MP मे अध्यापक कर रहे संविलयन के आदेश का इंतज़ार,सामने है आचार संहिता,अब तक क्या हुआ?किसी को खबर नहीं


भोपाल।
मध्य प्रदेश अध्यापक नेता रमेश पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश में 29 मई को मंत्रिमंडल द्वारा अध्यापकों के संविलियन का निर्णय हो चुका था लेकिन उस संविलियन प्रक्रिया की वायरल संस्थापिका को पढ़कर अध्यापकों में भारी रोष व्याप्त था।24 जून को “अध्यापक आंदोलन मध्यप्रदेश” के बैनर पर अध्यापक एकजुट हुआ और हजारों की संख्या में शाहजहानी पार्क भोपाल में पहुंचकर आक्रोश व्यक्त किया।संभावित आदेश में बदलाव की मांग को लेकर 25 जून एवं 26 जून को अध्यापक आमरण अनशन पर भी बैठे लेकिन मुख्यमंत्री जी से चर्चा के उपरांत आमरण अनशन समाप्त कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि आपके हितो को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।आदेश में अध्यापको की मंशानुसार बदलाव का भी उन्होंने संकेत दिये एवं 2 सप्ताह में आदेश जारी करने की बात कही।जहां तक अध्यापकों से संबंधित किसी आदेश के मामले में मध्यप्रदेश में इसके पूर्व बहुत ही बदतर स्थिति रही है।अध्यापक आशंकित है कि आदेश चुनाव आचार संहिता लगने के थोडे दिन पूर्व ना जारी किया जाए? तब विसंगति पर विरोध करने का समय भी अध्यापकों के पास नहीं होगा।उस स्थिति मे जो दिया जायेया उसे ही मजबूरन स्वीकार करने की स्थिति बनेगी इसलिए प्रत्येक अध्यापक संघ का प्रयास है कि जल्दी से जल्दी 15 जुलाई के पूर्व आदेश जारी हो जाए।
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रमेश पाटिल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी शिक्षाकर्मियों के शिक्षा विभाग में संविलियन का प्रस्ताव पास हो चुका है। संविलियन के लिए 8 साल की सेवा अनिवार्य की गई है।जिससे बहुत बड़ा शिक्षाकर्मियों का वर्ग असंतुष्ट हैं। वे चाहते हैं की मध्यप्रदेश की तरह समस्त शिक्षाकर्मियों का शिक्षा विभाग में संविलियन किया जाए। लेकिन लगता नहीं है कि इसमें कुछ सुधार हो पाएगा। छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मियों के संविलियन प्रक्रिया में जो मध्यप्रदेश से बेहतर चीज है वह यह है कि संविलियन की कागजी  प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। मध्यप्रदेश में अध्यापकों की संविलियन प्रक्रिया के सम्बन्ध मे क्या हो रहा है? इसकी भनक भी अध्यापको को नहीं लग रही है।
मध्य प्रदेश अध्यापक नेता ने कहा कि मध्यप्रदेश में मामा जी के नाम से लोकप्रिय मुख्यमंत्री की मामलो को निपटाने की अत्याधिक धीमी रफ्तार, प्रचार ज्यादा काम कम वाली लिंगाराम कि चिरपरिचित कार्यप्रणाली और छत्तीसगढ़ में चाउर वाले बाबा के नाम से लोकप्रिय मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली एक तो कहो मत और कहां है तो उसे जल्दी पूरा करो को देखते हुए लगता है कि संविलियन प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मी बाजी मार ले जाएंगे लेकिन संविलियन मध्यप्रदेश के अध्यापको का ज्यादा बेहतर होगा।

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