CM डॉ. रमन सिंह ने की घोषणावृक्षारोपण को बढ़ावा देने प्रदेश में शुरू होगी हरियर छत्तीसगढ़ पुरस्कार योजना

♦इस वर्ष अगस्त तक सात करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य
♦सभी विभागों को लक्ष्य दो माह में पूर्ण करने के निर्देश
रायपुर।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रदेश में इस वर्ष मानसून के दौरान शासन के विभिन्न विभागों सहित आम जनता और विभिन्न उद्योगों की भागीदारी से सात करोड़ वृक्ष लगाने का लक्ष्य दिया है। उन्होंने वन विभाग से कहा है कि पिछले वर्षाें के दौरान हुए वृक्षारोपण और इस वर्ष होने वाले वृक्षारोपण का अलग-अलग भौतिक सत्यापन किसी तीसरे पक्ष से करवाया जाए। डॉ. सिंह ने मंत्रालय में आयोजित हरियर छत्तीसगढ़ वृक्षारोपण महा अभियान की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को अभियान के संबंध में जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि हरियर छत्तीसगढ़ अभियान में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जाए।मुख्यमंत्री ने इस वर्ष के वृक्षारोपण के लक्ष्य को अगले दो माह में (माह अगस्त तक) पूर्ण करने के भी निर्देश दिए। बैठक में वन मंत्री महेश गागड़ा और मुख्य सचिव अजय सिंह सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

डॉ. रमन सिंह ने राज्य में वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए हरियर छत्तीसगढ़ पुरस्कार योजना की भी घोषणा की। यह पुरस्कार वन विभाग के फारेस्ट गार्ड स्वर्गीय मनिराम गोंड के नाम  पर देने का निर्णय लिया गया, जिन्होंने लगभग 117 वर्ष पहले अंग्रेजों के शासन काल मेंवर्ष 1891 में रायपुर जिले के वर्तमान उत्तर वन मंडल के ग्राम गिदपुरी के पास शासकीय वन प्रक्षेत्र में स्वप्रेरणा से नौ हेक्टेयर के रकबे में सागौन का प्लांटेशन किया था।   अंग्रेज हुकूमत को मनिराम का यह कार्य अच्छा नहीं लगा। इस वजह से अंग्रेज प्रशासन ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। इसके बावजूद मनिराम उस प्लांटेशन के किनारे अस्थायी झोपड़ी बनाकर रहने लगे और सागौन के वृक्षों की देखभाल करने लगे। वर्ष 1982 में इन वृक्षों की औसत गोलाई 185 सेंटीमीटर और ऊंचाई 30 मीटर से ज्यादा दर्ज की गई थी। मनिराम प्लांटेशन आज भी वनों की रक्षा के लिए उनकी कर्मठता और समर्पण भावना की याद दिलाता है। तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार ने इस प्लांटेशन के 105 वर्ष पूर्ण होने पर वर्ष 1996 में स्वर्गीय मनिराम के वंशजों को सम्मानित और पुरस्कृत भी किया था।

मुख्यमंत्री ने आज की बैठक में कहा कि  हरियर छत्तीसगढ़ अभियान के तहत लगाए जाने वाले पौधों की सुरक्षा पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस वर्ष प्रदेश में वृक्षारोपण के लिए बाहर से पौधे नहीं खरीदे जाएं। वन विभाग की नर्सरियों में पर्याप्त संख्या में ऐसे पौधे तैयार हैं, जिनकी अच्छी ग्रोथ हो चुकी है।  ऐसे पौधों का उपयोग वृक्षारोपण में किया जाना चाहिए। डॉ. सिंह ने प्रदेश के अधिकांश उद्योगों द्वारा पिछले वर्ष के वृक्षारोपण के लक्ष्य को पूरा नहीं किए जाने पर नाराजगी जतायी और मुख्य सचिव से कहा कि वे सभी प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों के मैनेजमेंट के पदाधिकारियों की बैठक बुलाकर उन्हें इस संबंध में जरूरी निर्देश दें। डॉ. सिंह ने आज की बैठक में यह भी कहा कि अगर कोई निजी संस्था स्वयं वृक्षारोपण करना चाहे तो वन विभाग इसके लिए सहयोग करें। उन्होंने वृक्षारोपण में अधिक से अधिक संख्या में फलदार पौधे लगाने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर और सरगुजा जैसे पहाड़ी इलाकों में काजू और कटहल लगाए जाने चाहिए। इसी तरह सड़कों के किनारे आम के वृक्ष लगाए जाएं तो उनसे लम्बे समय तक फलों के साथ-साथ छाया भी मिलेगी। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय जलवायु के अनुसार अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लगाने पर भी बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा- कई क्षेत्रों में वृक्षारोपण के सराहनीय कार्य भी हुए हैं, जिनका वन विभाग द्वारा फिल्मांकन और दस्तावेजीकरण किया जाना चाहिए। साथ ही ऐसे सराहनीय कार्याें का व्यापक प्रचार-प्रसार भी होना चाहिए। लगाए गए पौधों की कम से कम तीन वर्षाें तक अच्छी देखभाल होनी चाहिए।

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