सेक्स सीडी मामले मे कॉंग्रेस ने पूछा-रिंकू खनूजा की मौत पर क्या छिपा रही है CBI

रायपुर।कांग्रेस ने राजेश मूणत की कथित सीडी के मामले में एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अगर राजेश मूणत से पहले भी छह मंत्रियों की सीडी बन चुकी थी, तो वे मंत्री कौन है, सभी सीडी के बारे में ‘साहब’ और ‘टॉप बॉस’ को पूरी जानकारी थी तो क्या सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि ये ‘साहब’ और ‘टॉप बॉस’ कौन हैं? क्या ये रमन सिंह जी की ओर इशारा है? प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने आज इस मामले पर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा है कि अगर ये खबरें सही हैं कि सीबीआई ने अपनी जांच पूरी कर ली है तो क्या जांच एजेंसी ने ‘साहब’ और ‘टॉप बॉस’ के बारे में भी जानकारियां जुटा ली हैं? उन्होंने कहा है कि रिंकू खनूजा की मौत के मामले में और सीडी मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के संलिप्तता का आरोप लग रहा है। बालोद में अपनी विकास यात्रा बीच में छोड़कर रमन सिंह जी भागे-भागे रायपुर पहुंचे थे। उसी रात बालोद का रात्रि विश्राम रद्द कर, सुबह की पत्रकारवार्ता रद्द कर राजनांदगांव जाने की घोषणा कर मुख्यमंत्री रमन सिंह रायपुर क्यों लौट आये? रिंकू खनूजा की मौत जैसे संवेदनशील एवं गंभीर मामले में मुख्यमंत्री रमन सिंह पिछले 7 दिनों से अब तक क्यों है मौन?
क्या मुख्यमंत्री कार्यालय खुद को बचाने में लगा हुआ है या फिर किसी और भाजपा नेता को बचाने की जुगत है?

बड़ा सवाल यह है कि कौन था वह ‘आका’ जिसकी सीडी बनाने को लेकर भाजपा नेता प्रकाश बजाज को ब्लैकमेल करने की कोशिश की जा रही थी और कौन था जो जो ब्लैकमेलिंग कर रहा था? पुलिस की डेढ़ महीने की जांच और सीबीआई की छह महीने की जांच में किसके नंबर सामने आए हैं? क्या इसमें पत्रकार विनोद वर्मा का कोई नंबर सीबीआई को मिला है? या फिर प्रकाश बजाज ने झूठी रिपोर्ट लिखाई थी जिससे कि विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया गया?

रिंकू की संदिग्ध मौत पर सवाल
रिंकू खनूजा की मौत यदि आत्महत्या है तो सीबीआई कैम्प की परिस्थितियों की जांच आवश्यक है। यदि यह हत्या है तो इतने संवेदनशील मामलों की गंभीरता से जांच की जावे।प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि फोरेंसिक विशेषज्ञ की राय और परिजनों के आरोपों से साफ है कि रिंकू खनूजा की संदिग्ध मौत आत्महत्या तो नहीं ही थी. तो फिर पुलिस इसकी ठीक तरह से जांच क्यों नहीं कर रही है।
रिंकू के परिवारवालों ने रिंकू के ताऊ को रिंकू के न आने की जानकारी दी थी तो दोपहर सीबीआई कार्यालय से फोन पर सूचना दी गई थी कि रिंकू खनूजा रायपुर में ही है और सुरक्षित है। उनका कहना है कि शाम को जब वे सीबीआई के दफ्तर पहुंचीं तो अधिकारियों ने दोपहर को ऐसी कोई जानकारी देने की बात से ही इनकार कर दिया। जबकि लवली खनूजा ने सीबीआई के हवाले से बताया था कि रिंकू खनूजा की लोकेशन रामकृष्ण अस्पताल के पास थी। अब समाचार मिल रहे है कि रिंकू खनूजा की मोबाइल लोकेशन कभी रामकृष्ण अस्पताल थी ही नहीं। झूठ कौन बोल रहा है और क्यों बोल रहा है?

उन्होंने कहा है कि अब सवाल यह है कि सीबीआई का कौन सा अधिकारी था जिसने दोपहर को फोन उठाया था और रिंकू के ताऊ को बताया था कि रिंकू खनूजा रायपुर में है और सुरक्षित है. और क्यों शाम को इस बातचीत से इनकार कर दिया गया? सीबीआई क्या छिपा रही है? लवली खनूजा को किसने बताया कि उसकी लोकेशन रामकृष्ण अस्पताल के पास थी. अगर रिंकू खनूजा की मौत हो गई थी और मोबाइल उनकी जेब में था तो फिर उनकी लोकेशन कहीं और कैसे हो सकती है?

कुल मिलाकर रिंकू खनूजा के मामले में सीबीआई और पुलिस की भूमिका भी बेहद संदिग्ध है। क्यों यह जांच नहीं की जा रही है कि सीबीआई को अहम जानकारी देने वाले रिंकू खनूजा की मौत से किसे राहत मिलने वाली है? रिंकू खनूजा को क्या सीबीआई ने प्रताड़ित किया और अगर नहीं तो फिर कौन उन्हें रास्ते से हटाना चाहता था। रिंकू क्या-क्या जानता था? रिंकू के और खुलासों से कौन परेशानी में पड़ता ?

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