कांग्रेस प्रवक्ता का सवाल..मेयर और सभापति को गुस्सा क्यों आता है…कहा…कमिश्नर साहब सावधान…हो जाएंगे साजिश के शिकार

बिलासपुर—अरपा बचाओ अभियान के बहाने कांग्रेस ने बिलासपुर में चुनावी जंग का अघोषित एलान कर दिया है। कांग्रेसी पिछले पांच दिनों से अरपा बचाओं अभियान के बहाने सड़क पर है। कांंग्रेसियों ने अरपा विकास पर निगम प्रशासन की घोषणा को अपनी जीत बताया है। प्रेस नोट जारी कर निगम आयुक्त के एलान को डैमेज कंट्रोल बताया है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश पाण्डेय ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि डैमेज कंटोल की कमान आयुक्त के हाथ में है। क्योंकि अखबार के माध्यम से आयुक्त ने जो भी बयान दिया है। उसमें हकीकत कम अफसाना ज्यादा है।दरअसल वर्षों पुरानी परियोजना को आयुक्त के मुंह से कहलवा कर लोगों में भ्रम फैलाने का काम किया जा रहा है।
                       कांग्रेस की तरफ से प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रवक्ता शैलेश पांडेय ने प्रेस नोट जारी कर अरपा विकास पर दिए गए आयुक्त के बयान को आड़े हाथ लिया है। पाण्डेय ने कहा कि अरपा विकास का मास्टर प्लान 2013 से ही बनकर तैयार है।  5 साल पहले एसोसिएट्स साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2013 में ही बनाकर प्रकाशित किया है। योजना के चौथे अध्याय जल विज्ञान एवं नदी चैनलाइजेशन की कंडिका 4.4.3 में दो ब्रिज और 7 वाटर वेयर बनाने की बात कही गयी है।  मास्टर प्लान के पांचवे अध्याय में उपलब्ध भूमि की जानकारी दी गयी है। जितनी भी रिटेनिंग वॉल घाट में बोटिंग, भैसाझार से पानी लाने की व्यवस्था ,सिटी म्यूजियम या कमर्शियल दुकानें सड़कें, गार्डन ,पार्क भवन बनाने की सारी बातें प्लान में लिखी हुई है। दरअसल कुछ ऐसा ही बयान मंत्री ने पांच साल पहले भी दिया था।
           अरपा विकास पर 8 करोड़ 20 लाख शासन से स्वीकृत है। डीपीआर बनाने के लिए लगभग 1200 एकड़ निजी भूमि आ रही है। किसी भी निजी भूमि अधिग्रहण के लिए 70% भू-धारकों की सहमति होना आवश्यक है । प्रशासन ने इस दिशा में कोई पहल नहीं किया है । सिंगल विंडो की बात की जा रही है। कई लोगों का सैकड़ों आवेदन पेंडिंग है। अभी तक निराकरण नहीं किया गया है। लोग जमीन की खरीदी बिक्री नहीं कर पा रहे हैं।
                            कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि निगम आयुक्त ने अपने बयान में विकास प्राधिकरण को प्रशासकीय और पर्यावरणीय स्वीकृति की बात कही है। लेकिन उन्होंने इन दोनो स्वीकृति का शासकीय पत्र जारी नहीं किया है। जिस प्राधिकरण के गजट नोटिफिकेशन को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने विधि शून्य घोषित किया है । उसे प्रशासकिय स्वीकृति मिल गयी ऐसा अंधेर भाजपा शासन काल में ही हो सकता है ।
         कांग्रेस नेता ने बताया कि निगम आयुक्त ने अरपा योजना 16.8 किमी की बात की है । लेकिन योजना के दोनों ओर की चौड़ाई क्यों उजागर नहीं की जा रही है। आयुक्त ने कहा है कि योजना में 91 किमी सड़क का निर्माण किया जाएगा। ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि अरपा के दोनों ओर 200 मीटर भूमि क्यों ली जा रही है । विकास योजना में निजी भूमि 291.41 हेक्टेयर और शासकीय भूमि 360.05 हेक्टेयर ली जा रही है । आयुक्त कह रहे है कि निजी भूमि को विकसित कर उसका 35 प्रतिशत भू-स्वामी को दिया जाएगा । मतलब भू-स्वामी से जमीन 100 प्रतिशत ली जाेगी। लेकिन 35 प्रतिशत ही वापिस होगी। प्राधिकरण भू-स्वामी को भू-अर्जन का नगद मुआवजा देगी या नही इस पर आयुक्त खामोश है ।
                           विकास प्राधिकरण को पूर्व में तीन करोड़ स्वीकृत हुआ अब 8 करोड़ 20 लाख देने की बात की जा रही है। सब जानते है कि राज्य शासन और निगम ने अपने बजट में अरपा विकास प्राधिकरण के लिए कोई राशि आबंटित नही है। फिर 8 करोड़ रुपये कहा से आ रहे है । निगम में वैसे भी एक मद का पैसा दूसरे मद में डालने का रिवाज  है । आयुक्त सजग रहे यही सभापति और महापौर काम निकल जाने के बाद सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी की एफआईआर कराते है । पूर्व आयुक्त हनीफी के खिलाफ पूर्व महापौर विनोद सोनी ने सिविल लाइन थाने में अपराध दर्ज कराया था ।
आखिर क्यों उत्तेजित हो रहे
शैलेश ने कहा कि अरपा विकास प्राधिकरण पर प्रश्न उठने से नगर पालिक निगम बिलासपुर के सभापति उत्तेजीत क्यों हो रहे है । अरपा बचाव पदयात्रा की घोषणा के दिन से महापौर निगम आयुक्त और सभपति स्वयं अरपा विकास प्राधिकरण को बचाने में लगे है । जबकि कांग्रेस का आंदोलन अरपा बचाने के लिए है । जिस मुद्दे पर वे स्वतः सफाई दे रहे है तो पूछने वाले फर्जी कैसे? सभापति स्वयं जानते है कि अरपा योजना पर एक से अधिक बार सामान्य सभा में प्रश्न हुए है। अरपा जहां खारून से मिलती है वहां लगा ईंट भट्ठा किसका है ? कुछ माह पहले इसी निगम के तीन दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने सभापति के निजी आवास पर काम करने से इंकार किया था । क्योंकि सभापति कर्मचारियों से ईंट भट्ठे पर बंधवा मजदूरी कराते है ।

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