शिक्षा कर्मी अभी रखें फूंक फूंक कर कदम …. शेषराज की खुली चिट्ठी – आर्डर देखने के बाद ही पहनाएँ फूलमाला….

बिलासपुर। शिक्षाकर्मी नेत्री गंगा पासी के मुंडन के ऐलान पर खुला पत्र लिखकर मुंडन टलवाने वाली  कांग्रेसी नेत्री शेषराज हरवंश ने फिर एक बार शिक्षाकर्मियों के नाम पत्र लिखकर उनके संघर्ष को नमन करते हुए आगे के लिए सचेत रहने की अपील की है  ।   उन्होंने अपने पत्र में लिखा है  कि आपने अपने अदम्य साहस और बुलंद हौसलों से असंभव को संभव कर दिखाया…..आपके 15 दिवस के संघर्ष के दौरान जिस मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने घमंड के साथ आपके विषय मे मीडिया को यह वक्तव्य दिया था की संविलियन संभव ही नहीं है……. यह न तो कभी हुआ है…… और न ही  होगा, उन्हें मात्र 6 माह में आपने अपने जुझारूपन से इस प्रकार मजबूर किया कि उन्हें आप के संविलियन की घोषणा को मजबूर होना पड़ा……यह आप की ऐतिहासिक जीत है और अन्य कर्मचारी संगठनों के लिए प्रेरणादायक और उदाहरण है कि अपने हक के लिए आखिरकार कैसे संघर्ष करें और कैसे प्रशासनिक आतंकवाद से मुक्ति पाए…..।

 प्रदेश उपाध्यक्ष,  अनुसूचित जाति विभाग (कांग्रेस ) एवं जिला अध्यक्ष  महिला कांग्रेस जांजगीर – शेषराज हरवंश का पत्रः-

साथियों,

घोषणा तो हो चुकी है पर अभी घोषणा का स्वरूप आना बाकी है और आप के पूर्व अनुभव से  आप सहज रुप से अंदाजा लगा सकते हैं कि इसमें कई प्रकार की विसंगति होने की संभावना है । मेरी भगवान से प्रार्थना है की विसंगति रहित संविलियन की आपको प्राप्ति हो  । लेकिन 2013 का अनुभव इस बात का गवाह है कि दिए हुए लाभ को आप को ही दो वर्गों में बांटने के लिए प्रयोग किया जा सकता है  । जैसे 2013 में किया गया था और 8 वर्ष के समय सीमा बंधन के साथ बीच में एक रेखा खींच दी गई  । जिसका दंश आज तक आप लोग झेल रहे हैं साथ ही उस समय वेतन निर्धारण में की गई विसंगति के कारण आप आज भी अपने साथ नियुक्त हुए मध्यप्रदेश के साथियों से 8 से 10 हजार कम पा रहे है।
खास तौर पर शिक्षाकर्मी वर्ग 3 के साथ तो विसंगतियों का चोली-दामन का साथ बना दिया गया है ।  अन्य प्रदेश के साथ-साथ अपने प्रदेश में भी उन्हें सही वेतन प्राप्त नहीं हो पा रहा है और पदोन्नति के अभाव में योग्य होने के बावजूद हजारों शिक्षाकर्मी साथी उसी वेतनमान पर दो दशक से काम करने को मजबूर है ।  यदि क्रमोन्नति वेतनमान भी प्रदेश में दे दिया जाता तो स्थिति में सुधार हो सकता था ।  पर इस प्रदेश में दे कर काट लेने की परंपरा वर्तमान सरकार ने विद्यमान कर दी है  ।   जिसके चलते चुनाव के बाद आपके भत्ते भी काट लिए गए और क्रमोन्नति का आदेश भी निरस्त हो गया ।  ऐसी स्थिति में यदि उसी विसंगतिपूर्ण वेतन पर पुनः वेतन निर्धारण किया जाता है तो मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के शिक्षाकर्मियों के वेतन में जो दरार है वह खाई में तब्दील हो जाएगी ।  जिसे आप कभी भी नहीं पाट पाएंगे ।  इसलिए फूलों और गुलदस्तों से लादने के पहले एक बार अपने आदेश का अच्छे तरीके से अध्ययन जरुर कर लीजिएगा।

आप सब उस वर्ग से आते हैं जो प्रदेश का सबसे बुद्धिजीवी वर्ग है और आप अपना भला- बुरा बेहतर तरीके से समझते हैं । प्रदेश के मुख्य सचिव का मीडिया में जो बयान आया था उसके अनुसार “छत्तीसगढ़ का ड्राफ्ट मध्यप्रदेश के ड्राफ्ट से बेहतर होगा” इसका सीधा सा मतलब है कि यहां भी प्रदेश के सभी शिक्षाकर्मियों का एक साथ मूल शिक्षा विभाग में संविलियन होगा और सातवां वेतनमान की प्राप्ति होगी ।  क्योंकि मध्यप्रदेश में क्रमोन्नत वेतनमान भी दिया जा रहा है ।  इसलिए वह भी आपका अधिकार है  । साथ ही वहां और यहां जो वेतन की विसंगति है वह भी दूर होनी चाहिए ।  तभी यहां का ड्राफ्ट मध्यप्रदेश से बेहतर माना जा सकता है ।

सरकार की नीति और नीयत को देखकर ऐसा लगता तो नहीं, पर फिर भी मेरी शुभकामनाएं और हार्दिक इच्छा है की पूर्व के सभी अनुभव इस बार गलत हो जाए और आपको ऐसी विसंगतिरहित  संविलियन की प्राप्ति हो कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को संभालने वाले कर्णधारों के कंधे मजबूत हो सके और आपको आपका जायज हक मिल सके । प्रदेश के किसी शिक्षाकर्मी के साथ वर्ष बंधन के नाम पर कोई अन्याय न हो और सभी का एक साथ मूल शिक्षा विभाग में संविलियन हो यही हमारी कामना और आपके लिए शुभकामना है।

Comments

  1. By Lekh ram

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