..अब शिक्षाकर्मियों ने कहा..यह कैसा संविलियन…अधिकार तो मिला..लेकिन हाथ पीछे बांधा गया..आक्रोश वाजिब

बिलासपुर– संविलियन आदेश जारी होने के बाद भी वर्ग तीन शिक्षाकर्मियों की नाराजगी अब भी कायम है। नाराजगी का असर अन्य वर्गों में भी है। यद्यपि शासन का कहना है कि इससे अच्छा तोहफा कुछ हो नहीं सकता। तो दूसरी तरफ शिक्षाकर्मियों का मानना है कि बहुत कुछ ऐसे मामले हैं जिन्हें शासन ने संविलियन आदेश में स्पष्ट कर दिया होता तो हम भी मान लेते कि इससे बेहतर संविलियन हो ही नहीं सकता था। शिक्षाकर्मियों ने बताया कि आदेश में बहुत कुछ स्पष्ट करने की जरूरत है।

                          संविलियन फरमान जारी होने के बाद शिक्षाकर्मी काफी खुश थे। धीरे धीरे खुशी आक्रोश में बदलने लगी है। शिक्षाकर्मियों का कहना है कि आदेश में बहुत कुछ स्पष्ट नहीं किया गया है। सही मायने में आदेश अपूर्ण , त्रुटि पूर्ण और भविष्य में अनेक व्यवहारिक दिक्कतों को जन्म देने वाली है।

                                 शिक्षाकर्मी नेता अमित ने बताया कि सहायक शिक्षक पंचायत वर्ग तीन की वेतन विसंगतियों और क्रमोन्नति को लेकर आदेश में स्पष्ट निर्देश नही दिया गया है। यह जानते हुए भी शिक्षाकर्मी संघ में सर्वाधिक संख्या यानि एक लाख से अधिक लोग वर्ग तीन से हैं। आदेश में वरिष्ठता पर कोई स्पष्ट निर्देश नही है। अभी तक अप्रशिक्षित शिक्षा कर्मियों को पुनरीक्षित वेतनमान का लाभ नही दिया जाता था। सवाल उठता है कि क्या संविलियन के बाद वर्ग तीन के शिक्षाकर्मियों को इसका लाभ मिलेगा। इसे स्पष्ट नहीं किया गया है।

            अमित नामदेव के अनुसार वर्ग तीन शिक्षाकर्मियों को समानुपातिक वेतनमान का लाभ, क्रमोनन्ति वेतन मान का लाभ स्पष्ट नहीं है। काफी हद तक असंतोष दूर हो सकता किया जा सकता है यदि शासन 1 जुलाई 2018 से सातवें वेतनमान का लाभ, एरियर्स, वेतन विसंगति दूर कर सही वेतन का निर्धारण कर दे। स्थानांरतण से आये शिक्षकों को वरिष्ठता का लाभ देने के साथ ही स्थानांतरण नीति को प्रमुखता से लागू करे। अप्रशिक्षित शिक्षको को अन्य शिक्षकों की तरह लाभ देते हुए लंबित अनुकंपा पीडि़त परिवार को तत्काल नियुक्ति देने का एलान कर दिया जाए।

                     चूंकि शासन ने संविलियन आदेश में इन सभी बातों को स्पष्ट नहीं किया है। शिक्षकों की तमाम समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई है। जाहिर सी बात है कि नाराजगी भी बनी रहेगी। अमित ने शासन पर आरोप लगाया है कि अधिकार तो मिला लेकिन हाथ पीछे कर बांध दिया गया है।

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