शिक्षाकर्मी संविलयनःMP में CM की घोषणा औऱ कैबिनेट फैसले में भारी अँतर,आक्रोशित अध्य़ापक उतरे सड़क पर


छिंदवाड़ा।समय समय पर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा अध्यापक संवर्ग के लिए की गई घोषणाएं और उनके नेतृत्व में ही  मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए 29 मई के निर्णय में भारी अंतर को देखते हुए मध्यप्रदेश का हर अध्यापक आक्रोशित है।उन्हें अपना भविष्य और बुढ़ापा अंधकारमय नजर आ रहा है।संभावित आदेश से अध्यापकों को कोई बड़ी राहत मिलते भी नजर नहीं आ रही है। अध्यापक संघों के रीढ-हिन नेतृत्व से प्रत्येक अध्यापक तिलमिलाया हुआ है। अध्यापकों के आक्रोश को दिशा देने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है।ऐसे में छिंदवाड़ा जिले का प्रत्येक अध्यापक अपने नेतृत्व में 29 मई को  मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णय के विरोध में उठ खड़ा हुआ। अध्यापक छिंदवाड़ा के बैनर के नीचे  छिंदवाड़ा जिले का अध्यापक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पदचिन्हों पर चलते हुए संघ-संगठनों की सीमाओं को तोड़ते हुए सामूहिक उपवास के माध्यम से  मंत्रिमंडल के लिए गए निर्णय को को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया  । साथ ही   मुख्यमंत्री को याद दिलाया है कि  है कि आपने जो घोषणाएं अध्यापक संवर्ग के लिए पूर्व में की है वही हमें आदेश के रूप मे दी जाए।

यह जानकारी देते हुए अध्यापक रमेश पाटिल ने बताया कि अध्यापकों का लंबे समय से शोषण हुआ है। इसका हमें दुख तो है लेकिन उससे भी ज्यादा दुखद स्थिति तब होगी जब प्रदेश का मुखिया ही अपने वादों पर खरा ना उतरने के कारण हमारी और दुनिया की नजर में झूठा साबित हो जाए। यह मध्यप्रदेश के गौरव का प्रश्न है।  मुख्यमंत्री  ने अध्यापकों से शिक्षा विभाग में संविलियन की घोषणा की थी। एक ही विभाग और एक ही कैडर की घोषणा की थी। समान सेवा शर्तों की घोषणा की थी। समान कार्य के लिए समान वेतन मान के आदेश 4 सितंबर 2013 को जारी किए थे।

मध्यप्रदेश राज्य शासन के अन्य कर्मचारियों की तरह 1 जनवरी 2016 से सातवें वेतनमान की घोषणा की थी। अध्यापक बस! इतना चाहता है कि  मुख्यमंत्री  अपनी घोषणाओं पर शत-प्रतिशत अमल करें। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र, करूणा सागर महात्मा गौतम बुद्ध, साधु-संतो महात्माओं और ऋषि-मुनि ज्ञानियो के इस देश में प्रदेश का मुखिया अपने वचनों का पालन करें। कर्मी-कल्चर खत्म करने का ढिंढोरा ना पीटे। शिक्षाकर्मी, संविदा शाला शिक्षक, गुरुजी नियुक्ति दिनांक से सेवा की निरंतरता मान्य कर अध्यापक संवर्ग द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कठिन परिश्रम को सम्मान दे।

रमेश पाटिल ने बताया कि अध्यापक छिंदवाड़ा के बैनर तले आयोजित सामूहिक उपवास का पोला ग्राउंड छिन्दवाडा पर नजारा भी अद्भुत था।हजारो अध्यापको की उपस्थिति मे इस सामूहिक उपवास का नेतृत्व मातृशक्तियां कर रही थी। शासक वर्ग को सद्बुद्धि मिले इसलिए भजनों के माध्यम से ईश्वर से प्रार्थना कर रही थी वही शोषण के विरूद्ध अपने आप को दृढ प्रतिज्ञ कर रही थी। पूरे सामूहिक उपवास के दौरान ना भाषणबाजी हुई ना नारेबाजी की गई।

उन्होने बताया कि पोला ग्राउंड से फव्वारा चौक तक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा तक मौन जुलूस निकाला गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के पश्चात मौन भाव से ही स्वच्छता अभियान चलाया गया। इसके पश्चात तय सीमा पर मौन जुलूस का कारवां कलेक्टर के कार्यालय की ओर बढ़ा। जहां कलेक्टर  को मुख्यमंत्री के नाम अपनी मांगों  (  जो कि समय समय पर  मुख्यमंत्री   द्वारा घोषणा की गई थी ) का   ज्ञापन सौंपा गया।तत्पश्चात  स्थानीय समस्याओं को लेकर भी अध्यापकों का प्रतिनिधिमंडल जिला शिक्षा अधिकारी  और आयुक्त  से मिला।

रमेश पाटिल ने कहा कि यह छिंदवाड़ा जिले के अध्यापकों की  मौन क्रांति थी। यदि अब भी प्रदेश का अध्यापक नेतृत्व ईमानदारी से संघर्ष के लिए आगे नही आया तो छिंदवाड़ा जिले का अध्यापक, अध्यापक छिंदवाड़ा के बैनर को व्यापक रूप देकर  अध्यापक मध्यप्रदेश का नाम देकर राजधानी भोपाल में सत्याग्रह करने के लिए बाध्य हो जाएगा। अध्यापकों में आक्रोश की चिंगारी छिंदवाड़ा में लग चुकी है। कोई कारण नहीं की मध्यप्रदेश के प्रत्येक जिलों में आक्रोश की ज्वाला भड़केगी। गुरू से झूठ बोलना और उनका शोषण यह भारतीय शासको की परम्परा नही रही है। इस देश मे शिक्षक हमेशा सम्मान का पात्र रहा है। अब यह गौरवशाली परम्परा विदेशों मे चली गई है। उसी सम्मान को पाने के लिए आज छिन्दवाडा जिले के अध्यापको ने कदम बढाये है।

 

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