन्नत वेतनमान के आधार पर वेतन पुनरीक्षण नियम 2009 के नियम 07 (क) के तहत कर दूर किया जा सकता है इससे वर्ग 03 सहित सभी वर्गो के आक्रोश को कम किया जा सकता है ।

Comments

  1. By Kamlesh kumar patel

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  2. By Narayan singh rajput

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  3. By Omprakash

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  4. By दिनेश कुमार नायक

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  5. By दिनेश कुमार नायक

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    • By Dipendra Singh

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  6. By Chandra shekhar soni

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